Sunday, August 1, 2021
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जैकब जुमा को सजा से भड़का दंगा- लूट, हिंसा और आगजनी के बीच भारतीय समुदाय ने उठाए हथियार: जानें क्यों बनाया गया निशाना

दक्षिण अफ्रीका में शॉपिंग सेंटर, फार्मेसियों को लूटा जा रहा है और कोरोना वायरस टीकाकरण अभियान को ठप कर दिया गया है। अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है और कुल 489 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा को इसी महीने 7 जुलाई 2021 को गिरफ्तार कर लिया गया था, जिसके बाद से वहाँ पर अराजकता औऱ दंगे के हालात हैं। देश में लूटपाट, आगजनी और हिंसा की घटनाएँ बढ़ी हैं। ऐसे में वहाँ रहने वाले भारतीय मूल के लोगों, उनके घरों व व्यवसायों को भी खतरों को सामना करना पड़ा रहा है। इन हालातों से निपटने के लिए अब वहाँ रहने वाली भारतीय समुदाय ने अपनी सुरक्षा और लुटेरों के खिलाफ जंग छेड़ दी है।

हिंसा के पीछे का मुख्य कारण

दक्षिण अफ्रीका में कभी रंगभेद की लड़ाई के अगुआ रहे जैकब जुमा को अदालती आदेश की अवहेलना करने के मामले में एस्टकोर्ट सुधार गृह में 15 महीने के लिए कैद किया गया है। कथित तौर पर उन पर 2009-2018 के बीच भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और इसी मामले की जाँच न्यायिक आयोग कर रहा था, जिसके सामने पूछताछ के लिए उन्हें उपस्थित होना था। लेकिन, जैकब जुमा आयोग के सामने उपस्थित ही नहीं हुए। इसी मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। देश की सुप्रीम कोर्ट ने जब उनकी सजा को खत्म करने से इनकार कर दिया तो इसके विऱोध में लोग सड़कों पर उतर गए। जुमा के समर्थकों ने गौतेंग, और क्वाज़ुलु-नताल (केजेडएन) प्रांतो की सड़कों पर आगजनी व हत्या जैसे अपराधों को अंजाम देने में लगे हैं।

दक्षिण अफ्रीका में शॉपिंग सेंटर, फार्मेसियों को लूटा जा रहा है और कोरोना वायरस टीकाकरण अभियान को ठप कर दिया गया है। अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है और कुल 489 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।

प्रदर्शनकारियों के इस कृत्य को लेकर दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कहा, “अब हम जो देख रहे हैं वह अपराध और अवसरवादी कृत्य हैं। लोगों के कई समूह अराजकता को केवल लूटपाट और चोरी के लिए भड़का रहे हैं। हम इन कृत्यों को अंजाम देने वाले लोगों को गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा चलाने में जरा सा भी संकोच नहीं करेंगे। साथ ही हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारा कानून इनका मजबूती से सामना करे।”

अफ्रीकन नेशनल कॉन्ग्रेस (एएनसी) ने सोमवार (12 जुलाई 2021) को बयान दिया है कि जैकब जुमा के समर्थकों के इस दंगे में सबसे ज्यादा गरीब लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ा है। पूर्व राष्ट्रपति पर वर्ष 1999 में 2 बिलियन डॉलर (करीब डेढ़ खरब रुपए) के हथियारों के सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगा था। इसके अलावा जुमा पर देश के संसाधनों के मामले में भारतीय मूल के गुप्ता परिवार के तीन भाइयों अतुल, अजय और राजेश गुप्ता की मदद करने का भी आरोप था। हालाँकि, उनके समर्थकों ने इस तरह के आरोपों से इनकार करते हुए उन्हें राजनीतिक रूप से शिकार बनाने का आरोप लगाया है।

रिपोर्ट के अनुसार, दंगाइयों से जान-माल की सुरक्षा करने के लिए देश के कई स्थानों पर आवासीय समुदायों ने सशस्त्र समूह बना लिए हैं। कथित तौर पर डरबन शहर के कई हिस्सों में नागरिकों ने अपनी सुरक्षा का जिम्मा खुद ही उठाते हुए हथियारबंद ग्रुप्स का गठन किया है। दरअसल, पुलिस बल औऱ निजी सुरक्षा बल पहले से ही अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहे हैं। ऐसे नागरिकों ने व्यवसायों की सुरक्षा करने के लिए कानून को अपने हाथ में लेना शुरू कर दिया है।

अपनी सुरक्षा के लिए भारतीयों ने खुद उठाया हथियार

रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा के गुप्ता बंधुओं के साथ जुड़ाव होने के कारण डरबन और जोहान्सबर्ग में रहने वाले भारतीय समुदायों को टारगेट किया जा रहा है। इसी तरह से एक ट्विटर हैंडल ने भारतीयों के खिलाफ दंगे को भड़काते हुए लिखा, ‘हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जैकब जुमा ने हमारे देश को इंडियन मोनोपोली कैपिटल (IMC) को बेच दिया है। यूजर्स ने दोषी गुप्ता बंधुओं की एक तस्वीर भी साझा की है।

एक अन्य ट्विटर यूजर एनिमी स्लेयर ने दक्षिण अफ्रीका के कई शहरों में अराजकता के माहौल के बीच अपनी दुकानों को लूटने से बचाने की कोशिश करते हुए भारतीयों की तस्वीरेों के विजुअल्स को शेयर किया है।

इसमें भारतीय समुदाय दंगाइयों, लुटेरों और आगजनी करने वालों को भगाने के लिए हथियारों से लैस दिख रहा है। इस मामले में दक्षिण अफ्रीका के टैक्सपेयर्स यूनियन के अध्यक्ष विलेम पेटज़र ने ट्वीट किया, “मुझे कहना होगा, आज जो कुछ भी हुआ उसे देखने के बाद मैं डरबन के भारतीय समुदाय को दूसरे नजरिए से देख रहा हूँ। इन लोगों ने हमें दिखाया है कि जब भी उन्हें खतरा होता है तो वे अपने समुदायों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार रहते हैं, चाहे कुछ भी करना पड़े।”

दूसरे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक भारतीय निजी सुरक्षाकर्मी दक्षिण अफ्रीका में दंगाइयों को भगाने की कोशिश कर रहा है।

भारतीय समुदाय के द्वारा आत्मरक्षा के लिए किए गए साहसिक कार्यों को लेकर सोशल मीडिया यूजर डेवी मालन ने ट्वीट किया, “आज रात मैं भारतीय समुदायों को कानून अपने हाथ में लेने के लिए सलाम करता हूँ।”

देश में अराजकता के माहौल पर नेटिजन्स ने राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा को आड़े हथों लिया। नेटिज़न्स ने मौजूदा राष्ट्रपति को आगजनी, लूटपाट और दंगों को रोक पाने से फेल रहने का आरोप लगाया। क्राइम स्टॉपर्स इंटरनेशनल के वीपी यूसुफ अब्रामजी ने ट्वीट किया, “राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा किसका इंतजार कर रहे हैं? क्या वे चाहते हैं कि और मॉल जलें? क्या वे और अधिक लूटपाट चाहते हैं? यह अराजकता रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। देश जल रहा है।”

इस मामले में जोहान्सबर्ग के पूर्व मेयर हरमन माशाबा ने ट्वीट किया, “दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रीय रक्षा बल को तैनात किया जा रहा है। इस गलत कार्यों को समझने में राष्ट्रपति रामफोसा को इतना अधिक समय क्यों लगा? उन्हें यह देखने में इतना समय क्यों लगा कि हमारे लोग निराशा में हैं? आज सुबह हमने जो देखा है, वह निर्णय लेने में अक्षम नेतृत्व की कीमत है!”

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने देश में हिंसा को नियंत्रित करने के लिए कुछ स्थानों पर सेना को तैनात करने का फैसला किया है। सेना के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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