Thursday, January 20, 2022
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मुस्लिम होने के लिए सताया तो ‘एंटी सोशल’ हो गया: 10 लोगों की हत्या करने वाले अहमद के भाई का दावा

कुछ वायरल पोस्ट देख कर पता चलता है कि अहमद बेहद शक्की किस्म का शख्स है। हर चीज के लिए वह इस्लामोफोबिया को जिम्मेदार मानता है। 5 जुलाई 2019 को उसने अपने फोन के हैक होने के पीछे भी इस्लामोफोबिया को कारण बता दिया था।

अमेरिका के कोलोराडो के बोल्डर स्थित सुपरमार्केट में कल (मार्च 23, 2021) फायरिंग कर 10 लोगों को हत्या करने वाले अहमद अल अलीवी अलीसा (Ahmad Al Aliwi Alissa) पुलिस की हिरासत में है। इस बीच उसके भाई ने दावा किया है कि अहमद मानसिक तौर पर शायद बीमार हो। भाई के मुताबिक हाई स्कूल में अहमद को उसके नाम और मुस्लिम होने के कारण सताया जाता था, जिसके कारण वह ‘एंटी सोशल’ हो गया था। 

वहीं डैमिन क्रूज नाम के एक व्यक्ति का कहना है कि वह अहमद को 5वीं कक्षा से जानता है। क्रूज का दावा है कि अहमद बहुत अकेला था। लोग उसके गुस्से के कारण उससे उलझते भी नहीं थे। क्रूज के मुताबिक अहमद अक्सर मुस्लिमों के साथ होते रवैए पर बात करता था। वह कहता था कि मुस्लिमों को बराबरी नहीं दी जा रही। उनके साथ बुरा बर्ताव होता है।

अहमद के एक पूर्व क्लासमेट की मानें तो वह (अहमद) अक्सर सोचता था कि उसे मुस्लिम होने के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है। एक क्लासमेट के अनुसार, वह अपने मुस्लिम होने पर बात करता था और कहता था कि अगर किसी ने उसके साथ कुछ भी किया तो वह हेटक्राइम फाइल करेगा।

इतना ही नहीं अहमद अपने आपको नस्लवाद का पीड़ित बताता था और सोचता था कि लोग उसके बारे में अनाप-शनाप बोल रहे हैं। उसके एक रिश्तेदार ने ये भी बताया है कि सुपरमार्केट में गोलीबारी करने से दो दिन पहले उन्होंने उसे मशीन गन जैसी दिखने वाली चीज से खेलते देखा था।

2018 में अहमद को थर्ड डिग्री हमले का दोषी पाया गया था। उस समय उसने एक क्लासमेट पर हमला किया था। इसके बाद उसे 1 साल की सजा हुई थी। 

फेसबुक ने डिलीट की अहमद की सोशल मीडिया प्रोफाइल

शूटर अहमद की पैदाइश सीरिया की है। पुलिस ने अभी उसकी कोई जानकारी रिवील नहीं की है। मगर उसके सोशल मीडिया प्रोफाइल से पता चला है कि वह सीरिया में जन्मा और आधे से ज्यादा जीवन अमेरिका में बिताया। उसके कट्टरपंथी विचार वाले कई पोस्ट हर जगह वायरल होने के बाद फेसबुक ने उसके अकाउंट को डिलीट कर दिया है। उसकी प्रोफाइल न केवल फेसबुक से हटी है, बल्कि इंटरनेट की अर्काइव वेबसाइट से भी गायब है। फेसबुक का कहना है कि Dangerous Individuals and Organizations policy के तहत उसकी प्रोफाइल हटाई गई है। 

कुछ वायरल पोस्ट देख कर पता चलता है कि अहमद बेहद शक्की किस्म का शख्स है। हर चीज के लिए वह इस्लामोफोबिया को जिम्मेदार मानता है। 5 जुलाई 2019 को उसने अपने फोन के हैक होने के पीछे भी इस्लामोफोबिया को कारण बता दिया था।

इसके अलावा वह डोनाल्ड ट्रंप से नफरत करता था। वह अक्सर ऐसे आर्टिकल लिंक शेयर करता था जिसमें ट्रंप के विरोध में बातें हो या उनकी आलोचना हो।

वह कट्टर इस्लामी समर्थक था और खुलेआम समलैंगिकता का विरोध करता था। उसने एक पोस्ट में लिखा था, “अगर कोई सीधा इंसान जेल जाए और गे बनकर लौटे तो इसका मतलब ये नहीं होता कि वह अपनी मर्जी से गे बना है।”

बता दें किअहमद ने जिस सुपरमार्केट में गोलीबारी की थी वहाँ हमले के वक़्त अच्छी-खासी भीड़ थी। मरने वालों में एक पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। फिलहाल इस वारदात के पीछे की मंशा का पता नहीं चल पाया है। फायरिंग में अहमद भी घायल हो गया था।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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