Wednesday, September 23, 2020
Home रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय 99 की हत्या, सैकड़ों लापता, इस्लाम कबूलने की मजबूरी: म्यांमार का हिंदू नरसंहार जिसे...

99 की हत्या, सैकड़ों लापता, इस्लाम कबूलने की मजबूरी: म्यांमार का हिंदू नरसंहार जिसे याद नहीं करते रोहिंग्या के पैरोकार

“मेरे पति मेरी बेटी को लेकर पास के गाँव में काम करने गए थे। शाम को मेरी बहन को एक फोन आया और कहा कि 'उन लोगों' ने उन दोनों की कुर्बानी दे दी है। अब हमारे साथ भी यही होगा। डरकर मैं घर में तीन दिन छिपी रही। फिर फौज हमें शिविर में लेकर आई।"

“उन दिनों मेरी बेटी की तबीयत खराब थी इसलिए मैंने उसे ठीक होने के लिए अपने ससुराल छोड़ा था। बाद में पता चला कि ‘वे लोग’ मेरी सास और मेरी बेटी को अपने साथ ले गए हैं…. जब हम वहाँ गए तो इलाके में बहुत गंध थी। हम लोगों ने खुद घंटों हर जगह की खुदाई की। थोड़ी देर बाद मेरी नजर हाथ के कड़े और गले में पहनने वाले काले-लाल रेशम के धागे पर पड़ी जिसकी वजह से मैं अपनी बेटी के शव को पहचान पाया।”-आशीष

“मेरे पति मेरी बेटी को लेकर पास के गाँव में काम करने गए थे। शाम को मेरी बहन को एक फोन आया और कहा कि ‘उन लोगों’ ने उन दोनों की कुर्बानी दे दी है। अब हमारे साथ भी यही होगा। डरकर मैं घर में तीन दिन छिपी रही। फिर फौज हमें शिविर में लेकर आई।”-कुकु बाला

आप सोच रहे होंगे ये क्या है? दरअसल, ये एक माँ और एक पिता का बयान है जिनकी बच्चियों ने और घरवालों ने साल 2017 में म्यामांर के रखाइन प्रान्त में रोहिंग्या ‘आतंकियों’ की उस बर्बरता का चेहरा देखा जो किसी की भी रूह कँपा दे। शुद्ध काले नकाब में तलवार, चाकू, रॉड, भाले जैसे कई हथियारों से लैस होकर सैकड़ों हिंदुओं का नरसंहार! कल्पना करने पर लगता है जैसे कोई ISIS का हमला हो। यह घटना है 25-26 अगस्त 2017 की। हमलावर भले ही ISIS से नहीं थे, पर उनके मनसूबे उतने ही नापाक थे।  

आशीष कुमार ने अपनी 8 साल की बेटी को खोया था। गर्भवती कुकु बाला ने अपने पति और बेटी को। इनके जैसे सैंकड़ों परिवार थे जिनकी सिसकियाँ रुकने का नाम नहीं ले रहीं थी। उस दिन ‘काले नकाब’ में रोहिंग्या ‘आतंकियों’ ने म्यांमार के रखाइन प्रांत के खा मॉन्ग सेक में जो तबाही मचाई उसकी गंध आज भी सैंकड़ों पीड़ित हिंदू नहीं भूल पाते। भूलें भी कैसे? जमीन में दबाई गई एक साथ 45 लाशें जो क्षत-विक्षत देखी थीं। मात्र दो गाँव से 99 लोग मार दिए गए थे। 1000 हिंदू लापता हो गए। 620 परिवारों को शिविरों में रहने को मजबूर होना पड़ा था।

जी टीवी की कवरेज से लिया गया स्क्रीनशॉट

खा मॉन्ग सेक नरसंहार ( Kha Maung Seik massacre )

25 अगस्त 2017 को खा मॉन्ग सेक ( Kha Maung Seik ) यानी फाकिरा बाजार के नजदीक रहने वाले हिंदुओं के लिए भयावह रात थी। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट में रोहिंग्या ‘आतंकियों’ का हाथ बताया था। रिपोर्ट में एमनेस्टी ने कहा था कि इस नरसंहार को अंजाम देने वाले अराकान रोहिंग्या सैलवेशन आर्मी (आरसा) के गुर्गे हैं (म्यांमार में इन्हें रोहिंग्या आतंकी भी कहा जाता है)। उन्होंने ही पहले सुरक्षा बलों पर दर्जनों हमले किए। साथ ही हिंदू गाँव नॉक खा माउंग सेक ( Kha Maung Seik ) पर 25 अगस्त को हमला किया और कई हिंदू बंदी बना लिए गए। इनमें से अधिकांश को असहनीय यातनाएँ देकर मार डाला गया। 

रिपोर्ट्स बताती हैं कि दो दिन में 45 हिंदुओं के शव 3 गड्ढों में पाए गए थे। ये शव जब निकाले गए तो बुरी तरह क्षत-विक्षत थे। कुछ का गला काटा गया था, कुछ का सिर और कुछ के अन्य अंग। पहले शवों की गिनती 45-48 के बीच होती रही। फिर हमले में गायब कुल संख्या से मालूम हुआ कि लगभग 99 हिंदुओं को वहाँ मौत के घाट उतारा गया।

लाशों के लिए खोदे गए गड्ढे
- विज्ञापन -

कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस पूरे नरसंहार को बिलकुल अलग कोण के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। तर्क-कुतर्क के नाम पर ARSA को बचाने की कोशिशें हुई। प्रश्न चिह्नों के साथ ये समझाया गया कि कैसे आखिर जो इल्जाम इस्लामिक आतंकियों पर लगाया जा रहा है वो सरासर गलत है। 

रोहिंग्या ‘आतंकियों’ की कार्रवाई पर मीडिया रिपोर्ट कैसी थी? इस पर हम अंत में थोड़ी चर्चा जरूर करेंगे। लेकिन उससे पहले इस नरसंहार की शुरुआत को समझिए। वैसे तो म्यांमार के रखाइन प्रांत में साल 2012 से ही बौद्धों और रोहिंग्या ‘आतंकियों’ के बीच सांप्रदायिक हिंसा शुरू थी। लेकिन साल 2017 में हालात तब भयानक हो गए, जब म्यांमार में मौंगडो बॉर्डर पर रोहिंग्या आतंकियों के हमले में 9 पुलिस अफसरों की मौत हो गई।

प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: lepetitjournal)

रोहिंग्या कट्टरपंथियों ने 30 पुलिस थानों को अपना निशाना बनाकर 9 पुलिस कर्मियों को मौत के घाट उतारा था। जवाब में प्रशासन ने भी कार्रवाई की और करीब 90 हजार रोहिंग्या मुस्लिमों को गाँव छोड़कर बांग्लादेश जाना पड़ा। इन लोगों ने म्यांमार प्रशासन पर हत्याओं और बलात्कार का आरोप मढ़ा। इससे वैश्विक स्तर पर भी म्यांमार की तीखी आलोचना हुई। लेकिन म्यांमार ने इसे क्लीयरेंस ऑपरेशन बताते हुए रोहिंग्या चरमपंथियों के हमलों का वाजिब रिएक्शन करार दिया । 

आज इन्हीं रोहिंग्याओं के लिए इंसानियत के नाम पर जिस तरह छाती पीटी जाती है। बड़ी-बड़ी संस्थाएँ इन पर दया दिखाने की बात करती हैं। इन्हें शरण देने की पैरवी करती हैं। उसी ढंग से क्या आपने कभी भी रखाइन प्रांत के इन लाचार हिंदुओं के बारे में सुना है? जिनका न प्रशासन से कुछ मतलब था और न चरमपंथियों से। लेकिन तब भी वह इनकी बर्बरता का शिकार हुए।

महिला, बच्चे, पुरुष…सबको बनाया गया निशाना

पश्चिमी म्यांमार के हिंदू आबादी वाले गाँव में रीका धर ने अपने पति, 2 भाइयों और कई पड़ोसियों को नृशंसतापूर्वक मौत के घाट उतरते हुए अपनी आँखों से देखा। घटना के काफी दिनों बाद एक न्यूज चैनल से बातचीत में धर ने बताया  “कत्ल करने के बाद, उन्होंने बड़े-बड़े तीन गड्ढे खोदे और सबको उसमें फेंक दिया। उनके हाथ उस समय भी पीछे की ओर बँधे हुए थे और आँखों पर पट्टी बाँध दी गई थी।” 

इसी तरह 15 वर्षीया प्रोमिला शील ने बताया था, “पहाड़ियों में ले जाने के बाद उन्होंने हर किसी को मौत के घाट उतार दिया। मैंने अपनी आँखों के सामने यह सब देखा।” 

राजकुमारी ने कहा, “हमें उस तरफ देखने से मना किया गया था। उनके हाथ में चाकू, तलवारें और लोहे की रॉड थी। हमने खुद को झाड़ियों में छिपा लिया था। इसलिए हम वो सब देख पाए। मेरे पिता, मेरे चाचा और मेरे भाई…सबको उन्होंने काट डाला।”

सोचिए इस नरसंहार में बच्चे, महिला, पुरुष, बुजुर्ग किसी को नहीं छोड़ा गया। जब स्वजनों को खोजने के लिए अगले दो दिन खुदाई हुई तो हर जगह हड़कंप था। परिवारों की चीखें बंद होने का नाम नहीं ले रहीं थी। लोग एक दूसरे से लिपट-लिपट कर अपने परिजनों के लिए रो रहे थे। कुछ की आँखों से आँसू सूख चुके थे और कुछ इस इंतजार में थे कि क्या पता उनके स्वजन कहीं से लौट आएँ। 

पूरे नरसंहार ने हर जगह म्यांमार प्रशासन को  लेकर एक ओर जहाँ बहुत सारे सवाल खड़े कर दिए थे, वहीं हिंसा के बाद रोहिंग्या मुस्लिमों ने बांग्लादेश जाना शुरू कर दिया था। रखाइन प्रांत के दो गाँवों में हुए इस ‘आतंकी’ हमले के बाद सैकड़ों हिंदू भी बिखर गए। कइयों का पता नहीं चल पाया और कइयों को शिविरों में ठहराया गया। इस हमले से पहले वहाँ 14 हजार हिंदू रहते थे। बौद्ध और रोहिंग्या मुस्लिमों की तादाद के मुकाबले प्रांत में ये संख्या हमेशा से बहुत कम थी।

म्यांमार हिंदू नरसंहार पर क्या कहती है एमनेस्टी की रिपोर्ट?

एमनेस्टी की रिपोर्ट में स्थानीय लोगों की बयानों के हवाले से कहा गया कि उस रात नॉक खा मॉन्ग सेक ( Kha Maung Seik) नामक गाँव में काले नकाब पहनकर आए हमलावर ग्रामीणों की आँखों पर पट्टी बाँधकर शहर से बाहर ले गए। वहाँ उन्होंने सबसे पहले महिलाओं और बच्चों से पुरुषों को अलग किया। कुछ घंटों बाद 53 हिंदुओं का गला रेत दिया गया। ये शुरुआत पुरुषों से हुई। इस घटनाक्रम में नकाबपोशों ने 8 हिंदू महिलाओं समेत कुछ बच्चों को छोड़ने की बात मान ली। लेकिन वो भी तब, जब इन लोगों ने इस्लाम कबूलना स्वीकार कर लिया।

इस रिपोर्ट के अलावा जी न्यूज की ग्राउंड रिपोर्ट भी यह दावा करती है कि उन्हें म्यांमार के स्टेट काउंसलर से आधिकारिक जानकारी मिली थी। उसमें भी यही बात कही गई कि 300 रोहिंग्या आतंकियों ने 100 हिंदुओं का अपहरण किया और उनमें से 92 की हत्या कर दी गई, जबकि 8 महिलाएँ बच गईं क्योंकि उन्होंने इस्लाम स्वीकार करने को मजबूर किया गया और बाद में बांग्लादेश ले जाया गया।

एमनेस्टी की रिपोर्ट में पीड़िता का बयान

फॉर्मिला नाम की महिला ने एम्नेस्टी को बताया कि उसने हिंदू पुरुषों को मरते हुए भले ही नहीं देखा लेकिन जब नकाबपोश वापस लौटे तो उनके हथियार और हाथ पर खून था। उन्होंने महिलाओं को सूचित किया उनके आदमियों को मार दिया गया। बाद में फॉर्मिला समेत 7 अन्य महिलाओं को अलग ले जाया गया। उसने पीछे मुड़कर देखा तो ASRA के आतंकी महिलाओं और पुरुषों को भी मार रहे थे। फॉर्मिला ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा, “मैंने देखा कि एक आदमी ने महिला के बाल को पकड़ा हुआ था और दूसरे ने चाकू लेकर उसका गला काट दिया।”

