Thursday, August 5, 2021
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कृष्ण मंदिर तोड़ने वाले 350 दंगाइयों पर नहीं चलेगा केस: पाकिस्तानी हुकूमत का फैसला, कहा- हिंदुओं ने ‘माफ’ किया

खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने दावा किया है कि हिंदू समुदाय ने पिछले साल सदियों पुराने मंदिर को जलाने के मामले में माफी दे दी थी। इसके बाद इन मामलों को वापस लिया गया है।

पाकिस्तान खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र के कराक जिले में सात महीने पहले कट्टरपंथी इस्लामिस्टों ने कृष्ण द्वार मंदिर जला दिया था। घटना के इतने महीने बीतने के बाद अब पाकिस्तान की खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने सभी 350 आरोपितों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का फैसला किया है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने दावा किया है कि हिंदू समुदाय ने पिछले साल सदियों पुराने मंदिर को जलाने के मामले में माफी दे दी थी। इसके बाद इन मामलों को वापस लिया गया है।

पिछले साल 30 दिसंबर 2020 को कराक जिले की टेरी यूनियन काउंसिल स्थित कृष्ण द्वार मंदिर पर सैकड़ों की संख्या में कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था। उन्मादी मुस्लिम भीड़ ने पहले मंदिर में आग लगा दी औऱ फिर उसे हथौड़ों से तोड़ डाला। उस दौरान इस कृत्य में शामिल करीब 109 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था। साथ ही उस दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक सहित 92 पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था।

इसी साल मार्च, 2021 में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय ने कृष्ण द्वार मंदिर तोड़ने में शामिल रहे सैकड़ों कट्टरपंथी इस्लामवादियों को कथित तौर माफ करने का फैसला किया था। खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने दावा किया था कि वहाँ के हिंदू समुदाय के लोगों ने मुस्लिम मौलवियों और स्थानीय नेताओं के साथ बैठक करने के बाद कोर्ट से इतर होकर इस मुद्दे को सुलझा लिया था। इसके तहत उन्होंने उस उन्मादी भीड़ को माफ करने का निर्णय लिया।

इसके बदले में कथित तौर पर मुस्लिम मौलवियों ने भी हिंदुओं को किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचाने औऱ उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का वादा किया था। मंदिर को ध्वस्त करने वाले आऱोपितों ने कथित तौर पर हिंदुओं से माफी भी माँगी थी।

आपस में ही मामले को सुलझाने के बाद बीते 13 मार्च 2021 को हिंदू और मुस्लिम दोनों पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय को एक पत्र भेजकर मामले के सभी आरोपितों को रिहा करने का अनुरोध करने को लेकर सहमत हुए थे। अब खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने 350 से अधिक आरोपितों पर दर्ज सभी केसों को वापस लेने का फैसला लिया है।

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से पीटीआई ने कहा कि हिंदुओं के जिरगा में जाने और सभी आरोपितों को माफ करने के फैसले के बाद हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच विवाद के सभी मुद्दों को सुलझा लिया गया है। आंतरिक विभाग ने इस पर विचार किया। इसी मामले पर विचार करने के बाद पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने आतंकवाद विरोधी न्यायालय को एक पत्र भेजा है। इसी के आधार पर सरकार ने सभी मामले वापस वापस लेने का फैसला किया है।

हिंदू समुदाय फैसले से निराश

खैबर पख्तूनख्वा सरकार द्वारा आरोपितों के खिलाफ दर्ज सभी केसों को वापस लेने के फैसले के बीच वहाँ रह रहे हिंदू समुदाय ने नाराजगी जाहिर की है। पाकिस्तान के हिंदुओं का कहना है कि सरकार द्वारा मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर आश्वासन देने के बावजूद इसमें देरी की जा रही है। अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से आने वाले धार्मिक विद्वान और खैबर पख्तूनख्वा के मानवाधिकार कार्यकर्ता हारून सरब दियाल ने कहा है कि वो शांति और अंतरधार्मिक सद्भाव के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार ने जिरगा संस्कृति के खिलाफ जाकर इन मामलों को वापस लिया है।

निराशा जाहिर करते हुए दियाल ने कहा है कि पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ नेशनल असेंबली के सदस्य और पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के अध्यक्ष डॉ रमेश के वंकवानी को छोड़कर किसी भी स्थानीय हिंदू समुदाय को विश्वास में नहीं लिया गया है।

इस्लामवादियों ने पाकिस्तान में हिंदू मंदिर तोड़ा

30 दिसंबर, 2020 को सैकड़ों की संख्या में कट्टरपंथी इस्लामिस्टों ने की टेरी यूनियन काउंसिल स्थित कृष्ण द्वार मंदिर पर हमला करके उसे जला दिया था। इस वारदात को अंजाम एक स्थानीय मौलवी और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी (फ़ज़ल उर रहमान समूह) के नेतृत्व में दिया गया था। कट्टरपंथियों ने पहले इमारत को जलाया और उसके बाद उसे हथौड़ों से तोड़ दिया।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गय़ा था, जिसमें यह दिखाया गया था कि किस तरह से दंगाइयों की भीड़ ने मंदिर को घेर लिया और तोड़फोड़ की। खास बात यह है कि जिस दौरान कट्टरपंथियों ने इस वारदात को अंजाम दिया उस दौरान कथित तौर पर वहाँ जिला प्रशासन के अधिकारी भी उपस्थित थे।

बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1919 में गुरु श्री परमहंस दयाल को दफनाने के बाद किया गया था। हालाँकि, वर्ष 1947 में देश आजाद होने के बाद मुस्लिमों ने इस मंदिर को बंद कर दिया था। कृष्ण द्वार मंदिर साल 2015 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इसे खोलने का आदेश दिया था। हालाँकि, कट्टरपंथियों ने इसे फिर से गिरा दिया।

पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के खिलाफ दुर्भाग्यपूर्ण कार्य का पाकिस्तान समेत दुनिया के तमाम मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी आलोचना की थी। भारत ने भी कट्टरपंथी इस्लामियों की घृणित कृत्य का कड़ा विरोध किया था। कूटनीतिक माध्यमों के जरिए पाकिस्तान के सामने इसको लेकर चिंता भी व्यक्त की गई थी।

इतना ही नहीं भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की सरकार को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि जब एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर पर हमला हुआ तो देश की कानूनी एजेंसियाँ हाथ पर हाथ धरे बैठी रहीं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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