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अयातुल्ला से भी ‘कट्टर’ मोजतबा खामेनेई बने ईरान के सुप्रीम लीडर, मुल्क को परमाणु बम देना ख्वाब: प्रदर्शनकारियों पर दिखाई थी सख्ती, जाने- ट्रंप ने क्या कहा?

ईरान ने मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया। US के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले का विरोध किया है और कहा है कि वो इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे। मोजतबा पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के दूसरे बड़े बेटे हैं। अयातुल्ला खामेनेई की इजरायल यूएस हमले में मौत हो गई थी।

ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई (56) को एक्सपर्ट्स की असेंबली ने देश का नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है।

रविवार (8 मार्च 2026) को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “एक अहम वोट से, एक्सपर्ट्स की असेंबली ने अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के पवित्र सिस्टम का तीसरा लीडर चुन लिया।” नए लीडर को नियुक्त करने का काम 88 मौलवियों के एक ग्रुप ने किया।

राष्ट्रपति ट्रंप को खामेनेई मंजूर नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले को नामंजूर कर दिया है। ABC न्यूज से बात करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उन्हें हमसे मंजूरी नहीं मिली, तो वे ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाएँगे।” इससे पहले इजरायल ने ईरान के अगले सुप्रीम लीडर पर हमला करने की धमकी भी दी थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था, ‘वे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। खामेनेई का बेटा एक कमजोर खिलाड़ी है। मुझे नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होना होगा, जैसा कि वेनेजुएला में डेल्सी रोड्रिगेज के मामले में हुआ था।’ राष्ट्रपति ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई को ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए कहा कि वे ऐसे नेता को देखना चाहते हैं जो ईरान में ‘सद्भाव और शांति’ ला सके। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अली खामेनेई की नीतियाँ जारी रहीं, तो भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच फिर टकराव हो सकता है।

नवंबर 2019 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध लगाए थे। उन पर आरोप था कि वे उस समय के सुप्रीम लीडर का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जबकि वे किसी सरकारी पद पर चुने या नियुक्त नहीं हुए थे। अमेरिकी ट्रेजरी के अनुसार, उस समय के सुप्रीम लीडर ने अपनी कुछ जिम्मेदारियां मोजतबा खामेनेई को सौंप दी थीं।

विभाग ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने पिता को कमजोर करने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स-क़ुद्स फ़ोर्स (IRGC-QF) और बासिज रेजिस्टेंस फ़ोर्स (बासिज) के कमांडर के साथ हाथ मिलाया। इसके अलावा यह भी बताया गया कि यूनाइटेड किंगडम, स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन में उनकी संपति है। लंदन में उनकी पॉश इलाके में संपत्ति का भी उल्लेख है।

कौन हैं मोजतबा खामेनेई

ईरान के मशहद में 8 सितंबर 1969 में पैदा हुए मोजतबा खामेनेई शिया धर्मगुरु अयातुल्ला खामेनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं। उन्हें शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स का समर्थन हासिल है। अपने पिता की तुलना में मोजतबा ज्यादा कट्टरपंथी माने जाते हैं।

ईरान के बड़े फैसलों में अब मोजतबा खामेनेई का निर्णय ही अंतिम होगा। वह सेना और पैरामिलिट्री संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के सर्वोच्च कमांडर भी होंगे। दूसरे नीतिगत और देश-विदेश से जुड़े मुद्दों पर भी अंतिम फैसला उन्हीं का होगा, जिसमें ईरान के परमाणु हथियारों से जुड़े निर्णय भी शामिल हैं। ईरान में परमाणु हथियार बनाने का समर्थन करने वालों में मोजतबा खामेनई का नाम भी आता है।

ईरान में हुए प्रदर्शनों के दौरान मोजतबा खामेनेई का विरोध किया गया था। इजरायली मीडिया ने मोजतबा को अपने पिता से भी ज्यादा कट्टर रुख वाला बताया है। उसके मुताबिक, ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई सख्त कार्रवाई के पीछे भी उनकी भूमिका रही है। युवती की मौत के बाद ईरान में जबरदस्त प्रदर्शन हुए थे। युवती को देश के कपड़ों को लेकर बने कानूनों को तोड़ने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। वह कट्टरपंथी महमूद अहमदीनेजाद से करीब से जुड़े थे, जो 2005 में ईरान के प्रेसिडेंट चुने गए थे।

ईरान के सरकारी मीडिया ने मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने की घोषणा के बाद पूरे ईरान में जश्न मनाते लोगों की तस्वीरें सामने आईं।

टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक, सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीरें भी दिखी जिसमें तेहरान में लोगों को अपनी खिड़कियों से ‘मोजतबा की मौत’ चिल्लाते हुए सुना गया। हालाँकि इसे वेरिफाई नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम लीडर का पद मोजतबा खामेनेई को इस्लामिक रिपब्लिक में देश के सभी मामलों में आखिरी फैसला लेने का अधिकार देता है, जिसमें इसकी सेना के साथ-साथ यूरेनियम संवर्धन और उसके स्टॉक पर नियंत्रण भी शामिल है। अगर सुप्रीम लीडर चाहे तो परमाणु हथियार बनाने की इजाजत ईरानी एक्सपर्ट को दे सकता है।

28 फरवरी को, अयातुल्ला अली खामेनेई को US-इज़राइल के हमले में मार दिया गया, जिससे मिडिल ईस्ट में लड़ाई और तेज हो गई।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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