Monday, September 27, 2021
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हिन्दी अमेरिका में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भारतीय भाषा: अमेरिकन कम्यूनिटी सर्वे ने जारी किए आँकड़े

ग़ौर करने वाली बात यह है कि गुजराती और तेलुगू बोलने वालों की संख्या 2017-18 के दौरान थोड़ी कम हुई थी, बावजूद इसके गुजराती बोलने वालों की संख्या 4.19 लाख है जो पिछले साल की तुलना में 3.5% कम है। इसके बावजूद गुजराती भाषा दूसरे नंबर पर बोली जाने वाली भाषा है।

अमेरिका में हिन्दी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है और इसके बाद गुजराती और तेलुगु भाषा हैं। अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे (ACS) के आँकड़ों के मुताबिक़, 1 जुलाई 2018 तक 8.74 लाख लोगों के साथ अमेरिका में हिन्दी सबसे अधिक बोली जाने वाली भारतीय भाषा रही, जो 2017 के आँकड़ों में 1.3% की मामूली बढ़ोतरी है।

2010 के बाद से 8 साल के दौरान, इस संख्या में 2.65 लाख लोग जुड़े जो 43.5% का इज़ाफ़ा है। हालाँकि, प्रतिशत के मामले में देखें तो तेलुगु भाषी व्यक्तियों की संख्या अमेरिका में अन्य भारतीय भाषाओं के बोलने वालों से बहुत अधिक बढ़ी जो 2010 से 2018 के बीच 79.5% की बढ़ोतरी हुई।

ख़बर के अनुसार, अमेरिका की कुल जनसंख्या में बंगाली भाषा बोलने वाले 3.75 लाख लोग हैं, जो इसी 8 साल की अवधि में लगभग 68 फ़ीसदी बढ़े हैं। इसके बाद तमिल बोलने वाले 3.08 लाख लोग हैं जिनमें 67.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बंगाली एक ऐसी भाषा है जिसे भारतीय के अलावा भी अन्य देशों में बोला जाता है। इसमें मुख्य रूप से बांग्लादेश के लोग शामिल हैं। तमिल श्रीलंका, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में बोली जाती है।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि गुजराती और तेलुगू बोलने वालों की संख्या 2017-18 के दौरान थोड़ी कम हुई थी, बावजूद इसके गुजराती बोलने वालों की संख्या 4.19 लाख है जो पिछले साल की तुलना में 3.5% कम है। इसके बावजूद गुजराती भाषा दूसरे नंबर पर बोली जाने वाली भाषा है। वहीं तीसरे नंबर पर तेलुगु भाषा बोलने वालों की संख्या 1 जुलाई 2018 तक 4 लाख थी।

अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे (एसीएस) के अनुसार 2018 के आँकड़े बताते हैं कि देश में 6.73 करोड़ लोग जिनकी उम्र 5 साल से अधिक है और जिनमें वो मूल रूप से अमेरिका में ही पैदा हुए हैं, वो अपने घर पर इंग्लिश के अलावा अन्य भाषा भी बोलते हैं। अमेरिका की कुल जनसंख्या में से 21.9 फ़ीसदी लोग विदेशी भाषा बोलते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि ACS ने इस सर्वे में अमेरिका के 20 लाख से अधिक परिवारों को शामिल किया गया था।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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