Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयखाने-पीने की सामग्री से लेकर दवाई तक… भारत ने गाजा नागरिकों को भेजी '32...

खाने-पीने की सामग्री से लेकर दवाई तक… भारत ने गाजा नागरिकों को भेजी ’32 टन’ मदद, इजरायल खुद खोलेगा रास्ता

भारत ने गाजा के नागरिकों के लिए मदद भेजी है। भारतीय वायुसेना का विमान 32 टन मदद सामग्री लेकर मिस्र गया है, जहाँ से यह गाजा जाएगी। यह मदद मिस्र के एल अरीश शहर के एयरपोर्ट पर उतरेगी। यह इलाका गाजा से मात्र 45 किलोमीटर दूर है।

भारत ने युद्ध में फंसे फिलीस्तीन के हिस्से गाजा के नागरिकों को मदद भेजी है। भारतीय वायुसेना का सी 17 ग्लोबमास्टर विमान 32 टन सामग्री लेकर 19 सितम्बर को दिल्ली से रवाना हुआ है। यह मिस्र पहुँचेगा, जहाँ से इसे राफाह क्रासिंग के जरिए गाजा के लोगों तक पहुँचाया जाएगा।

अक्टूबर माह में युद्ध चालू होने के बाद से भारत ने दूसरी बार गाजा के लोगों के लिए मदद भेजी है। इससे पहले भी एक बार मिस्र के रास्ते ही मदद भेजी जा चुकी है। इस सामग्री में खाने पीने का सामान, दवाइयाँ और अन्य महत्वपूर्ण चीजे हैं।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को गाजा के भीतर से इस्लामी आतंकी संगठन हमास के आतंकियों ने इजरायल पर हमला कर दिया था। इस हमले में 1,200 से अधिक नागरिक मारे गए थे। इसके पश्चात इजरायल ने गाजा के भीतर हवाई हमले चालू कर दिए।

इजरायल ने हमास के आतंकियों को ढूँढ ढूँढ कर मारने के लिए नागरिकों को भी गाजा के दूसरे हिस्से में भेजा है। इस कारण से बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हो गए हैं। विस्थापित लोगों को हमास लगातार मानव ढाल बना रहा है।

भारत द्वारा भेजी गई मदद ट्रकों से गाजा के भीतर भेजी जाएगी। यह मदद मिस्र के एल अरीश शहर के एयरपोर्ट पर उतरेगी। यह इलाका गाजा से मात्र 45 किलोमीटर दूर है। इजरायल ने फिलीस्तीनियों तक सहायता पहुँचने के लिए राफाह क्रासिंग खोलने की अनुमति दी हुई है।

भारत शुरुआत से ही इजरायल समस्या में दोनों राज्यों का समर्थन करता आया है। भारत का कहना रहा है कि इजरायल और फिलीस्तीन दो देश होने चाहिए। हालाँकि, फिलीस्तीन इजरायल का आस्तित्व नहीं मानना चाहता है।

भारत ने जहाँ एक तरफ गाजा के लोगों को सहायता भेजी है, वहीं उसने इजरायल पर हुए आतंकी हमले की कड़ी आलोचना भी की है। भारत ने इस कठिन घड़ी में इजरायल का समर्थन किया है। भारत ने मानवता के मूल्यों को मद्देनजर रखते हुए गाजा में यह सहायता भेजी है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -