Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयराष्ट्रपति पुतिन के काफिले पर आत्मघाती हमला, कार के पास ही हुआ बम विस्फोट,...

राष्ट्रपति पुतिन के काफिले पर आत्मघाती हमला, कार के पास ही हुआ बम विस्फोट, कई गिरफ्तार: मीडिया रिपोर्ट्स

पुतिन की कार के बाएँ तरफ के छोर में जोरदार धमाका हुआ था और उसके बाद वहाँ पर धमाके के कारण बहुत धुआँ भी फैला। यह हमला कब और कहाँ हुआ है, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट तौर पर सामने नहीं आई है।

देश और दुनिया के तमाम बड़े मीडिया संस्थान अपनी रिपोर्ट्स में रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर हुए जानलेवा हमले की बात बता रहे है। हालाँकि, इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार पुतिन के काफिले को पहले एक एम्बुलेंस ने रोका और उसके बाद उनकी कार के पास बम का जोरदार धमाका हुआ।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर जानलेवा हमले की खबर का ‘द मिरर’ समेत कई अन्य मीडिया रिपोर्ट्स ने दावा किया है। इनमें कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति पुतिन की लिमोजिन कार के ठीक पास में बम धमाका हुआ, इस हमले में पुतिन बाल-बाल बच गए हैं। वहीं पुतिन को हमले के बाद सुरक्षित स्थान पर भी ले जाया गया।

हमले के इन दावों में बताया जा रहा है कि पुतिन की कार के बाएँ तरफ के छोर में जोरदार धमाका हुआ था और उसके बाद वहाँ पर धमाके के कारण बहुत धुआँ भी फैला। यह हमला कब और कहाँ हुआ है, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट तौर पर सामने नहीं आई है।

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार यह भी कहा जा रहा है कि वे जब अपने निवास स्थान की तरफ लौट रहे थे, उस दौरान उन पर हमला हुआ। हमले के बाद पुतिन की गाड़ी को बमनिरोधक और बुलेटप्रुफ सुरक्षाकर्मियों ने हर तरफ से घेर लिया और फिर आसपास फैले धुआँ को हटाने का प्रयास किया गया। यह एक आत्मघाती हमला था। राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात कुछ लोगों को भी हमले के बाद गिरफ्तार किया गया है।

गौरतलब है कि बीते दिनों पुतिन के ‘युद्ध मास्टरमाइंड’ एलेक्जेंडर डुगिन की बेटी दारिया डुगिन की मृत्यु भी इसी तरह के एक कार बम धमाके में हो गई थी, जबकि उस हमले में दरिया के पिता बाल-बाल बचे थे। यह हमला रूस की राजधानी मॉस्को में शनिवार (20 अगस्त 2022) को हुआ था। हमले में मरने वाली दारिया पेशे से एक पत्रकार थीं। वहीं इस हमले में यूक्रेन का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही रूस के भीतर मौजूद पुतिन विरोधी भी शक के दायरे में हैं। रूसी जाँच एजेंसियों की मानें तो इस हमले में विस्फोटक ड्राइवर की सीट की तरफ से कार के नीचे लगाया गया था और इसमें टारगेट अलेक्जेंडर था, जबकि जान उनकी बेटी की चली गईं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -