Tuesday, April 16, 2024
Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयवुहान में 5 साल के लिए जंगली जानवरों को खाने पर प्रतिबंध, यहीं से...

वुहान में 5 साल के लिए जंगली जानवरों को खाने पर प्रतिबंध, यहीं से शुरू हुआ था कोरोना वायरस का संक्रमण

वुहान वही शहर है जहाँ से कोरोना संक्रमण शुरू हुआ था। जंगली जानवरों को खाने पर पाँच साल का प्रतिबंध लगाया गया है। इसे 13 मई को लागू किया गया। लोमड़ी, मगरमच्छ, भेड़िये, सांप, चूहे, मोर समेत कई जंगली जानवरों को खाने पर बैन लगाया गया है।

दुनियाभर को कोरोना महामारी देने वाले चीन ने आखिरकार वुहान शहर में जंगली जानवरों के खाने पर बैन लगा दिया है। वुहान वही शहर है जहाँ से कोरोना संक्रमण शुरू हुआ था। जंगली जानवरों को खाने पर पाँच साल का प्रतिबंध लगाया गया है। इसे 13 मई को लागू किया गया।

हुआनान सीफूड होलसेल मार्केट से ही कोरोना वायरस जन्म हुआ था। इसे 1 जनवरी को बंद तो कर दिया गया मगर उसके बाद भी इस वायरस ने दुनियाभर में तहलका मचा दिया। लोमड़ी, मगरमच्छ, भेड़िये, सांप, चूहे, मोर समेत कई जंगली जानवरों को खाने पर 5 साल का बैन लगाया गया है।

इस आदेश के साथ ही किसी भी संगठन या व्यक्ति को वाइल्डलाइफ या उससे जुड़े उत्पादों के प्रोडक्शन, जमीन के जानवरों और पानी के प्रोटेक्टेड जंगली जानवरों को खाए जाने के लिए आर्टिफिशल ब्रीडिंग की भी इजाजत नहीं होगी। मेडिकल संगठनों को रिसर्च के लिए जानवरों को हासिल करने के लिए लाइसेंस लेना होगा। ह्यूमन सोसायटी इंटरनेशनल (एचएसआई) के अनुसार, चीन में वन्यजीव की खपत का व्यापार 125 बिलियन युआन का है।

माँस खाने की परंपरा

चीन की परंपरा में कई तरह के जानवरों के माँस खाने का चलन रहा है। चीन के शहर वुहान में जंगली जानवरों के माँस का बड़ा मार्केट है। चीन में कई तरह के जानवरों का माँस खाया जाता है। वुहान में सांप-बिच्छू, मगरमच्छ, कुत्ते, चमगादड़ से लेकर घोड़े- गधे और ऊँट तक के माँस मिलते हैं। यहाँ इन जानवरों के माँस का इस्तेमाल सिर्फ खाने के लिए नहीं बल्कि मेडिसीन, कपड़े और गहने बनाने मे भी इस्तेमाल होता है।

पहले भी किया जा चुका है, कुछ जानवरों को बैन

2003 में चीन में सार्स नाम की बीमारी फैली थी। इसके चलते बिलाव (सीविट) और नेवले का माँस बेचने पर प्रतिबंध लगाया गया था। इस बीमारी का वायरस बिलाव या नेवले के माँस से इंसान के शरीर में आया था। सार्स के महामारी की तरह फैलने पर सांप के मांस की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई थी। मगर फिर भी वहाँ के लोगों ने इनका माँस खाना नहीं छोड़ा। चूंकि चीन की प्राचीन परंपरा में कई तरह के जानवरों के मांस खाने का चलन रहा है, इसलिए इन्हें बैन करना आसान नहीं है।

चीन के लोग बताते हैं कि कोरोना वायरस की वजह से अभी लोगों ने जंगली जानवरों का माँस खाना बंद किया है। लेकिन जैसे ही वायरस का असर खत्म होगा। जानवरों का माँस लोग फिर से खाने लगेंगे।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अरविंद केजरीवाल नं 1, दिल्ली CM की बीवी सुनीता नं 2… AAP की स्टार प्रचारकों की लिस्ट जिसने देखी वही हैरान, पूछ रहे- आत्मा...

आम आदमी पार्टी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में तिहाड़ जेल में ही बंद मनीष सिसोदिया का भी नाम है, तो हर जगह से जमानत खारिज करवाकर बैठे सत्येंद्र जैन का भी।

‘कन्हैया लाल तेली का क्या?’: ‘मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग’ पर याचिका लेकर पहुँचा वकील निजाम पाशा तो सुप्रीम कोर्ट ने दागा सवाल, कहा –...

इस याचिका में अल्पसंख्यकों के खिलाफ मॉब लिंचिंग के अपराध बढ़ने का दावा करते हुए गोरक्षकों पर निशाना साधा गया था और तथाकथित पीड़ितों के लिए त्वरित वित्तीय मदद की व्यवस्था की माँग की गई थी।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
282,677FollowersFollow
417,000SubscribersSubscribe