Friday, December 2, 2022
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हिन्दू मंदिरों पर हमले करने वाला रिजवान रफीक गिरफ्तार, जला दी थी प्रतिमाएँ: PM मोदी के दौरे को लेकर की थी हिंसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के विरोध में इस्लामी कट्टरपंथियों ने न केवल हिंसक प्रदर्शन किए थे, बल्कि मंदिरों को भी निशाना बनाया था। इसमें हिफाजत-ए-इस्लामी नामक संगठन की खास भूमिका थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 मार्च को बांग्लादेश की आजादी के मौके पर बांग्लादेश की यात्रा पर पहुँचे थे, जिसमें कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम (Hefazat-e-Islam) ने बांग्लादेश में जमकर बवाल किया था। इस दौरान हुई हिंसा में कई लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में हिफाजत-ए-इस्लाम के नेता रिजवान रफीक को गिरफ्तार किया गया है।

रिजवान रफीक को शुक्रवार (सितंबर 17, 2021) की रात ढाका के मुग्दा इलाके से गिरफ्तार किया गया। खुफिया शाखा के अतिरिक्त आयुक्त एकेएम हाफिज अख्तर ने इसकी जानकारी दी।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के विरोध में इस्लामी कट्टरपंथियों ने न केवल हिंसक प्रदर्शन किए थे, बल्कि मंदिरों को भी निशाना बनाया था। इसमें हिफाजत-ए-इस्लामी नामक संगठन की खास भूमिका थी। पाकिस्तानी इशारों पर काम करने वाला यह कट्टरपंथी संगठन बांग्लादेश में इस्लामी हुकूमत की वकालत करता है।

पीएम मोदी की दो दिवसीय बांग्लादेश की यात्रा के दौरान इस्लामिक संगठन द्वारा उनके विरोध में हिन्दू मंदिरों पर हमला किया गया। यात्रा समाप्त होने के बाद भी हमले जारी रहे। मगुरा जिले के मोहम्मदपुर में 400 वर्ष पुराने अष्टग्राम महा श्मशान और राधगोबिंद आश्रम में तोड़ फोड़ की गई और उनके कई हिस्सों को आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना में रथ और भगवान की मूर्तियाँ भी जल कर रख हो गईं थी। इस हिन्दू विरोधी हिंसा के पीछे हिफाजत-ए-इस्लाम का हाथ था जो हिंदुओं के प्रति अपनी घृणा के लिए जाना जाता रहा है।

इस मामले में 18 अप्रैल 2021 को बांग्लादेश की ढाका पुलिस ने कट्टरपंथी समूह हिफाजत-ए इस्लाम के नेता ममुनुल हक को गिरफ्तार किया था। ममुनुल हक, हिफाजत-ए-इस्लाम का ज्वाइंट सेक्रेट्री है। इसी संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे पर देश में दंगे भड़काने और जगह-जगह हिंसा करने का काम किया था। पड़ताल में पता चला था कि घटना में कई हिफाजत-ए-इस्लाम के नेता शामिल थे। सबने मिल कर पुलिस पर सुनियोजित ढंग से हमले किए, जिसके कारण बाद में 300 से ज्यादा लोग हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार हुए।

उल्लेखनीय है कि साल 2010 में इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को बनाया गया था। इसे बनाने में बांग्लादेश के मदरसों के उलेमा और छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस संगठन पर आरोप लगते रहे हैं कि इनका संबंध जमात-ए-इस्लामी और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों से हैं। हालाँकि, हिफाजत इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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