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उत्तराखंड में खत्म होगी मदरसा व्यवस्था, CM धामी की कैबिनेट ने लिया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाने का फैसला : सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदायों भी मिलेगी सुविधा

धामी कैबिनेट ने उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (USAME) बनाने का फैसला लिया है। यह प्राधिकरण अल्पसंख्यक समुदायों के स्कूलों को मान्यता देगा, पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाएगा और उनके कामकाज को देखेगा।

देवभूमि उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी राज्य से मदरसा शिक्षा व्यवस्था हटाने की तैयारी कर रहें हैं। इसके लिए कैबिनेट ने उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना करने का फैसला लिया है।

जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड में 452 पंजीकृत मदरसे है इसके अलावा 500 से अधिक मदरसे गैर कानूनी रूप से चल रहे थे जिनमें से 237 को धामी सरकार ने बंद करा दिया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों उत्तराखंड के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने मदरसों के छात्रों को मिलने वाली केंद्रीय छात्रवृति में भी भारी अनियमितताएँ सामने लाईं थी। इसके आलावा मिड डे मील को लेकर भी गड़बड़ियाँ पाई थी।

अब धामी सरकार ने मदरसा व्यवस्था को अपने अधीन रखने के लिए कैबिनेट से प्रस्ताव पारित कराया है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में राज्य में मदरसा शिक्षा व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।

फिलहाल धामी सरकार द्वारा उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक पर गंभीर मंथन किया जा रहा है। इस विधेयक का उद्देश्य उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (USAME) की स्थापना करना है।

यह प्राधिकरण अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा स्थापित और प्रशासित शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता देने, शैक्षिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और उनसे संबंधित सभी मामलों का प्रबंधन करने के लिए जिम्मेदार होगा।

राज्य सरकार के मुताबिक, अब तक राज्य में अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान का दर्जा केवल मुस्लिम समुदाय को दिया जाता था, लेकिन प्रस्तावित अधिनियम के लागू होने के बाद सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदायों को भी यह सुविधा मिलेगी। सरकार का दावा है कि इस कदम के साथ उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन जाएगा जिसने सभी अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक संस्थानों को मान्यता देने के लिए एकाकीकृत और पारदर्शी प्रक्रिया तैयार की है।

क्या हैं मुख्य प्रावधान:

रिपोर्ट के अनुसार, विधेयक के तहत USAME का गठन किया जाएगा। इसमें अध्यक्ष के अलावा कुल 11 सदस्य होंगे। इन्हें राज्य सरकार द्वारा नामित किया जाएगा। अध्यक्ष अल्पसंख्यक समुदाय का एक शिक्षाविद् होगा। उसे कम से कम 15 साल का शिक्षण अनुभव होना जरुरी है।

अधिनियम के तहत  पूर्व में उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त मदरसों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से मजहबी शिक्षा प्रदान करने के लिए प्राधिकरण से पुनः मान्यता प्राप्त करना आवश्यक होगा। वहीं 1 जुलाई, 2026 से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2016 और उत्तराखंड अशासकीय अरबी एवं फारसी मदरसा मान्यता विनियमावली, 2019 को निरस्त माना जाएगा।

इसके आलावा अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए, संस्थानों को कुछ शर्तें पूरी करना भी अनिवार्य होगा। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संस्थान किसी अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित और संचालित हो, परिषद से संबद्ध हो, और इसका प्रबंधन एक पंजीकृत निकाय (सोसायटी, न्यास, या कंपनी) द्वारा किया जा रहा हो।

वहीं अतिरिक्त, गैर-अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों का नामांकन 15% से अधिक नहीं होना चाहिए। प्राधिकरण अल्पसंख्यक समुदाय के धर्मों और भाषाओं से संबंधित विषयों के लिए पाठ्यक्रम विकसित करेगा और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को अतिरिक्त विषयों से संबंधित परीक्षाएँ आयोजित करने, छात्रों का मूल्यांकन करने और प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए मार्गदर्शन देगा।

इस विधेयक को राज्य के भीतर अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह पहली बार है कि उत्तराखंड में इस तरह की व्यवस्था बनाई गई है, जिसमें सभी अल्पसंख्यक समुदायों के संविधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए सभी अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों को मान्यता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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