Wednesday, July 28, 2021
Homeराजनीतिवाल स्ट्रीट जर्नल पैसे लगा कर साबित कर रहा है फेसबुक को BJP समर्थक,...

वाल स्ट्रीट जर्नल पैसे लगा कर साबित कर रहा है फेसबुक को BJP समर्थक, लोगों ने पूछा फायदा किसको होगा?

रुपए देकर किसी ट्वीट या पोस्ट के प्रोमोशन करने से उस पोस्ट को बड़ी ऑडियंस तक पहुँचाया जाता है। लेकिन वाल स्ट्रीट जर्नल को इस विवादित आर्टिकल के लिए प्रोमोशन क्यों करना पड़ा? आखिर इससे किसे फायदा होगा?

वाल स्ट्रीट जर्नल द्वारा फेसबुक पर आरोप लगाया गया है कि वह भाजपा का समर्थन करता है और हेट स्पीच के मामले में उचित कार्रवाई करने से बचता है। अमेरिकी अखबार ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ की इस रिपोर्ट के बाद यह बहस बड़े स्तर पर विवाद का विषय बन चुकी है।

‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ की इस रिपोर्ट के फ़ौरन बाद कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी बीजेपी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर फेसबुक तथा मोबाइल मैसेंजर ऐप वॉट्सऐप का इस्तेमाल करते हुए मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए फर्जी खबरें फैलाने का आरोप लगाया।

इस पूरे विवाद के बीच ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ अपनी इस रिपोर्ट का पेड प्रोमोशन करते हुए देखा जा रहा है, जिससे यह सवाल पैदा हो रहे हैं कि वाल स्ट्रीट जर्नल के इस कारनामे से अंततः किसे फायदा पहुँचने वाला है।

ज्ञात हो कि रुपए देकर किसी ट्वीट या पोस्ट के प्रोमोशन करने से उस पोस्ट को बड़ी ऑडियंस तक पहुँचाया जाता है। अक्सर ब्रांड्स अपनी मार्केटिंग के लिए सोशल मीडिया पर इस प्रकार के प्रोमोशन का इस्तेमाल करते हैं।

सोशल मीडिया पर भी वाल स्ट्रीट जर्नल का यह विवादित आर्टिकल बहस का विषय बन चुका है क्योंकि कई भाजपा समर्थक पेजों ने कहा है कि वाल स्ट्रीट जर्नल का यह आरोप वास्तविकता से एकदम उलट है।

भाजपा समर्थक फेसबुक पेजों का कहना है कि फेसबुक अपनी गाइडलाइन्स को लेकर हमेशा से ही अस्पष्ट और दक्षिणपंथी विचारधारा के प्रति पूर्वग्रह से ग्रसित रहा है। 2019 के आम चुनावों से ठीक पहले भी फेसबुक द्वारा कई ऐसे पेजों को निष्क्रिय कर दिया गया था, जो कथित रूप से कॉन्ग्रेस का समर्थन करते थे।

हालाँकि, इसके बाद ऐसे पेजों को भी बंद कर दिया गया जो भाजपा समर्थक थे। लेकिन, इन पेज एडमिन्स का कहना है कि भाजपा समर्थक पेजों का दायरा और ऑडियंस कॉन्ग्रेस समर्थक पेजों की तुलना में बहुत बड़े और फेमस थे।

ऐसे में वाल स्ट्रीट जर्नल द्वारा रुपए देकर इस रिपोर्ट को प्रोमोट करना लोगों के मन में और संदेह पैदा कर रहा है कि वास्तव में इस तरह का नैरेटिव विकसित कर के वाल स्ट्रीट जर्नल किस राजनीतिक पार्टी को लाभ पहुँचाने का प्रयास कर रहा है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘बद्रीनाथ नहीं, वो बदरुद्दीन शाह हैं…मुस्लिमों का तीर्थ स्थल’: देवबंदी मौलाना पर उत्तराखंड में FIR, कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी

मौलाना के खिलाफ़ आईपीसी की धारा 153ए, 505, और आईटी एक्ट की धारा 66F के तहत केस किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके बयान से हिंदू भावनाएँ आहत हुईं।

बसवराज बोम्मई होंगे कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री: पिता भी थे CM, राजीव गाँधी के जमाने में गवर्नर ने छीन ली थी कुर्सी

बसवराज बोम्मई के पिता एस आर बोम्मई भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जबकि बसवराज ने भाजपा 2008 में ज्वाइन की थी।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
111,526FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe