Wednesday, August 4, 2021
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‘ड्रैगन’ को लेकर उत्तराखंड सरकार का कड़ा फैसला: चीनी कम्पनियाँ हुई टेंडर प्रक्रिया से बाहर

कैबिनेट में हुई इस बैठक के अनुसार चीन सहित किसी भी पड़ोसी देश की कंपनी ग्लोबल टेंडर में प्रतिभाग नहीं ले पाएगी। हालाँकि, इस दौरान चीन का सार्वजनिक तौर पर नाम नहीं लिया गया है। लेकिन नियमावली में संशोधन चीन को ही ध्यान में रखकर किया गया है।

चीनी कंपनियों के साथ व्यापार और ग्लोबल टेंडर प्रकिया में उत्तराखंड सरकार ने केंद्र सरकार की ही नीति अपनाने का फैसला किया है। जिसके तहत अब राज्य में होने वाले किसी भी ग्लोबल टेंडर में चीनी कंपनियाँ शामिल नहीं हो पाएँगी। उत्तराखंड कैबिनेट ने अधिप्राप्ति नियमावली 2017 में संशोधन को हरी झंडी दिखा दी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में बुधवार (10 दिसंबर, 2020) को हुई कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लगाई गई है। कैबिनेट में हुई इस बैठक के अनुसार चीन सहित किसी भी पड़ोसी देश की कंपनी ग्लोबल टेंडर में प्रतिभाग नहीं ले पाएगी। हालाँकि, इस दौरान चीन का सार्वजनिक तौर पर नाम नहीं लिया गया है। लेकिन नियमावली में संशोधन चीन को ही ध्यान में रखकर किया गया है। बता दें कि उत्तराखंड राज्य का बॉर्डर चीन और नेपाल बॉर्डर से लगता है।

कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के मुताबिक प्रदेश में विभिन्न कार्यों के लिए होने वाले टेंडर में ऐसे देशों की कंपनियों के लिए अलग से पंजीकरण अनिवार्य होगा। साथ ही जरूरत पड़ी तो इस पंजीकरण को राज्य सरकार रद्द कर सकेगी। वहीं अब प्रदेश सरकार के विभाग स्वयं सहायता समूहों से पाँच लाख रुपए तक के सामान की खरीद कर सकेंगे। कैबिनेट ने अधिप्राप्ति नियमावली में इस संशोधन को भी मंजूरी दे दी है।

प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के सरकारी व गैरसरकारी क्षेत्र के सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों को 15 दिसंबर से खोलने को मंजूरी भी दी गई। हालाँकि, कोचिंग सेंटर बंद रहेंगे। कक्षाएँ संचालित करते समय कोविड महामारी की रोकथाम को लेकर केंद्र व राज्य सरकार तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा।

राज्य के शहरी विकास मंत्री और सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने आगामी विधानसभा सत्र का हवाला देते हुए कैबिनेट की बैठक को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं दी। लेकिन उन्होंने बताया कि सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में 29 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। शेष एक प्रस्ताव को अगली कैबिनेट बैठक के लिए स्थगित कर दिया गया तो वहीं एक प्रस्ताव पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया है।”

प्रदेश में सरकारी कोटे से पीजी की डिग्री लेने वाले डॉक्टरों के लिए सरकार ने एक नई व्यवस्था तय कर दी है। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि ये डॉक्टर या तो मानदेय (स्टाइपेंड) लेंगे या फिर आधा वेतन। अभी तक इन्हें आधा वेतन ही मिल रहा है। साथ ही बैंक गारंटी अब एक करोड़ से कम कर 50 लाख कर दी गई है।

वहीं महिला सशक्तिकरण को भी उत्तराखंड सरकार ने बढ़ावा दिया है। बदलाव के तहत अब पुलिस महकमे में पीएसी, आइआरबी आदि में तैनात महिला कार्मिकों को भी पदोन्नति के अधिक मौके मिलेंगे। इसके लिए कैबिनेट ने संशोधित नियमावली को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके लिए आरक्षी, महिला आरक्षी, सब इंस्पेक्टर की वरिष्ठता सूची अलग-अलग बनेगी और इन्हें समान रूप से ही पदोन्नति दी जाएगी।

गौरतलब है कि इसी वर्ष लद्दाख में चीन की सीमा पर हुए विवाद के बाद केन्द्र सरकार ने अपने प्रावधानों में संशोधन करते हुए उन सभी देशों को ग्लोबल टेंडर में भाग लेने से अपात्र घोषित कर दिया जिसकी सीमा भारत की सीमा से लगती है। लेकिन राज्य में अभी तक ऐसी व्यवस्था नहीं थी। तो वहीं अब राज्य सरकारें भी भारत सरकार के तर्ज पर चीन को बॉयकॉट कर रही हैं।

इससे पहले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और हरियाणा सरकार ने भी चीनी कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उनके टेंडर को रद्द और किसी सरकारी प्रोजेक्ट में टेंडर डालने में रोक लगा दी थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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