Wednesday, September 28, 2022
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रमजान में रोजा रखना ‘अतिवाद’ का चिह्न: मजहबी संकेत देखकर चीन उइगरों को भेज सकता है कॉन्सेंट्रेशन कैंप

एक ओर जहाँ अन्य देशों में इस्लाम को मानने वाले इन दिनों रोजा रखकर अपनी इबादत कर रहे थे। वहीं शिनजियांग में उइगरों व अन्य अल्पसंख्यक (कज़ाक और किर्गिज लोगों) को पीड़ा देने के लिए उनकी कुरानें जलाई जाती हैं, हलाल खाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। साथ ही रोजे के महीने में रेस्टुरेंट आदि को भी खुले रखने के लिए मजबूर किया जाता है।

चीन के शिनजियांग में उइगरों समेत अन्य अल्पसंख्यक आबादी के लोगों के साथ होने वाला बर्ताव अब किसी से छिपा नहीं है। विश्व उइगर कॉन्ग्रेस के अनुसार रमजान के महीने में वहाँ से खबर है कि चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने अपने अत्याचार उन लाचार लोगों पर और बढ़ा दिए हैं।

एक ओर जहाँ अन्य देशों में इस्लाम को मानने वाले इन दिनों रोजा रखकर अपनी इबादत कर रहे थे। वहीं शिनजियांग में उइगरों व अन्य अल्पसंख्यक (कज़ाक और किर्गिज लोगों) को पीड़ा देने के लिए उनकी कुरानें जलाई जाती हैं, हलाल खाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। साथ ही रोजे के महीने में रेस्टुरेंट आदि को भी खुले रखने के लिए मजबूर किया जाता है।

दरअसल, सुबह से लेकर शाम तक रोजा रखना रमजान की पहचान है। लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशलन में पिछले साल प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि शिनजियांग में सीसीपी ने इसे ‘अतिवाद का चिह्न’ बताया है। साथ ही रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट के अनुसार रमजान के दौरान, चीन के सीसीपी का मानना है कि ‘अतिवाद’ के अन्य चिह्नों में उइगर का रमजान के दौरान ‘सामान्य रूप से व्यवसाय का संचालन करना’ और महिलाओं का मजहबी कपड़े पहनना आदि शामिल है।

रिपोर्ट बताती है कि धार्मिक संबद्धता के ये प्रदर्शन, चाहे खुले हों या निजी, कम्युनिस्ट राष्ट्र द्वारा निषिद्ध हैं। इस तरह के रिवाज को प्रदर्शित करने के लिए उइगरों को चीनी कॉन्सेंट्रेशन कैंपों में काम करने की सजा दी जा सकती है।

गौरतलब है कि चीन में उइगरों को दी जाने वाली प्रताड़नाओं का कोई अंत होता नहीं दिख रहा। वहाँ उक्त प्रांत में चीनीकरण के नाम पर उइगरों को डिटेंशन सेंटर में रखा जाता है। उनपर आम दिनों में भी इस्लामिक रीति-रिवाजों और इस्लामी टोपी लगा कर घूमने पर पाबंदी है। इसके अलावा नमाज भी पुलिस की निगरानी में अनुमति लेकर ही पढ़ी जा सकती है। इतना ही नहीं वहाँ के हालात ये हैं कि अल्पसंख्यकों के घरों की साज-सज्जा भी चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी तय करती है।

कुछ दिन पहले की खबर पढ़ें तो मालूम पड़ेगा कि रेडियो फ्री एशिया ने ही बताया था कि उइगरों पर अपना घर चीनी परंपरा के अनुरूप डेकोरेट करने का दबाव बनाया गया और इसके लिए चीन ने 575 मिलियन डॉलर का फंड केवल उइगरों के आधुनिकीकरण के लिए जारी किया। जिसमें उनके पारंपरिक डिजाइन के घरों को नष्ट करना भी शामिल था।

बता दें कि, 2017 से अब तक एक अनुमान है कि 1 मिलियन से लेकर 3 मिलियन उइगर अल्पसंख्यकों को चीन में कन्संट्रेशन कैंप में भेजा जा चुका है। हालाँकि, चीन हमेशा अपने ऊपर लगे इन इल्जामों को खारिज करता रहा है और कहता रहा है कि वे सब अनार के दानों की तरह संगठित हैं। लेकिन चीन में उइगरों की दशा को दिखाता एक वीडियो भी सामने आया था। जिसे वॉर ऑन फियर नाम के यूट्यूब चैनल पर पिछले महीने अपलोड किया था। इसमें देखा गया था कि कई सौ की तादाद मे लोगों को बंदी बनाकर और उनकी आँखों को मूँदकर ट्रेन से शियानजिंग में स्थांतरित किया जा रहा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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