Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयपाकिस्तान में थम नहीं रहा आटे के लिए हाहाकार: कहीं गुस्साए आदमी ने लाइन...

पाकिस्तान में थम नहीं रहा आटे के लिए हाहाकार: कहीं गुस्साए आदमी ने लाइन में खड़े लोगों को नाले में फेंका, कहीं मारपीट कर छीनी बोरी; Videos

पाकिस्तान में इस समय आटे के भाव आसमान छू रहे हैं। कराची में आटा 140-160 किलोग्राम है जबकि इस्लामाबाद और पेशावर में 10 किलो का आटे का बैग 1500 किलो बिक रहा है। वहीं 20 किलो आटे का बैग 2800 का मिल रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा दिया जा रहे आटे की बोरी के लिए लोग लड़-भिड़ रहे हैं।

पाकिस्तान में आटे के लिए चल रही हाहाकार के बीच सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आई हैं। इनमें से एक वीडियो में एक आदमी को दूसरे लोगों को खुले सीवर में ढकेलते देखा जा सकता है।

वीडियो देखकर पता चल रहा है कि लोगों के बीच हुई ये घटना उस दौरान की है जब सरकार की ओर से आटे का थैला बाँटा जा रहा था। उसी समय ये आदमी लोगों से आटे के लिए भिड़ गया और दूसरों को धक्का मारने लगा।

इसी तरह एक अन्य वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे आटे के लिए मारामारी हो रही है। इस बीच एक व्यक्ति आता है और आटे की बोरी के लिए दूसरे को गुदगुदी करने लगता है।

बता दें कि पाकिस्तान में इस समय आटे के भाव आसमान छू रहे हैं। कराची में आटा 140-160 किलोग्राम है जबकि इस्लामाबाद और पेशावर में 10 किलो का आटे का बैग 1500 किलो बिक रहा है। वहीं 20 किलो आटे का बैग 2800 का मिल रहा है।

खैबर पख्तूख्वा में भी आटे के लिए रोना मचा हुआ है। वहाँ 20 किलो आटे का बोरी 3100 में बिक रही है। सरकार बिगड़ते हालातों को स्थिर करने में असमर्थ है।

बता दें कि पाकिस्तान आम लोगों के सामने खाने का संकट मंडरा रहा है। सरकार गेहूँ की कमी के संकट से लड़ने के लिए खुद को तैयार कर रही है क्योंकि इस साल उत्पादन लक्ष्य से करीब 30 लाख टन कम रहने का अनुमान है। इसके अलावा शाहबाज शरीफ ने पाकिस्तानी अधिकारियों को गेहूँ की चोरी और भंडारण को रोकने के लिए साइलो के निर्माण की रणनीति तैयार करने का भी निर्देश दिया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -