Thursday, August 18, 2022
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पहले पाकिस्तान के करक में हिंदुओं का मंदिर तोड़ा, अब तोड़ने वाले इस्लामी कट्टरपंथियों पर लगा जुर्माना भरने का हिंदू काउंसिल पर दबाव

30 दिसंबर 2020 को करक जिले में कृष्ण मंदिर पर सैकड़ों की संख्या में कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था। उन्मादी मुस्लिम भीड़ ने पहले मंदिर में आग लगा दी और फिर उसे हथौड़ों से तोड़ डाला।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं पर अत्याचार नई बात नहीं है। अब एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार हिंदू काउंसिल पर उन इस्लामी कट्टरपंथियों के बदले जुर्माना भरने का दबाव बनाया जा रहा है जो करक में एक मंदिर पर हुए हमले में शामिल थे। इन पर सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माना लगाया था। हमले में शामिल 11 मौलवियों पर लगाया गया जुर्माना हिंदू पहले ही भर चुके हैं। अब उन पर इस मामले के आरोपित अन्य 100 से अधिक इस्लामी कट्टरपंथियों का जुर्माना देने का भी दबाव है।

खैबर-पख्तूनख्वा के करक जिले में दिसंबर 2020 में मंदिर पर हमला किया गया था। इस मामले में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने 11 मौलवियों पर जुर्माना लगाया था। यह राशि ऑल पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के फंड से दी गई है।

एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हिंदू काउंसिल ने जमात उलेमाई-ए-इस्लाम फजल (जेयूआई-एफ) जिले के अमीर मौलाना मीर जाकीम, पूर्व करक जिला नाजिम रहमत सलाम खट्टक, मौलाना शरीफुल्ला और आठ अन्य पर लगा जुर्माना देने का फैसला किया और प्रति व्यक्ति 2,68,000 रुपए का भुगतान किया।” रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस की FIR में कुल 123 आरोपित नामित किए गए हैं, जिनमें से कई को हमले के वीडियो फुटेज की मदद से पहचाना गया है।

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने खैबर-पख्तूनख्वा (केपी) सरकार की आपत्तियों के बावजूद प्राथमिकी में नामित आरोपितों से मंदिर के पुनर्निर्माण शुल्क के तौर पर 3.30 अरब रुपए की वसूली का आदेश दिया था। रिपोर्ट से पता चला था कि हमले में शामिल स्थानीय मौलवी मंदिर के पुनर्निर्माण में बाधा उत्पन्न कर रहे थे।

कथित तौर पर, जिला प्रशासन प्राथमिकी में नामित सभी 123 आरोपितों पर 26 अक्टूबर को नोटिस भेजकर उनके हिस्से का जुर्माना भरने का दबाव बना रहा है। एक हिंदू नेता ने कहा कि हिंदू परिषद द्वारा 11 आरोपितों का जुर्माना भरने के बाद अब एफआईआर में नामित शेष आरोपित चाहते हैं कि हिंदू उनके हिस्से के जुर्माने का भुगतान भी करें। उन्होंने कहा, “राशि का भुगतान पहले ही किया जा चुका है, लेकिन अब सभी 123 आरोपित माँग कर रहे हैं कि उनका जुर्माना भी हिंदू समुदाय द्वारा भुगतान किया जाना चाहिए जो संभव नहीं है।”

रिपोर्ट में एक स्थानीय हिंदू नेता के हवाले से बताया गया है कि समुदाय पूरी तरह असहाय है। सरकार की भागीदारी के बावजूद उपायुक्त ने स्थानीय मौलवियों के डर से मंदिर पुनर्निर्माण के दौरान मदद से इनकार कर दिया। लिहाजा हिंदू इन मौलवियों को और अधिक नाराज नहीं करना चाहते। यही कारण है कि हिंदू काउंसिल से उन पर लगा जुर्माना देने का फैसला किया गया।

करक मंदिर हमला

बता दें कि 30 दिसंबर 2020 को करक जिले की टेरी यूनियन काउंसिल स्थित कृष्ण द्वार मंदिर पर सैकड़ों की संख्या में कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था। उन्मादी मुस्लिम भीड़ ने पहले मंदिर में आग लगा दी और फिर उसे हथौड़ों से तोड़ डाला। उस दौरान इस कृत्य में शामिल करीब 109 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। साथ ही उस दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक सहित 92 पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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