पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) का किला ढह गया है। इस बीच TMC में तनातनी साफ दिख रही है। पूर्व क्रिकेटर और TMC सरकार में खेल मंत्री रहे मनोज तिवारी ने पार्टी का दामन छोड़ दिया है। उनका कहना है कि इस बार के विधानसभा चुनाव 2026 में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, क्योंकि क्रिकेटर ने पार्टी को ₹5 करोड़ देने से इनकार कर दिया था। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने क्रिकेट और फुटबॉल जैसे खेलों को अपनी जीत का फैक्टर बनाया।
दरअसल, पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने मंगलवार (05 मई 2026) को कहा कि उनका और TMC का चैप्टर अब बंद हो चुका है। मनोज ने TMC पर आरोप लगाते हुए कहा, “जो लोग भारी भरकम रकम दे सकते थे वो ही टिकट खरीद सकते थे। इस बार 70-72 लोगों ने टिकट के बदले ₹5 करोड़ दिए हैं। मुझसे भी यह कहा गया था, लेकिन मैंने देने से मना कर दिया। जरा देखिए कि जिन लोगों ने टिकट के बदले पैसे दिए तो वह जीत पाए हैं या नहीं। जहाँ तक TMC की बात है तो, मेरे लिए ये चैप्टर खत्म हो गया है।”
बता दें कि मनोज तिवारी भारतीय टीम के पू्र्व क्रिकेटर रहे हैं। साल 2021 में वे हावड़ा की शिबपुर सीट से TMC से विधायक बने और ममता बनर्जी की सरकार में वे खेल राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। लेकिन अब बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रचंड बहुमत की सरकार बनने के बाद उनका भी कार्यकाल खत्म हो चुका है। TMC की हार पर भी मनोज तिवारी ने कहा, मैं इस हार से बिल्कुल हैरान नहीं हूँ क्योंकि एक दिन यह होना ही था। जब एक पार्टी पूरी तरह भ्रष्टाचार में लिप्त हो तो और किसी भी सेक्टर में कोई विकास नहीं हो तो, ये होना ही था।”
भारत के लिए क्रिकेट में सम्मान प्राप्त कर चुके मनोज तिवारी का यह बयान TMC पर लग रहे ‘जंगलराज’ के आरोपों को सिद्ध करते हैं। वहीं दूसरी तरफ BJP है, जिसकी बंगाल चुनाव में प्रचंड जीत में क्रिकेट और फुटबॉल की पूर्ण भूमिका है।
बंगाल में क्रिकेट और फुटबॉल बने BJP का हथियार
पश्चिम बंगाल में क्रिकेट और खासकर फुटबॉल सिर्फ खेल नहीं बल्कि सामाजिक पहचान का हिस्सा हैं। राज्य को ‘भारत का फुटबॉल हब’ माना जाता है, जहाँ मोहुन बागान, ईस्ट बंगाल क्लब जैसे क्लबों की मजबूत जड़े हैं। यही कारण है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए खेल के जरिए जनता तक पहुँच बनाना बेहद प्रभावी रणनीति बन जाता है।
BJP ने इसी सामाजिक जुड़ाव को समझते हुए अपने चुनावी कैंपेन में क्रिकेट और फुटबॉल को सीधे शामिल किया। चुनावी भाषा में ‘मैच’, ‘टीम’, ‘रणनीति’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिससे जनता, खासतौर पर युवाओं में एक जुड़ाव बना। राजनीतिक विश्लेषण में भी इस चुनाव को T-20 मुकाबले जैसा बताया गया, जहाँ हर चरण एक ओवर की तरह अहम था।
‘नरेंद्र कप’ से ग्राउंड लेवल पर मजबूत की पकड़
BJP ने फुटबॉल को जमीनी स्तर पर मजबूत कनेक्शन बनाने का माध्यम बनाया। पार्टी ने कई इलाकों में स्थानीय फुटबॉल टूर्नामेंट आयोजित किए, जिनमें सबसे चर्चित ‘नरेंद्र कप फुटबॉल टूर्नामेंट’ रहा। इस टूर्नामेंट का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जोड़ा गया, जिससे पार्टी ने खेल के जरिए राजनीतिक पहचान को सीधे जनता तक पहुँचाया।
‘नरेंद्र कप’ में 1200 पुरुष टीमों और 18000 खिलाड़ियों ने भाग लिया। लगभग 1 लाख खिलाड़ियों को जर्सी और टी-शर्ट वितरित की गईं। खिलाड़ियों को 80,000 से अधिक फुटबॉल भी दिए गए। इतना ही नहीं BJP ने महिला मतदाताओं को टारगेट करने के लिए महिलाओं के अलग से टूर्नामेंट आयोजित किए, जिसमें 253 टीमों ने भाग लिया। दिल्ली में बैठे BJP के बड़े नेताओं ने भी बंगाल में ‘नरेंद्र कप’ पर बात की।
Enjoyed a spirited game of football in Barasat today! ⚽️
— Amit Malviya (@amitmalviya) September 17, 2025
To celebrate Prime Minister Modi’s 75th birthday, BJP in West Bengal organised the ‘Narendra Football Cup’ — held from 11–17 Sept with the finals coinciding with the big day.
The scale was massive: 1,140 teams and 18,176… pic.twitter.com/blp6n4M2RQ
पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर वाले 5000 से अधिक क्रिकेट बैट भी वितरित किए। इन टूर्नामेंट के जरिए गाँव और कस्बों में युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। इससे BJP को उन क्षेत्रों में भी पकड़ा बनाने का मौका मिला जहाँ पहले संगठन कमजोर था। इसके साथ ही पार्टी ने लगभग 70,671 बूथों पर कमेटियाँ बनाईं और करीब 8.76 लाख कार्यकर्ताओं को जोड़ा, जिससे यह फुटबॉल नेटवर्क सीधे वोट-बैंक में बदलता गया।
लियोनेल मेसी बना TMC की हार की वजह, BJP ने उठाया फायदा
इसके अलावा BJP को फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के बंगाल दौरे का भी फायदा हुआ। जब दिसंबर 2025 में मेसी का GOAT टूर कोलकाता पहुँचा, लेकिन स्टेडियम में महँगे टिकट (₹8000-₹10000)खरीदकर पहुँचे फैंस को मेसी की एक झलक देखने को नहीं मिली। तो कार्यक्रम कुप्रबंधन के कारण बवाल हुआ और फुटबॉल प्रेमियों पर ममता सरकार की पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
तब BJP ने इस मुद्दे पर TMC सरकार पर हमला बोला। BJP ने इसे ‘बंगाल का अपमान’ बताकर TMC को घेरा। BJP नेता अमित मालवीय समेत बड़े-बड़े नेताओं ने इसे TMC की भ्रष्टाचार वाली इमेज से जोड़ा। फुटबॉल प्रेमियों की नाराजगी को BJP ने वोट बैंक में बदला। अब बंगाल में BJP की जीत के बाद लियोनेल मेसी फिर ट्रेंड करने लगे। लोग लियोनेल मेसी के कार्यक्रम में कुप्रबंधन को TMC की हार की वजह बता रहे हैं।
क्रिकेट चेहरों की लोकप्रियता को वोट में बदला
BJP ने लोकप्रिय क्रिकेट चेहरों के जरिए अपनी पहुँच बढ़ाने की कोशिश की। 2022 में सौरव गांगुली को BCCI अध्यक्ष पद से हटाए जाने पर बंगाल की राजनीति गरमाई। TMC ने BJP पर आरोप लगाया कि पार्टी ने 2021 चुनाव से पहले गांगुली को अपनी पार्टी में शामिल करने की कोशिश की थी, लेकिन वे शामिल नहीं हुए। TMC ने आरोप लगाए कि BJP ने सौरव गांगुली को प्रतिशोध में पद से हटवाया। लेकिन BJP ने इसे खारिज किया, कहा कि हमने कभी शामिल करने की कोशिश नहीं की, TMC घड़ियाली आँसू बहा रही है।
BJP ने गांगुली जैसे ‘प्रिंस ऑफ कोलकाता’ की लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश की, लेकिन वे पार्टी में नहीं गए। इससे BJP ने बंगाली गर्व का मुद्दा बनाया, TMC पर हमला किया कि गांगुली का अपमान TMC की नाकामी साबित करता है।
ऐसे ही पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज अशोक डिंडा को BJP ने 2021 और 2026 विधानसभा चुनावों में टिकट दिया। दोनों ही चुनावों में अशोक डिंडा ने TMC उम्मीदवारों को करारी शिकस्त दी। डिंडा का हावड़ा में लोकल कनेक्ट और क्रिकेट स्टार इमेज ने BJP को ग्रामीण शहरी वोटरों से जोड़ा।
यह BJP का लोकप्रिय चेहरों को वोट में बदलने की रणनीति का हिस्सा था, जहाँ क्रिकेटरों की इमेज से युवा वोटरों को लुभाया गया।


