Friday, July 23, 2021
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₹5,650 करोड़ से चीन पर नज़र: हिंद महासागर में ड्रैगन को घेरने की तैयारी

अंडमान और निकोबार कमांड में भारत ने सुखोई-30MKI जैसे लड़ाकू जेट, लंबी दूरी तक समुद्री गश्त के लिए पोसिडोन-8I विमान और निग़रानी के लिए हेरॉन-2 जैसे ड्रोन पहले से ही तैनात किए हुए हैं।

हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र में अपने सैन्य बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए अगले 10 वर्षों के लिए ₹5,650 करोड़ लागत की योजना को अंतरिम रूप दे दिया है। इसके ज़रिए अब अतिरिक्त युद्धपोत, विमान, ड्रोन, मिसाइल बैट्री और पैदल सैनिकों की तैनाती की राह सुलभ हो जाएगी। बता दें कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते क़दमों को रोकने के लिए इस योजना को अमल में लाया गया है।

सूत्रों के अनुसार, इस योजना पर रक्षा मंत्रालय में बड़े स्तर पर चर्चा की गई थी। आपको बता दें कि अंडमान और निकोबार कमांड (ANC) हमारे देश की एकमात्र कमांड है, जिसके दायरे में ऑपरेशनल कमांडर के अंतर्गत आर्मी, नौसेना, भारतीय वायु सेना और तटरक्षक बल आते हैं।

जानकारी के मुताबिक़, इस योजना की समीक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अध्यक्षता वाली डिफेंस प्लानिंग कमिटी ने भी की थी, जिसमें तीनों सेनाओं के प्रमुख भी शामिल हुए थे। इसके अलावा 2027 तक भारतीय सेना की शक्ति में इज़ाफ़े के लिए एक व्यापक योजना पर भी काम चल जा रहा है।

सेना की शक्ति में इज़ाफ़े के लिए इस योजना के तहत क़रीब ₹5,370 करोड़ प्रस्तावित किए गए हैं। फ़िलहाल, 108 माउंटेन ब्रिगेड का विकास करने के साथ नई वायु रक्षा प्रणाली, सिग्नल्स, इंजीनियर, आपूर्ति और अन्य ईकाइयों के अलावा वहाँ पहले से मौजूद तीन बटालियन (दो पैदल सेना और एक प्रादेशिक सेना) को जोड़ने के लिए एक नई पैदल बटालियन भी शामिल की जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के 572-द्वीप समूह के दौरे से संकेत मिलता है कि कुछ योजनाएँ पिछले 30 दिनों के पहले से ही चल रही थीं। उदाहरण के लिए, पोर्ट ब्लेयर और कार निकोबार में दो मौजूदा प्रमुख हवाई अड्डों के अलावा, शिबपुर में नौसेना के हवाई स्टेशनों पर रनवे (गुरुवार को नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा द्वारा आईएनएस कोहासा के नेतृत्व में) पहले से चालू थे।

उत्तर में कैम्पबेल बे (INS बाज़), दक्षिण में बड़े विमानों द्वारा परिचालन में मदद करने के लिए 10,000 फ़ीट तक बढ़ाया जाएगा। 10 साल के बुनियादी ढाँचे के विकास के तहत कामोर्टा द्वीप पर 10,000 फ़ुट का एक और रनवे भी बनाया जाएगा। बता दें कि भारत ने सुखोई-30MKI जैसे लड़ाकू जेट, लंबी दूरी तक समुद्री गश्त के लिए पोसिडोन-8I विमान और हेरॉन-2 निग़रानी जैसे ड्रोन द्वीपसमूह में पहले से ही तैनात किए हुए हैं।

इसके अलावा डॉर्नियर-228 गश्ती विमान और MI-17V5 हेलीकॉप्टर भी जल्द ही ANC पर तैनात किए जाएँगे। हालाँकि 2001 में इसे स्थापित किए जाने के बाद ANC को लगातार सेना, नौसेना और वायु सेना और आंतरिक राजनीतिक-नौकरशाही की बेरुख़ी के अलावा फंड की कमी और बुनियादी ढाँचे के निर्माण के लिए पर्यावरणीय मंज़ूरी की कमी की वजह से बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

इस प्रकार, एक मज़बूत ANC, जो संपूर्ण सैन्य बल और बुनियादी ढाँचे से लैस हो, प्रभावी रूप से इंडियन ओसियन रिजन (IOR) में चीन की कूटनीतिक चाल का मुक़ाबला करने के लिए एक अहम रोल अदा कर सकता है। भारत की ओर से चीन के क्षेत्र में नौसेना का विस्तार, जिसमें परमाणु पनडुब्बी भी शामिल हैं, को समय के साथ-साथ और भी बढ़ाया जाना है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत को इस क्षेत्र में नज़र बनाए रखने के लिए और ज़रुरी होने पर हस्तक्षेप करने के लिए ANC में अपनी सैन्य चौकियों को गंभीरता से लेना होगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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