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करोड़ों का इनाम, जेल से शुरुआत… ट्रंप ने जिस आतंकी संगठन ‘ट्रेन डी अरागुआ’ को बताया ‘खून का प्यासा’, पढ़ें- मजदूर से माफिया बनने की उसकी कहानी: सरगना नीनो गुएरेरो को US ने किया ढेर

'ट्रेन डी अरागुआ' गैंग ने वेनेजुएला की जेल से निकलकर कई देशों में मौत और खौफ का जो खेल शुरू किया था, उसका अंत अब नजदीक है। इसके मुख्य सरगना नीनो गुएरेरो की मौत ने इस पूरे गैंग की कमर तोड़ दी है।

जुर्म का अंत हमेशा बुरा होता है। अपराधी चाहे कितना भी ताकतवर हो, वह बच नहीं सकता। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सीधे आदेश ने इस बात को सच साबित कर दिया है। उनके आदेश पर अमेरिकी सेना ने एक बड़ा हवाई हमला किया। इस हमले में वेनेजुएला का सबसे खूंखार गैंगस्टर नीनो गुएरेरो मारा गया है। नीनो गुएरेरो ‘ट्रेन डी अरागुआ’ नाम के खतरनाक आतंकी संगठन का मुख्य सरगना था। ट्रंप ने इस गैंग को ‘खून का प्यासा’ बताया। उसका खूनी साम्राज्य लातिन अमेरिका से लेकर अमेरिका तक फैला हुआ था। ट्रंप ने इस सफलता का खुद एलान किया। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अब दुनिया में कहीं भी इन अपराधियों के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है।

ट्रंप का सीधा आदेश और पेंटागन का बड़ा एक्शन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बड़े सैन्य ऑपरेशन की जानकारी दी। ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना के ‘साउदर्न कमांड’ ने यह हमला किया था। यह हमला बेहद तेज और जानलेवा था। इस हमले का मुख्य मकसद ‘ट्रेन डी अरागुआ’ के कुख्यात लीडर नीनो गुएरेरो को खत्म करना था। ट्रंप ने इस संगठन को धरती का सबसे क्रूर और हिंसक आतंकी गिरोह बताया है।

पेंटागन के प्रमुख पीट हेगसेथ ने भी इस हमले की पुष्टि की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसके बारे में बताया। यह हवाई हमला इसी सप्ताह की शुरुआत में किया गया था। पूरी जाँच के बाद अब साफ हो चुका है कि गुएरेरो इस हमले में मारा गया है। ट्रंप प्रशासन ने इस कार्रवाई का एक Video भी जारी किया है। इस Video में तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है।

वेनेजुएला सरकार की पुष्टि और संयुक्त खुफिया ऑपरेशन

इस खूंखार आतंकी को ढेर करने में वेनेजुएला सरकार ने भी अमेरिका का साथ दिया है। वेनेजुएला के सूचना और संचार मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया कि यह एक साझा ऑपरेशन था। सुरक्षाबलों और इस आपराधिक संगठन के बीच काफी देर तक भीषण मुठभेड़ चली। इस मुठभेड़ के दौरान ही आतंकी नीनो गुएरेरो को ‘न्यूट्रलाइज’ यानी हमेशा के लिए शांत कर दिया गया।

यह पूरा ऑपरेशन दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों की गहरी सूझबूझ का नतीजा था। इसमें आधुनिक तकनीक और हाई-टेक सपोर्ट का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। वेनेजुएला की सरकार ने बताया कि उन्होंने अमेरिका के साथ मिलकर इस खूंखार अपराधी की हर हरकत पर नजर रखी थी। इसके बाद सही मौका मिलते ही इस पर अंतिम प्रहार किया गया।

न्यूयॉर्क कोर्ट में काला चिट्ठा और 41 करोड़ का इनाम

नीनो गुएरेरो लंबे समय से अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के निशाने पर था। पिछले साल दिसंबर में न्यूयॉर्क की एक फेडरल कोर्ट में उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में चार्जशीट दाखिल की गई थी। उस पर नार्को-आतंकवाद, जबरन वसूली, हत्या की साजिश और आतंकियों को हथियार और पैसा सप्लाई करने जैसे दर्जनों संगीन मामले दर्ज थे। वह एक दशक से ज्यादा समय से इन वारदातों को अंजाम दे रहा था।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने गुएरेरो की गिरफ्तारी या उसके बारे में सही जानकारी देने वाले को 50 लाख डॉलर का इनाम देने का ऐलान किया था। भारतीय रुपयों में यह रकम करीब 41 करोड़ रुपए बैठती है। अमेरिकी वकीलों के मुताबिक, नीनो गुएरेरो का यह गैंग (खून का प्यासा) पूरे उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और यूरोप के कई देशों में अनगिनत हत्याओं और ड्रग्स की तस्करी के लिए जिम्मेदार था।

जेल से चला साम्राज्य और ‘डॉन’ का जन्म (2013)

