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टिकटॉक पर बैन से भारत ने दुनिया को दिखाया रास्ता: अमेरिका हुआ मुरीद, कहा- चीनी चालों का नाकाम करने का नई दिल्ली का तरीका लाजवाब

चीन की तरफ से खड़े किए जा रहे सुरक्षा की चिंताओं का भारत सरकार ने जिस तरह से सामना किया और चीन की चालों को जिस तरह से नाकाम किया, वो काबिले-तारीफ है।

अमेरिका के शीर्ष टेक सिक्योरिटी अधिकारी ने कहा कि भारत सरकार ने टिकटॉक पर बैन लगाकर जिस तरह से चीन को चुनौती दी है, वो बेमिसाल है। भारत सरकार ने साल 2020 में टिकटोक को बैन कर दिया था, इसके बाद अमेरिका समेत कई देशों ने चीनी कंपनियों के खिलाफ इस तरह के कदम उठाए। कुछ ऐसा ही कहा भारत की पहली यात्रा पर आए अमेरिका के शीर्ष तकनीकी सुरक्षा अधिकारी ब्रेंडन कैर ने। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने जिस तरह से चीनी खतरे से निपटा, वो शानदार है।

अमेरिकी संघीय संचार आयोग (एफसीसी) के कमिश्नर ब्रेंडन कैर अपनी पहली भारत यात्रा पर हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान इकोनॉमिक टाइम्स के साथ खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि चीन की तरफ से खड़े किए जा रहे सुरक्षा की चिंताओं का भारत सरकार ने जिस तरह से सामना किया और चीन की चालों को जिस तरह से नाकाम किया, वो काबिले-तारीफ है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रैंडन कैर ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था जिस तेजी से बढ़ रही है और उसके सामने जिस तरह की सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ रही है, उससे भारत सरकार ने जिस कड़ाई से निपटा, वो दुनिया के लिए एक मॉडल की तरह है। उन्होंने कहा कि शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म टिकटॉक और टेलीकॉम उपकरण आपूर्तिकर्ता हुआवेई और जेडटीई पर भारत की कार्रवाई ने “चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए उचित और मजबूत कार्रवाई के मामले में स्वर्ण मानक स्थापित किया है।” कैर ने कहा कि अमेरिका इस मामले में भारत से ‘सीख’ ले सकता है। साथ ही उन्होंने अमेरिका और भारत को मिल कर काम करने की सलाह दी।

कैर ने कहा कि चीन और उसके सहयोगी देशों द्वारा सेंसरशिप और इंटरनेट पर जिस तरह से पकड़ बनाकर रखते हैं और उस पर तमाम पाबंदियाँ लगाते हैं, वो गलत है। यही नहीं, चीनी कंपनियाँ दूसरे देशों में काम करने के दौरान जो डाटा इकट्ठा करती हैं, उसका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है। ऐसे में तमाम देशों को डाटा के लोकलाइजेशन पर ध्यान रखने की जरूरत है। ताकी इंटरनेट पर किसी एक देश का आधिपत्य न रके। उन्होंने चीन और उसके सहयोगी देशों की ओर से इंटरनेट पर राजनीतिक, धार्मिक वजहों से पाबंदियाँ लगाने की भी निंदा की।

भारत ने साल 2020 में लगाया था टिकटोक पर बैन

बता दें कि भारत सरकार ने साल 2020 टिकटॉक के साथ ही सैकड़ों चीनी ऐप्स पर बैन लगा दिया था। भारत सरकार ने डाटा की सुरक्षा को लेकर ये कदम उठाया था और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन ऐप्स को बैन करने का आदेश जारी किया था। ऐसे अधिकतर ऐप्स का मालिकाना हक बाइटडांस नाम की चीनी कंपनी के पास है। भारत से काफी देर बार जून 2023 में अमेरिका ने भी ऐसा कदम उठाया और सरकारी अधिकारियों के टिकटॉक के उपयोग पर बैन लगा दिया। यही नहीं, अमेरिका ने हुआवेई और जेडटीई समेत पाँच चीनी कंपनियों से दूरसंचार उपकरणों की बिक्री और आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। वहीं, भारत ने इन कंपनियों के सामानों की जाँच का स्तर बढ़ा दिया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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