भारतीय विदेश मंत्रालय ने मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर बांग्लादेश को लताड़ लगाई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा को लेकर भारत पर टिप्पणी की थी। विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश को खुद का रिकॉर्ड ठीक करने की सलाह दी है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार (18 अप्रैल, 2025) को बांग्लादेश की टिप्पणी पर कहा, “हम पश्चिम बंगाल की घटनाओं के संबंध में बांग्लादेश की ओर से की गई टिप्पणियों को खारिज करते हैं। यह बांग्लादेश में होने वाले अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर भारत की चिंता के बराबर में एक मुद्दा खड़ा करने का छिपा हुआ फर्जी प्रयास है।”
उन्होंने आगे कहा, “वहाँ ऐसे कृत्यों के अपराधी खुलेआम घूमते रहते हैं। उलटी सीढ़ी टिप्पणियाँ करने और अपनी महानता दिखाने के बजाय बांग्लादेश को अपने देश मे अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।”
बांग्लादेश को भारत की यह कड़े शब्दों वाली टिप्पणी उसके मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव के बयान के बाद सामने आई है। यूनुस के प्रेस सलाहकार शफीकुल आलम ने गुरुवार (17 अप्रैल, 2025) को भारत के खिलाफ जहर उगला था।
शफीकुल आलम ने कहा, “हम मुर्शिदाबाद में साम्प्रदायिक हिंसा में बांग्लादेश को शामिल करने के किसी भी प्रयास का दृढ़ता से खंडन करते हैं… हम भारत और पश्चिम बंगाल सरकार से अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी की पूरी तरह से सुरक्षा के लिए सभी कदम उठाने की अपील करते हैं।”
शफीकुल आलम का बयान उन रिपोर्ट्स के बाद आया था जिनमें मुर्शिदाबाद हिंसा में बांग्लादेशी घुसपैठियों के शामिल होने की बात कही गई थी। बांग्लादेश ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर यह ज्ञान तब दिया है जब उसके यहाँ खुद ही हिन्दुओं समेत बाकी अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले हुए हैं।
3 अप्रैल, 2025 को राज्यसभा में विदेश मंत्रालय द्वारा दिए गए एक उत्तर के अनुसार, 5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से 23 मार्च, 2025 तक 2400 से अधिक हमले हिन्दुओं या बाकी अल्पसंख्यकों पर हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया है कि यह मसला उसने बांग्लादेश के साथ उठाया भी है।

इससे पहले भी बांग्लादेश भारत विरोधी बयान देता आया है। हालाँकि, इस बार भारत ने उसे तगड़ा जवाब दिया है।


