Friday, August 12, 2022
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‘हम पूर्वजों का कब्र भी ले जा रहे, वे उसे भी नहीं छोड़ेंगे’: जानिए, खुद का ही घर क्यों फूँक रहे अर्मेनियाई

"यह मेरा घर है, मैं इसे उनके लिए नहीं छोड़ सकता। आज हर कोई अपने घर को जलाने जा रहा है। हमें घर छोड़ने के लिए आधी रात तक का समय दिया गया था।"

कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान इस्लामी मुल्क अजरबैजान (Azarbaijan) और अर्मेनिया (Armenia) बीच चली जंग ने दुनिया को चौंका दिया। अब शांति समझौते के तहत अर्मेनिया अपने विवादित क्षेत्र नागोर्नो-कराबाख को अजरबैजान को सौंपने पर सहमत हो गया है। इससे पहले नागोर्नो कराबाख में अपने घर खाली करने से पहले लोग उनमें आग लगा रहे हैं

अर्मेनियाई अलगाववादियों द्वारा दशकों से नियंत्रित किए जा रहे अजरबैजान में कलाबाजार जिले के लोगों ने इस सप्ताह बड़े पैमाने पर पलायन शुरू किया। अर्मेनियाई सैनिकों द्वारा समर्थित अलगाववादियों और अजरबैजान सेना के बीच लड़ाई सितंबर के अंत में नागोर्नो-कराबाख क्षेत्र में शुरू हुई थी। यह जंग छह हफ्ते तक चली।

रिपोर्ट के अनुसार शनिवार (नवंबर 14, 2020) को अर्मेनियाई लोगों द्वारा कालबाजार गाँव में कम से कम 6 घरों में आग लगा दी गई, जबकि रविवार को 10 से अधिक घरों में आग लगाई गई। अपने घर को आग के हवाले करने के लिए मजबूर एक अर्मेनियाई निवासी ने कहा, “यह मेरा घर है, मैं इसे उनके लिए नहीं छोड़ सकता। आज हर कोई अपने घर को जलाने जा रहा है। हमें घर छोड़ने के लिए आधी रात तक का समय दिया गया था। हमने अपने माता-पिता की कब्रों को भी स्थानांतरित कर दिया, वे उसे भी नहीं छोड़ते। यह असहनीय है।”

एक अन्य अर्मेनियाई आर्सेन ने कहा कि वे अजरबैजानियों के लिए कुछ भी चीज उपयोग करने लायक नहीं छोड़ रहे हैं। उन्हें अपने घर को राख करना होगा। अर्मेनियाई लोग अपने घर जलाने से पहले जो कुछ भी अपने साथ ले जा सकते थे, उसे ट्रकों पर लोड किया। अधिकांश परिवारों ने अपने घरों से अधिकांश वस्तुओं को हटा दिया, कुछ ने  घरों को जलाने से पहले दरवाजों और खिड़कियों को भी हटा दिया और ट्रकों पर लोड कर लिया, जिसे वे अपने नए घरों में उपयोग कर पाएँगे।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

तुर्की और अजरबैजान के पास कॉकेशस पहाड़ियों में बसा अर्मेनिया एक छोटा देश है। अजरबैजानियाई जातीय तुर्क हैं और तुर्की के समान धर्म और संस्कृति हैं। लंबे समय तक, ज्यादातर ईसाई अर्मेनियाई लोग ओटोमन साम्राज्य द्वारा उपनिवेश बनाए गए थे। सोवियत ने 1920 के दशक में जमीन पर कब्जा कर लिया था और अर्मेनिया को तीन सोवियत गणराज्य: जॉर्जिया, अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच बाँटा गया था।

1990 के दशक में जब सोवियत साम्राज्य का पतन हुआ, तब अर्मेनिया और अजरबैजान दोनों स्वतंत्र हो गए। लेकिन अर्मेनियाई लोगों की आबादी वाली भूमि का एक हिस्सा अजरबैजान का हिस्सा बना रहा। इस क्षेत्र को नागोर्नो-करबाख के नाम से जाना जाता है। तनाव भड़क गया और 1990 के दशक में इस क्षेत्र ने अर्मेनिया द्वारा समर्थित स्वतंत्रता की घोषणा की। गतिरोध लगभग तीन दशकों से है। अर्मेनियाई लोग जल्दी हार गए और अब उनमें से हजारों लोगों के पास अपने घरों को पीछे छोड़ने और पलायन करने के लिए एक सप्ताह से भी कम समय है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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