Thursday, June 13, 2024
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सड़कों पर उतरे गिलगिट-बाल्टिस्तान के छात्र, कहा- गुलाम बनाना चाहती है इमरान सरकार

गिलगिट-बाल्टिस्तान समेत गुलाम कश्मीर में रहने वाले लोगों के साथ शिक्षा से लेकर हर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भेदभाव किया जाता है। इन लोगों को नागरिक अधिकारों से लेकर, समानता और मताधिकार तक की आजादी नहीं है।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के गिलगिट-बाल्टिस्तान इलाके में छात्रों ने इमरान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कराकोरम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया है। छात्रों का आरोप है कि इमरान खान की सरकार उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित कर रही है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, प्रदर्शन कर रहे छात्र यूनियन के एक नेता ने कहा, “पाकिस्तान हमारे युवाओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है। वह उन्हें गुलाम बनाना चाहता है। वह मानसिक तौर पर कमजोर लोग चाहता है। मैं कराकोरम यूनिवर्सिटी से यह बताने आया हूँ कि वे NSF (National Student Federation) को सरकार विरोधी तत्व करार देने की फिराक में हैं। छात्र सहमे हुए हैं क्योंकि उन्हें डर है कि विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने का उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ेगा।”

प्रदर्शन कर रहे एक अन्य छात्र ने कहा कि इस क्षेत्र में सिर्फ एक यूनिवर्सिटी है। शिक्षा के मामले में गिलगिट-बाल्टिस्तान काफी पिछड़ा हुआ है। उसका कहना है कि इस क्षेत्र के कई शिक्षित युवाओं को रावलपिंडी और इस्लामाबाद में विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने का मौका भी नहीं दिया गया है। ऐसी स्थिति में यहाँ के छात्रों को मजबूरन प्रोफेशनल कोर्सेस की जगह सामान्य कोर्स करना पड़ता है। उसने माँग की है कि यहाँ कम से कम एक मेडिकल और एक इंजीनियरिंग कॉलेज खोला जाए। 

बता दें कि 30 लाख से ज्यादा आबादी वाले गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र में सिर्फ एक यूनिवर्सिटी है। इस इकलौती यूनिवर्सिटी में भी प्रोफेसर्स की भारी कमी है। इस यूनिवर्सिटी में ना तो कोई प्रोफेशनल प्रोग्राम चलता है और ना ही प्रोफेसरों की पर्याप्त संख्या है। ऐसी स्थिति में छात्रों के पास इंजीनियरिंग और मेडिकल समेत तमाम प्रोफेशनल प्रोग्राम की पढ़ाई के लिए पाकिस्तान के अन्य शहरों में जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

गौरतलब है कि गिलगिट-बाल्टिस्तान समेत गुलाम कश्मीर में रहने वाले लोगों के साथ शिक्षा से लेकर हर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भेदभाव किया जाता है। इन लोगों को नागरिक अधिकारों से लेकर, समानता और मताधिकार तक की आजादी नहीं है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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