Saturday, July 24, 2021
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पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को पुनः प्रकाशित करने पर अल-कायदा ने शार्ली एब्दो को दी 2015 जैसे नरसंहार की धमकी

शार्ली एब्दो के पैगम्बर मुहम्मद पर पुनः प्रकाशित किए जाने वाले कार्टून के फैसले को लेकर लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। पाकिस्तान और ईरान जैसे इस्लाम बहुल देशों की चेतावनी के बाद अब अल-कायदा ने मैगजीन को पैगम्बर मुहम्मद पर पुनः प्रकाशित किए जाने वाले कार्टून के फैसले को लेकर फिर से विचार करने की धमकी दी है।

इस्लामी आतंकी संगठन अल-कायदा ने फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक मैगजिन शार्ली (Charlie Hebdo) एब्दो को 2015 जैसे नरसंहार की धमकी दी है। बता दें कि शार्ली एब्दो के पैगम्बर मुहम्मद पर पुनः प्रकाशित किए जाने वाले कार्टून के फैसले को लेकर लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। पाकिस्तान और ईरान जैसे इस्लाम बहुल देशों की चेतावनी के बाद अब अल-कायदा ने मैगजीन को  पैगम्बर मुहम्मद पर पुनः प्रकाशित किए जाने वाले कार्टून के फैसले को लेकर फिर से विचार करने की धमकी दी है।

गौरतलब है कि 2015 में इस्लामी आतंकवादियों के हमले का शिकार होने के बाद फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक शार्ली एब्दो ने मंगलवार (सितम्बर 01, 2020) को कहा था कि वह एक बार फिर पैगम्बर मुहम्मद पर कार्टून प्रकाशित करेगा।

बता दें कि फ्रांस के पेरिस में जनवरी 7, 2015 में अल-कायदा से संबंधित आतंकियों ने राइफल और अन्य हथियारों से व्यंग्य पत्रिका ‘शार्ली एब्दो’ के दफ्तर पर हमला बोल दिया था। इस हमले में कम से कम 12 लोगों के मरने की खबर आई थी जबकि काफी लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। पत्रिका के संपादक स्टीफन चारबोनियर की भी हमले में मौत हो गई थी। बंदूकधारी हमलावर इस मैगजीन में छपे पैगंबर मुहम्मद के कार्टून से नाराज थे। पत्रिका काफी समय अपने कथित ‘इस्लाम विरोधी’ सामग्री की वजह से कट्टरपंथियों के निशाने पर थी।

फ्रांस, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, ईरान, चेचन्या, यमन और पाकिस्तान जैसे कई इस्लामी या इस्लाम बहुल देशों ने पैगंबर मुहम्मद को चित्रित करने वाले कार्टून के खिलाफ आंदोलन करने के लिए सड़कों पर निकल आए। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने मंगलवार (सितंबर 8, 2020) को इसे “अक्षम्य गुनाह” कहा।

अपने गुस्से को व्यक्त करते हुए खामेनेई ने कहा कि इस्लामिक राष्ट्रों – विशेष रूप से पश्चिम एशियाई देशों में -इस्लाम और संप्रदाय विशेष के खिलाफ पश्चिमी राजनेताओं और नेताओं की शत्रुता को कभी नहीं भूलना चाहिए।

इस घोषणा ने पेरिस कार्यालय में 2015 के आतंकवादी हमले को भी प्रेरित किया, जिससे दुनिया भर में व्यापक विरोध हुआ, पाकिस्तान ने भी शुक्रवार (सितंबर 4, 2020) को कट्टरपंथी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पार्टी के नेतृत्व में हजारों समुदाय विशेष के लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया।

प्रदर्शनकारियों ने फ्रांसीसी उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान के लिए “डेथ टू फ़्रांस” का आह्वान किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान पढ़े गए एक बिलबोर्ड पर लिखा गया था, ”ईशनिंदा करने वालों की सजा कत्ल है।” प्रदर्शनकारियों ने माँग की कि फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित कर दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों ने फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक मैगजिन शार्ली एब्दो के पैगम्बर मुहम्मद पर पुनः प्रकाशित किए जाने वाले कार्टून के फैसले को लेकर किसी भी प्रकार की निंदा नहीं की।

फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बल देते हुए कहा था कि कोई भी प्रेसिडेंट पत्रकार या न्यूज़ रूम के संपादकीय की पसंद को लेकर कोई जजमेंट पास नहीं कर सकता। क्योंकि देश (फ्रांस) में प्रेस की स्वतंत्रता है।

उन्होंने कहा था, “फ्रांस में ईशनिंदा की आज़ादी अंतरात्मा की स्वतंत्रता से जुड़ी है। मैं इन सभी आज़ादी की रक्षा करने के लिए यहाँ हूँ। फ्रांस में कोई भी राष्ट्रपति, राज्यपाल, ईशनिंदा की आलोचना कर सकता है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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