Sunday, April 5, 2026
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कट्टर राष्ट्रवादी, घोर चीन विरोधी: जानें कौन हैं जापान की पहली महिला PM बनने जा रहीं साने ताकाइची, अपने देश को बनाना चाहती हैं महाशक्ति

ताकाइची खुद को शिंजो आबे की राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी मानती हैं। ताकाइची भी उनकी तरह राष्ट्रवादी, सामाजिक रूप से रूढ़िवादी और आक्रामक आर्थिक नीतियों की समर्थक हैं।

जापान की सत्ताधारी पार्टी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने शनिवार (4 अक्टूबर 2025) को साने ताकाइची (Sanae Takaichi) को अपना नया नेता चुन लिया है। 64 साल की ताकाइची अब जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं।

ताकाइची ने पार्टी मुख्यालय में हुए वोटिंग में सेंटरिस्ट उम्मीदवार शिंजिरो कोइजुमी को हराया। जापान की संसद (जिसे डाइट कहा जाता है) में मध्य अक्टूबर में औपचारिक रूप से उन्हें प्रधानमंत्री चुना जाएगा। ताकाइची शिगेरू इशिबा की जगह लेंगी, जिन्होंने सिर्फ एक साल पहले प्रधानमंत्री पद सँभाला था। LDP इस समय संकट में है।

पार्टी संसद के दोनों सदनों में अपना बहुमत खो चुकी है। इशिबा के खिलाफ पार्टी के भीतर से असंतोष था, जिसके चलते उन्होंने इस्तीफा देने की घोषणा की थी। ताकाइची की जीत को पार्टी के दक्षिणपंथी (राइट-विंग) धड़े की जीत के रूप में देखा जा रहा है।

अपनी जीत के बाद ताकाइची ने कहा, “लोग सवाल कर रहे हैं कि LDP आखिर किसके लिए खड़ी है और क्या हमें जनता की मुश्किलें समझ आती हैं। पार्टी की नीतियों में अब कोई दूरदृष्टि नहीं दिख रही है।”

ताकाइची का एजेंडा: राष्ट्रवाद और सैन्य मजबूती

ताकाइची खुद को शिंजो आबे की राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी मानती हैं। आबे 2012 से 2020 तक प्रधानमंत्री रहे और 2022 में उनकी हत्या हो गई थी। ताकाइची भी उनकी तरह राष्ट्रवादी, सामाजिक रूप से रूढ़िवादी और आक्रामक आर्थिक नीतियों की समर्थक हैं। वो पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर को अपना आदर्श मानती हैं।

वह जापान की सांविधानिक pacifism (अहिंसा और युद्ध विरोध) नीति को बदलना चाहती हैं, खासकर अनुच्छेद 9 को जो कहता है कि जापान कभी युद्ध नहीं करेगा और न ही सेना रखेगा। ताकाइची चाहती हैं कि जापान की सैन्य ताकत बढ़ाई जाए ताकि वह चीन जैसे देशों से मुकाबला कर सके। वे चीन के खिलाफ सख्त रुख रखने के लिए जानी जाती हैं और ताइवान के साथ ‘अर्ध-सैन्य साझेदारी’ चाहती हैं।

(फोटो साभार: द जापान टाइम्स)

वह यासुकुनी मंदिर जाती हैं, जो जापान के युद्धकालीन सैनिकों को श्रद्धांजलि देता है, जिनमें कुछ युद्ध अपराधी भी शामिल हैं। चीन और कोरिया जैसे पड़ोसी देश इसे जापान की सैन्यवादी मानसिकता की वापसी मानते हैं। ताकाइची मानती हैं कि जापान को अब और युद्ध अपराधों के लिए माफी माँगने की जरूरत नहीं है।

सामाजिक मुद्दों पर रुख: महिलाओं और समलैंगिकों के खिलाफ

ताकाइची महिला अधिकारों और लैंगिक समानता की विरोधी मानी जाती हैं। वे शादीशुदा जोड़ों को अलग-अलग सरनेम रखने की अनुमति देने के खिलाफ हैं। वे महिलाओं को शाही परिवार की उत्तराधिकारी बनने का अधिकार देने के खिलाफ हैं। वे समलैंगिक विवाह की भी विरोधी हैं।

इसी कारण कई महिलाएँ ताकाइची की प्रधानमंत्री बनने की संभावना को महिलाओं की प्रगति के रूप में नहीं देखतीं। क्योटो की प्रोफेसर यायो ओकानो ने कहा, “ताकाइची ने महिलाओं की मुश्किलों या लैंगिक भेदभाव पर कुछ भी नहीं कहा। इससे संकेत मिलता है कि महिलाओं के लिए आने वाला समय और कठिन हो सकता है।”

अर्थव्यवस्था: खर्च बढ़ाने की नीति

आर्थिक मामलों में ताकाइची भी आबे की तरह हैं। वे सरकारी खर्च बढ़ाकर और सस्ते कर्ज के जरिए अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहती हैं। वे जापान के सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आलोचक रही हैं और मंदी से जूझ रही अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ाने की बात करती हैं, भले ही इससे घाटा बढ़े या मुद्रास्फीति हो।

हाल ही में उन्होंने उपभोग कर (Consumption Tax) घटाने की बात की थी, लेकिन चुनाव के दौरान उन्होंने इस प्रस्ताव को थोड़ा दबा दिया। अगर विपक्ष के दबाव में वह इसे दोबारा लाती हैं, तो मुद्रास्फीति, महँगाई और कमजोर येन जैसी समस्याएं आ सकती हैं।

विदेश नीति और चुनौतियाँ

ताकाइची को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी जल्दी ही निपटना होगा, जो अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में जापान आने वाले हैं। ट्रंप और इशिबा के बीच हुए व्यापार समझौते पर ताकाइची दोबारा बातचीत कर सकती हैं।

वे आव्रजन (इमिग्रेशन) के खिलाफ भी सख्त रुख रखती हैं। हाल ही में उन्होंने विदेशी पर्यटकों के व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई थी और ‘बुरे व्यवहार वाले विदेशियों’ पर कार्रवाई की बात कही थी। ताकाइची की जीत से LDP को दक्षिणपंथी वोटर्स का समर्थन फिर से मिल सकता है, लेकिन देश की राजनीति में अस्थिरता अभी बनी रह सकती है।

उनके विचार दक्षिण कोरिया, चीन और अमेरिका के साथ जापान के रिश्तों को प्रभावित कर सकते हैं। पार्टी के पास संसद में बहुमत नहीं है, इसलिए ताकाइची को कई मुद्दों पर समझौता करना होगा, जिससे उनकी आलोचना हो सकती है। दूर-दराज की दक्षिणपंथी पार्टी सान्सेइतो (Sanseito) की लोकप्रियता भी LDP को चुनौती देती रहेगी।

वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है, ताकाइची की आर्थिक नीतियाँ जोखिम भरी हो सकती हैं और जनता का भरोसा जीतने में उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ेगी।

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सौम्या सिंह
सौम्या सिंह
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