Monday, March 8, 2021
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इस्लामाबाद में फिर से शुरू हो श्रीकृष्ण मंदिर का निर्माण: Pak के ही मानवाधिकार संगठन ने की माँग

ह्यूमन राइट्स फ़ोकस पाकिस्तान के अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने सोशल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से श्री कृष्ण मंदिर परिसर के खिलाफ नकारात्मक प्रोपेगेंडा फैलाने की निंदा की। इसके लिए उन्होंने धार्मिक और राजनीतिक माध्यमों की भी आलोचना की।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हिन्दू मंदिर बनाए जाने की माँग एक बार फिर से उठी है। यह माँग पाकिस्तान के ही एक मानवाधिकार संगठन ने की है। ह्यूमन राइट्स फ़ोकस पाकिस्तान (HRFP) नाम के मानवाधिकार संगठन ने इस्लामाबाद में मंदिर निर्माण को फिर से शुरू करने की माँग की है, जिसे इस्लामवादियों के दबाव के बाद रोक दिया गया था।

ह्यूमन राइट्स फ़ोकस पाकिस्तान के अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने सोशल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से श्री कृष्ण मंदिर परिसर के खिलाफ नकारात्मक प्रोपेगेंडा फैलाने की निंदा की। इसके लिए उन्होंने धार्मिक और राजनीतिक माध्यमों की भी आलोचना की।

बता दें कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में पहला कृष्ण मंदिर बनने जा रहा था, जो सहिष्णुता का प्रतीक हो सकता था, मगर हिंसा और विवाद ने एक बार फिर से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा को उजागर किया। कई मौलवियों ने फतवा और फरमान जारी किया कि यहाँ पर मंदिर नहीं बन सकता, क्योंकि यह एक मुस्लिम देश है।

वाल्टर ने कहा, “हिंदू मंदिर का निर्माण उसी तरह सामान्य होना चाहिए, जैसे मस्जिद या अन्य धर्मों के पूजा स्थल किसी भी देश की राजधानी और दुनिया भर के क्षेत्रों में बन सकते हैं।”

नवीद वाल्टर ने कहा कि यदि किसी के पूजा स्थल का स्वामित्व और वित्त पोषण राज्य द्वारा किया जाता है तो राज्य ने दूसरों के लिए अलग नीति क्यों अपनाई?

वाल्टर ने कहा, “प्रार्थना और पूजा स्थल हर नागरिक और हिंदुओं सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों का एक बुनियादी अधिकार है।” उन्होंने कहा कि 1947 में विभाजन के समय, पाकिस्तान की लगभग 23 प्रतिशत आबादी गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक थे, लेकिन आज वे घटकर 5 प्रतिशत रह गए और अगर भेदभावपूर्ण प्रथाओं को जारी रखा जाएगा तो वे और भी कम हो जाएँगे।

नवीद वाल्टर ने सवाल किया कि क्या हिंदुओं के मंदिर निर्माण पर रोक का मतलब यह नहीं है कि देश का भूमि स्वामित्व केवल उन चरमपंथियों का है जो किसी भी मंदिर, चर्च, पूजा स्थल की स्थापना के लिए अनुमति देने का निर्णय ले सकते हैं अथवा नहीं?

वाल्टर ने कहा कि “न केवल पूजा स्थलों, कब्रिस्तानों, सामुदायिक संस्थानों के बारे में इसके कई उदाहरण हैं, बल्कि इसे व्यक्तिगत मामलों में भी गंभीर रूप से देखा गया है।

उन्होंने नदीम जोसेफ का हालिया मुद्दा के बारे में बताया, जिसका पेशावर में मुस्लिम पड़ोसियों द्वारा हत्या कर दी गई थी। नदीम जोसेफ ईसाई समुदाय से था। उसने पेशावर में मुस्लिम इलाके में घर खरीदा था, जिससे नाराज पड़ोसियों ने नदीम और उसकी सास पर अंधाधुंध गोलियाँ चला दी। जिसमें दोनों की मौत हो गई। इससे पहले नदीम को घर छोड़ने की धमकी भी दी गई थी, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रहा।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में इस्लामवादियों ने हाल ही में देश की राजधानी इस्लामाबाद में श्री कृष्ण मंदिर के निर्माण का विरोध किया था। इसके निर्माण के खिलाफ फतवा भी जारी किया गया था। फतवे से इतर, इस्लामाबाद हाईकोर्ट में भी मंदिर निर्माण के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। बाद में, जिस चारदीवारी का निर्माण किया गया था, उसे एक इस्लामवादी ने ध्वस्त कर दिया था, जिसने यह संकल्प लिया था कि वह वहाँ कभी भी हिंदू मंदिर का निर्माण नहीं होने देगा।

इससे संबंधित कई वीडियो सामने आए। एक वीडियो में मंदिर निर्माण की जगह पर एक मुस्लिम युवक खुली जमीन पर खड़े होकर अजान दे रहा है। इसके अलावा एक अन्य वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे कुछ पाकिस्तानी कट्टरपंथी मंदिर के लिए रखी नींव को उजाड़ते दिख रहे हैं और एक-एक ईंट उठाकर फेंक रहे हैं।

इसी तरह एक दूसरे वीडियो में एक मौलवी हिंदुओं से अपनी घृणा जाहिर करते हुए पाकिस्तानी हुकूमत को भी धमकाने वाले लहजे में सचेत कर रहा है।

मौलवी कहता है, “मस्जिदों का निर्माण तो यहाँ चंदा से हो रहा है। लेकिन मंदिर का निर्माण पाकिस्तान के खजाने से पैसे निकालकर किया जा रहा है।” मौलवी आगे आवाज ऊँची करते हुए कहता है, “अगर तुम मंदिर बनाओगे तो पाकिस्तानी गैरतमंद कौम तुम्हारी गर्दनें काट कर मंदिर के बाहर फिरने वाले कुत्तों को सामने डाल देंगी।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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