घटना के उसी दिन उसी प्रात के एक अन्य गाँव Ye Bauk Kyar से 46 लोग लापता हो गए। इनके शव बहुत ढूँढने के बाद भी बरामद नहीं हो पाए। इसी तरह 26 अगस्त 2017 को ASRA आतंकियों मे मंगडौ शहर के पास Myo Thu Gyi गाँव में 6 हिंदुओं को गोली से मार दिया। 25 वर्षीय महिला ने बताया कि उसके पति और बेटी को उसके सामने नकाबपोशों ने मारा। हालाँकि वह उनका चेहरा नहीं देख पाई। लेकिन उनकी आँखे, बड़ी-बड़ी बंदूकें और तलवारे उसने जरूर देखीं। उसने कहा, “मेरे पति को जब मारा गया। मैं थोड़े होश में थी।”

मीडिया ने हिंदू नरसंहार और इस्लामी आतंक की खबर को कैसे परोसा?

इस नरसंहार ने विश्व के कोने-कोने मे रोहिंग्या मुस्लिमों की बर्बरता पर सवाल खड़े कर दिए थे। ऐसे में वामपंथियों की पहली जरूरत थी कि रोहिंग्याओं पर लगे दाग को साफ किया जाए। शायद इसीलिए मात्र कुछ महीनों के बाद ही द क्विंट, बीबीसी और द इंडिकटर जैसे वेबसाइट्स पर कई लेख छपे। 

इन आर्टिकल्स का मूल उद्देश्य लोगों के जेहन में ये बात डालना था कि आखिर जिस प्रकार से इस पूरे हमले के लिए संप्रदाय विशेष के चरमपंथियों पर मढ़ा जा रहा है, उसमें वास्विकता में म्यांमार सरकार का, वहाँ की सेना का और इलाके के बहुसंख्यकों का भी हाथ हो सकता है। अपने लेख को सही साबित करने के लिए इनमें यहाँ तक बता दिया गया कि आखिर ARSA के लोगों की क्या यूनिफॉर्म होती है, उनके नारे क्या होते हैं और क्यों ये काम उनका नहीं है। 

तमाम हिंदुओं के बयान सुनने के बाद भी रिपोर्ट्स में पूछा गया कि आखिर रोहिंग्या मुस्लिम रखाइन प्रांत के हिंदुओं को क्यों मारेंगे, उनकी हालत तो खुद रोंहिंग्या की तरह है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी आरोप लगाए गए कि म्यांमार प्रशासन ने हिंदुओं को रोहिंग्याओं से अलग करने के लिए काफी आगे तक निकल गए हैं। इसलिए बौद्धों ने जो हमला किया उसका इल्जाम रोहिंग्या पर थोपा जा रहा है। अपवादों के उदाहरण देकर यह एंगल रखने की कोशिश भी की गई कि नकाबपोशों ने संप्रदाय विशेष के लोगों को भी निशाना बनाया। 

जावेद अख्तर ने भी म्यांमार में हिंदू नरसंहार के लिए वहाँ की सैन्य कार्रवाई को दोषी ठहराया था। इसके बाद उनकी बहुत आलोचना हुई थी।

जावेद अख्तर ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “अगर रखाइन में हिंदुओं की कब्र मिली है तो यह सब वहाँ की सेना की वजह से हुआ होगा। नहीं तो, सैकड़ों की संख्या में हिंदू लोग वहाँ से रोहिंग्याओं के साथ क्यों भाग गए।”

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

टाइम्स में शामिल ‘दादी’ की सराहना जरूर कीजिए, आखिर उनको क्या पता था शाहीन बाग का अंजाम, वो तो देश बचाने निकली थीं!

आज उन्हें टाइम्स ने साल 2020 की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों की सूची में शामिल कर लिया है। खास बात यह है कि टाइम्स पर बिलकिस को लेकर टिप्पणी करने वाली राणा अय्यूब स्वयं हैं।

मेरी झोरा-बोरा की औकात, मौका मिले तो चुनाव लड़ने का निर्णय लूँगा, लोगों की सेवा के लिए राजनीति में आऊँगा: पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय

मैंने अभी कोई पार्टी ज्वाइन करने का ऐलान तो नहीं किया। मैं चुनाव लड़ूँगा, यह भी कहीं नहीं कहा। इस्तीफा तो दे दिया। चुनाव लड़ना कोई पाप है?

‘बोतल डॉन’ खान मुबारक की 20 दुकान वाले कॉम्प्लेक्स पर चला योगी सरकार का बुलडोजर: करोड़ों की स्कॉर्पियो, जेसीबी, डंपर भी जब्त

माफिया सरगना के नेटवर्क को ध्वस्त करने के क्रम में फरार चल रहे खान मुबारक के करीबी शातिर बदमाश परवेज की मखदूमपुर गाँव स्थित करीब 50 लाख की संपत्ति को अंबेडकर नगर पुलिस द्वारा ध्वस्त कर दिया गया।

विदेशी लेखक वीजा पर यहाँ आता है और भारत के ही खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाता है: वीजा रद्द करने की माँग

मोनिका अरोड़ा ने आरोप लगाया है कि स्कॉटिश लेखक विलयम डेलरिम्पल लगातार जानबूझ कर यहाँ के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं।

‘सुशांत को थी ड्रग्स की लत, अपने करीबी लोगों का फायदा उठाता था’ – बेल के लिए रिया चक्रवर्ती ने कहा

"सुशांत सिंह राजपूत ड्रग्स लेते थे। वह अपने स्टाफ को ड्रग्स खरीद कर लाने के लिए कहते थे। वो जीवित होते, तो उन पर ड्रग्स लेने का आरोप..."

बच्चे को मोलेस्ट किया, पता ही नहीं था सेक्सुअलिटी क्या होती है: अनुराग कश्यप ने स्वीकारा, शब्दों से पाप छुपाने की कोशिश

कैसे अनुराग कश्यप पर पायल घोष के यौन शोषण के आरोपों के बावजूद खुद को फेमनिस्ट कहने वाले गैंग के एक भी व्यक्ति ने पायल का समर्थन नहीं किया।

प्रचलित ख़बरें

‘ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे’: मौत से 5 दिन पहले सुशांत का परिवार को SOS

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मौत से 5 दिन पहले सुशांत ने अपनी बहन को एसओएस भेजकर जान का खतरा बताया था।

शो नहीं देखना चाहते तो उपन्यास पढ़ें या फिर टीवी कर लें बंद: ‘UPSC जिहाद’ पर सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़

'UPSC जिहाद' पर रोक को लेकर हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिनलोगों को परेशानी है, वे टीवी को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं।

नेपाल में 2 km भीतर तक घुसा चीन, उखाड़ फेंके पिलर: स्थानीय लोग और जाँच करने गई टीम को भगाया

चीन द्वारा नेपाल की जमीन पर कब्जा करने का ताजा मामला हुमला जिले में स्थित नामखा-6 के लाप्चा गाँव का है। ये कर्णाली प्रान्त का हिस्सा है।

व्हिस्की पिलाते हुए… 7 बार न्यूड सीन: अनुराग कश्यप ने कुबरा सैत को सेक्रेड गेम्स में ऐसे किया यूज

पक्के 'फेमिनिस्ट' अनुराग पर 2018 में भी यौन उत्पीड़न तो नहीं लेकिन बार-बार एक ही तरह का सीन (न्यूड सीन करवाने) करवाने का आरोप लग चुका है।

आफ़ताब दोस्तों के साथ सोने के लिए बनाता था दबाव, भगवान भी आलमारी में रखने पड़ते थे: प्रताड़ना से तंग आकर हिंदू महिला ने...

“कई बार मेरे पति आफ़ताब के द्वारा मुझपर अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर होने का दबाव बनाया गया लेकिन मैं अडिग रहीं। हर रोज मेरे साथ मारपीट हुई। मैं अपना नाम तक भूल गई थी। मेरा नाम तो हरामी और कुतिया पड़ गया था।"

‘शिव भी तो लेते हैं ड्रग्स, फिल्मी सितारों ने लिया तो कौन सी बड़ी बात?’ – लेखिका का तंज, संबित पात्रा ने लताड़ा

मेघना का कहना था कि जब हिन्दुओं के भगवान ड्रग्स लेते हैं तो फिर बॉलीवुड सेलेब्स के लेने में कौन सी बड़ी बात हो गई? संबित पात्रा ने इसे घृणित करार दिया।

यूपी में माफियाओं पर ताबड़तोड़ एक्शन जारी: अब मुख्तार अंसारी गिरोह के नजदीकी रजनीश सिंह की 39 लाख की संपत्ति जब्त

योगी सरकार ने मुख्तार अंसारी गिरोह आईएस 191 के नजदीकी व मन्ना सिंह हत्याकांड में नामजद हिस्ट्रीशीटर एवं पूर्व सभासद रजनीश सिंह की 39 लाख रुपए की सम्पत्ति गैंगेस्टर एक्ट के तहत जब्त की है।

जम्मू कश्मीर में नहीं थम रहा बीजेपी नेताओं की हत्या का सिलसिला: अब BDC चेयरमैन की आतंकियों ने की गोली मार कर हत्या

मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में बीजेपी बीडीसी खग के चेयरमैन भूपेंद्र सिंह को कथित तौर पर आतंकियों ने उनके घर पर ही हमला करके जान से मार दिया।

बनारस की शिवांगी बनी राफेल की पहली महिला फाइटर पायलट: अम्बाला में ले रही हैं ट्रेंनिंग, पिता ने जताई ख़ुशी

शिवांगी की सफलता पर न केवल घरवालों, बल्कि पूरे शहर को नाज हो रहा है। काशी में पली-बढ़ीं और BHU से पढ़ीं शिवांगी राफेल की पहली फीमेल फाइटर पायलट बनी हैं।

दिल्ली दंगा केस में राज्य विधानसभा पैनल को झटका: SC ने दिया फेसबुक को राहत, कहा- 15 अक्टूबर तक कोई कार्रवाई नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक के वाइस प्रेसिडेंट अजित मोहन के खिलाफ 15 अक्टूबर तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने का आदेश दिया है।

प्रभावी टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट, सर्विलांस, स्पष्ट मैसेजिंग पर फोकस और बढ़ाना होगा: खास 7 राज्यों के CM के साथ बैठक में PM मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि देश में 700 से अधिक जिले हैं, लेकिन कोरोना के जो बड़े आँकड़े हैं वो सिर्फ 60 जिलों में हैं, वो भी 7 राज्यों में। मुख्यमंत्रियों को सुझाव है कि एक 7 दिन का कार्यक्रम बनाएँ और प्रतिदिन 1 घंटा दें।

टाइम्स में शामिल ‘दादी’ की सराहना जरूर कीजिए, आखिर उनको क्या पता था शाहीन बाग का अंजाम, वो तो देश बचाने निकली थीं!

आज उन्हें टाइम्स ने साल 2020 की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों की सूची में शामिल कर लिया है। खास बात यह है कि टाइम्स पर बिलकिस को लेकर टिप्पणी करने वाली राणा अय्यूब स्वयं हैं।

मेरी झोरा-बोरा की औकात, मौका मिले तो चुनाव लड़ने का निर्णय लूँगा, लोगों की सेवा के लिए राजनीति में आऊँगा: पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय

मैंने अभी कोई पार्टी ज्वाइन करने का ऐलान तो नहीं किया। मैं चुनाव लड़ूँगा, यह भी कहीं नहीं कहा। इस्तीफा तो दे दिया। चुनाव लड़ना कोई पाप है?

दिल्ली बार काउंसिल ने वकील प्रशांत भूषण को भेजा नोटिस: 23 अक्टूबर को पेश होने का निर्देश, हो सकती है बड़ी कार्रवाई

दिल्ली बार काउंसिल (BCD) ने विवादास्पद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के मद्देनजर 23 अक्टूबर को उसके सामने पेश होने का निर्देश दिया है।

NCB ने ड्रग्स मामले में दीपिका, सारा अली खान, श्रद्धा समेत टॉप 4 हीरोइन को भेजा समन, जल्द होगी पूछताछ

रिया चक्रवर्ती से पूछताछ के दौरान दीपिका, दीया, सारा अली खान, रकुलप्रीत सिंह और श्रद्धा कपूर का नाम सामने आया था। दीया का नाम पूछताछ के दौरान ड्रग तस्कर अनुज केशवानी ने लिया था।

‘बोतल डॉन’ खान मुबारक की 20 दुकान वाले कॉम्प्लेक्स पर चला योगी सरकार का बुलडोजर: करोड़ों की स्कॉर्पियो, जेसीबी, डंपर भी जब्त

माफिया सरगना के नेटवर्क को ध्वस्त करने के क्रम में फरार चल रहे खान मुबारक के करीबी शातिर बदमाश परवेज की मखदूमपुर गाँव स्थित करीब 50 लाख की संपत्ति को अंबेडकर नगर पुलिस द्वारा ध्वस्त कर दिया गया।

हमसे जुड़ें

263,159FansLike
77,994FollowersFollow
323,000SubscribersSubscribe
Advertisements