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‘हिस्ट्री रिपीट इटसेल्फ’: डोनाल्ड ट्रंप के पोस्ट के जवाब में ‘ऑपरेशन ईगल क्लॉ’ की ईरान ने दिलाई याद, अमेरिकियों को 1980 में लौटना पड़ा था खाली हाथ

ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध जमीन के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी लड़ी जा रही है। राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान को तबाह करने की धमकी से भरे ट्वीट का जवाब ईरान ने एक वीडियो शेयर कर किया है। ये वीडियो 1980 का है, जब अमेरिका को ईरान में मुँह की खानी पड़ी थी। उस वक्त अमेरिकी बंधकों को बचाने में यूएस सेना नाकाम रही थी।

ईरान को तबाह करने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के विवादित ट्वीट के बाद ईरान ने अमेरिकी की दुखती रग दबा दी है। भारत में मौजूद ईरानी दूतावास ने एक वीडियो शेयर किया है, जो 1980 में अमेरिका के असफल ‘ऑपरेशन ईगल क्लॉ’ की याद दिलाता है।

दरअसल दुनिया भर के देशों में मौजूद ईरानी दूतावास ने एक्स पर यह वीडियो शेयर कर अमेरिका का मजाक उड़ाया है। हालाँकि ईरान और अमेरिका में 45 दिनों के लिए सीजफायर को लेकर बातचीत चलने की बात सामने आई है। इसके बावजूद एक्स पर एक-दूसरे के खिलाफ माहौल बनाने में दोनों देश लगे हुए हैं।

ईरान ने ऑपरेशन ईगल क्लॉ की दिलाई याद

1980 में ऑपरेशन ईगल क्लॉ में अमेरिका अपने नागरिकों को ईरान से छुड़वाने के लिए ऑपरेशन चलाया था। यह एक गुप्त ऑपरेशन था, जिसमें खराब मौसम और तकनीकी खराबी की वजह से विफल रहा। इस दौरान हेलीकॉप्टर और परिवहन विमान की टक्कर में 8 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी।

भारत स्थित ईरानी दूतावास ने एक्स पर वीडियो पोस्ट किया है। इसमें 24 अप्रैल 1980 को ईरान के तबास रेगिस्तान में हुए अमेरिकी ऑपरेशन के मलबे और तबाही का मंजर दिख रहा है। इसमें लिखा गया है ‘History repeats itself'(इतिहास खुद को दोहराता है। ) ऑपरेशन ईगल क्लॉ ईरान की धरती पर एक यूएस सैनिकों की ऐतिहासिक हार।

वहीं थाइलैंड की ईरानी दूतावास ने एक्स पर लिखा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जिस तरह से बच्चों की तरह गालियाँ देते हैं, उससे ऐसा लगता है कि अमेरिका उम्मीद से पहले ही पाषाण युग में पहुँच गया है।

अमेरिका राष्ट्रपति ने क्या कहा था

राष्ट्र्पति ट्रंप ने ईरान को पूरी तरह तबाह करने की धमकी दी है। उनका कहना है कि अगर ईरान मंगलवार (6 अप्रैल 2026) तक होर्मुज नहीं खोला तो पावर प्लांट और पुलों पर हमला किया जाएगा। उन्होने सोशल मीडिया ट्रूथ पर गालियाँ देते हुए अपनी बातें कहीं हैं। उन्होंने कहा है कि मंगलवार को ईरान में पावर प्लांट डे और ब्रिज डे, दोनों एक साथ मनाए जाएँगे। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट खोल दो, वरना तुम नरक में पहुँच जाओगे – बस देखते रहो!

क्या था ऑपरेशन ईगल क्लॉ

ये ऑपरेशन अमेरिका के लिए काले अध्याय से कम नहीं है, क्योंकि अमेरिकी सेना वहाँ अपने बंधकों को छुड़ाने गई थी और खुद ही फँस गई।

4 नवंबर 1979 को करीब 3000 चरमपंथी छात्रों ने तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर हमला कर दिया था और 63 अमेरिकियों को बंधक बना लिया। इतना ही नहीं अमेरिकी दूतावास के 3 स्टाफ को भी पकड़ लिया गया था। यह घटना ईरान में हटाए गए शासक मोहम्मद रजा शाह पहलवी को अमेरिका द्वारा पनाह देने के फैसले के दो हफ्ते के अंदर हुई थी। अमेरिका ने शाह पहलवी को इलाज के लिए आने की अनुमति दी थी।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने यूनाइटेड स्टेट्स से शाह को वापस करने और ईरान में पश्चिमी असर खत्म करने के लिए अभियान चलाया था। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ता के दौरान 13 बंधकों को मुक्त कर दिया गया। बाकी 53 बंधक अभी भी ईरान के पास थे। अप्रैल 1980 तक पाँच महीने तक नाकाम बातचीत के बाद अमेरिका गुप्त ऑपरेशन करने में योजना बनाया।

तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने 16 अप्रैल 1980 को एक मिलिट्री रेस्क्यू ऑपरेशन को मंजूरी दी। इस प्लान में अमेरिकी आर्म्ड सर्विसेज की चारों ब्रांच को शामिल किया गया। दो दिन के ऑपरेशन में हेलीकॉप्टर और C-130 एयरक्राफ्ट को तेहरान से लगभग 200 मील दक्षिण-पूर्व में एक सॉल्ट फ्लैट (कोड-नेम डेज़र्ट वन) पर ले जाया गया। योजना बनाई गई कि वहाँ से हेलीकॉप्टर C-130 से फ्यूल भरेंगे और अमेरिकी सैनिकों को उस पहाड़ी पर ले जाएँगे, जहाँ से रेस्क्यू मिशन शुरू किया जाएगा। 19 अप्रैल 1980 को पूरे ओमान और अरब सागर में सेना तैनात कर दी गई।

24 अप्रैल 1980 को ऑपरेशन ईगल क्लॉ शुरू हुआ। 8 यूनाइटेड स्टेट्स नेवी RH-53D सी स्टैलियन हेलीकॉप्टर अरब सागर में अमेरिकन एयरक्राफ्ट कैरियर, USS निमित्ज़ के उड़े। वहीं 6 C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ओमान के मसिराह द्वीप से उड़ान भरी।

एयरक्राफ्ट का सामना ईरान के रेगिस्तान में उठा भयंकर रेतीला तूफान ‘हबूब’ से हुआ। इससे विजिबिलिटी काफी कम हो गई। एयरक्राफ्ट को काफी नुकसान हुआ और क्रू के लोग बीमार पड़ गए।

ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही विजिबिलिटी कम होने के बीच एक RH-53D हेलीकॉप्टर C-130 एयरक्राफ्ट से टकरा गया, जिसमें रीफ्यूलिंग के लिए एक्स्ट्रा फ्यूल था। ससे आग लग गई और 8 अमेरिकी सैनिक मारे गए, जबकि कई घायल हुए।

ऑपरेशन को लेकर आ रही दिक्कतों की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति कॉर्टर को दी गई और उन्होंने मिशन को बंद करने का फैसला लिया। इस तरह से अमेरिकी सेना खाली हाथ वापस लौटी। अमेरिकी लोगों को करीब 270 दिनों तक बंधक बना कर रखा गया था।

ईरान इसलिए अमेरिका को 1980 की याद दिला रहा है और ऑपरेशन ईगल क्लॉ के वीडियो शेयर कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी का जवाब ईरान इस रूप में दे रहा है। वहीं ईरानी उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका अपने लोगों को बुनियादी सुविधाएँ नहीं दे पा रहा और ईरान से लड़ रहा है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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