Friday, June 21, 2024
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आजम खान का नाम होगा भू-माफिया की लिस्ट में! 26 किसानों की जमीन हड़पने का आरोप

“आजम खान और उनके सहयोगियों द्वारा जमीन हथियाने को लेकर दर्ज रिपोर्ट पर समीक्षा करेंगे। उसके बाद उनके नाम को सरकारी भू-माफिया पोर्टल पर सूचीबद्ध करने की सिफारिश की जाएगी।”

दो दर्जन से भी अधिक मामलों में फँसे समाजवादी पार्टी (सपा) नेता और सांसद आजम खान अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। पिछले कुछ समय में उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन उनकी मुसीबत यहीं खत्म नहीं होती। अब सपा नेता के पैतृक शहर रामपुर का जिला प्रशासन राज्य सरकार के ऐंटी-भू माफिया पोर्टल पर आजम खान को भूमि माफिया के रूप में सूचीबद्ध करने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश में 2017 में सत्ता संभालने के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भू-माफिया की पहचान करने और जमीन कब्जा करने से संबंधित लोगों की शिकायत दर्ज कराने के लिए इस पोर्टल की शुरुआत की थी।

पुलिस के मुताबिक, नवनिर्वाचित लोकसभा सांसद आजम खान के खिलाफ 30 से भी ज्यादा मामले दर्ज हैं। इनमें से अधिकतर मामले सरकारी जमीन और गरीबों की जमीन हथियाने से संबंधित हैं। रामपुर के पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा ने बताया कि जमीन हथियाने के कई मामलों को ध्यान में रखते हुए आजम खान का नाम ऐंटी-भू माफिया पोर्टल में सूचीबद्ध करने पर विचार किया गया है।

उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा ने बताया, “जिलाधिकारी और मैं जिले के विभिन्न थानों में आजम खान और उनके सहयोगियों द्वारा जमीन हथियाने को लेकर दर्ज रिपोर्ट (एफआईआर/ मामले) पर समीक्षा करेंगे। उसके बाद ही उनके नाम को सरकारी भू-माफिया पोर्टल पर सूचीबद्ध करने की सिफारिश की जाएगी।” वहीं, जब अजय पाल शर्मा से यह पूछा गया कि क्या आजम खां को गिरफ्तार किया जा सकता है, तो उन्होंने कहा कि यह किसी भी समय हो सकता है। जाँच जारी है।

इससे पहले शुक्रवार (जुलाई 12, 2019) को रामपुर के अजीम नगर पुलिस थाने में राजस्व विभाग द्वारा आजम खान और उनके सहयोगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर के अनुसार, आजम खान और उनके सहयोगी अलेहसन खान नाम के एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर 26 किसानों से जमीन हड़प ली और इस जमीन का उपयोग आजम खान ने अपनी करोड़ों की मेगा परियोजना- मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में किया। राजस्व विभाग की एफआईआर के बाद रामपुर के 26 किसान, जिन्हें कथित रूप से जाली भूमि बिक्री डीड पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था, अब अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराएँगे। क्योंकि इसमें जमीन के अलग-अलग हिस्से और अलग-अलग मालिक शामिल हैं।

इसके साथ ही राजस्व विभाग की शिकायत में यह भी कहा गया है कि गरीब किसानों की जमीन हड़पने में आजम खान ने अपने पद (उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री, 2012-2017 के रूप में) का भी दुरुपयोग किया। उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 5 हजार हेक्टेयर की विशाल भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया।

इस जमीन के बारे में राजस्व अधिकारी ने कहा कि यह भूमि नदी किनारे की है, इसका अधिग्रहण नहीं किया जा सकता है। राजस्व अधिकारी ने बताया कि आजम खान ने जाली राजस्व रेकॉर्ड बनाकर कई सौ करोड़ की इस जमीन को जौहर अली विश्वविद्यालय के रूप में अवैध रूप से कब्जा कर लिया। अधिकारी के अनुसार, नदी के किनारों पर कब्जा करने के लिए व धोखाधड़ी करने के उद्देश्य से बनाए गए यही जाली दस्तावेज अब आजम खान के खिलाफ मजबूत सबूत के तौर पर उपलब्ध हैं।

पुलिस का कहना है कि आजम खान या उनके सहयोगियों द्वारा जमीन हड़पने के अन्य मामलों से संबंधित कई शिकायतें रामपुर पुलिस अधीक्षक को मिली हैं। वहीं, आजम खान के समर्थकों का कहना है कि उनके नेता को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वो जिले में विपक्ष की एकमात्र आवाज हैं और सांसद के तौर पर मोदी सरकार की कड़ी आलोचना करते रहते हैं। सपा के एक पदाधिकारी ने लखनऊ में कहा कि आजम खान के  खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं है, क्योंकि उन्होंने (आजम खान) अपने निजी इस्तेमाल के लिए किसी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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