इस खूंखार गैंग ‘ट्रेन डी अरागुआ’ की शुरुआत साल 2005 में एक मजदूर संगठन के रूप में हुई थी। वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज के राज में एक रेलवे लाइन का निर्माण हो रहा था। इस प्रोजेक्ट में काम करने वाले मजदूरों ने मिलकर एक यूनियन बनाई। लेकिन जल्द ही इन मजदूरों के मन में लालच आ गया। उन्होंने ठेकेदारों को डराना और उनसे पैसे ऐंठना शुरू कर दिया। साल 2011 में जब सरकार ने यह रेलवे प्रोजेक्ट बंद किया, तो वो मजदूर पूरी तरह एक क्रिमिनल गैंग बन चुके थे। नाम पड़ा- ‘ट्रेन डी अरागुआ’ (अरागुआ की ट्रेन)।

साल 2013 में इस गैंग की कमान मिली हेक्टर रस्टेनफोर्ड गुएरेरो उर्फ नीनो गुएरेरो को। नीनो वेनेजुएला की सबसे बदनाम ‘तोकोरॉन जेल’ (Tocorón Prison) में बंद था। लेकिन वह मामूली कैदी नहीं था, वह वहाँ का ‘प्रान’ (जेल का डॉन) बन गया। उसने जेल के अंदर ही ऐश-ओ-आराम का महल बनाया। वहीं बैठे-बैठे उसने पूरे देश में ड्रग्स, जबरन वसूली और इंसानों की तस्करी का धंधा फैला दिया।

मजबूरी का फायदा और सरहदें पार

साल 2015 में वेनेजुएला में भयंकर गरीबी और भुखमरी फैल गई। लाखों लोग देश छोड़कर भागने लगे। नीनो गुएरेरो ने इस मजबूरी को धंधा बना लिया। उसके गैंग ने बॉर्डर पर कब्जा किया और भागने वाले गरीबों से टैक्स वसूलने लगे। इतना ही नहीं, इस गैंग के शातिर अपराधी आम शरणार्थियों के भेष में कोलंबिया, पेरू, चिली और अमेरिका जैसे देशों में घुस गए।

इन देशों में जाकर उन्होंने वेनेजुएला के ही प्रवासियों को अपना शिकार बनाना शुरू किया। उन्होंने वहाँ महिलाओं की तस्करी की और छोटे स्तर पर ड्रग्स बेचने का धंधा शुरू कर दिया। लातिन अमेरिका की पुलिस के मुताबिक, इस गैंग ने कई देशों में अपनी परमानेंट सेल (गुप्त ठिकाने) बना ली थीं।

चिली में पूर्व सैन्य अधिकारी की हत्या से मचा था हड़कंप

‘ट्रेन डी अरागुआ’ गैंग अपनी बेरहमी और खौफनाक हत्याओं के लिए जाना जाता है। मार्च 2023 में इस गैंग ने चिली में एक ऐसी वारदात को अंजाम दिया, जिससे दो देशों के बीच तनाव बढ़ गया। गैंग के शूटरों ने वेनेजुएला की सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट और सरकार के विरोधी रोनाल्ड ओजेडा का अपहरण कर लिया। इसके बाद उनकी बेहद क्रूरता से हत्या कर दी गई।

यह गैंग पनामा से लेकर ब्राजील तक फैल चुका था। अपहरण, मनी लॉन्ड्रिंग, सुपारी लेकर हत्या करना और बड़े-बड़े मॉल में डकैती डालना इनका रोज का काम था। साल 2023 में जब वेनेजुएला की सेना ने इनकी तोकोरॉन जेल पर धावा बोला, तो गुएरेरो जेल के नीचे बनी एक गुप्त सुरंग से अपने साथियों के साथ भाग निकला था। तब से वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था।

अमेरिका के ऑरोरा में घुसपैठ और ट्रंप का चुनावी मुद्दा

पिछले साल अगस्त में अमेरिका के कोलोराडो राज्य के ऑरोरा शहर से एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में कुछ हथियारबंद वेनेजुएला के प्रवासी एक अपार्टमेंट की बिल्डिंग में जबरन घुसते दिखे थे। इस घटना के बाद वहाँ के मकान मालिक और नेताओं ने दावा किया कि ‘ट्रेन डी अरागुआ’ गैंग ने अमेरिका की सोसायटियों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे को बहुत जोर-शोर से उठाया था। उन्होंने ऑरोरा शहर में एक बड़ी रैली की थी और मंच पर इन अपराधियों के पोस्टर लगाए थे। ट्रंप ने अमेरिकी जनता से वादा किया था कि वह राष्ट्रपति बनते ही देश में अवैध रूप से रह रहे इन अपराधियों को तुरंत बाहर निकालेंगे। ट्रंप की इस आक्रामक नीति को जनता का भारी समर्थन मिला था।

राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से कनेक्शन और अमेरिकी सेना का एक्शन

राष्ट्रपति ट्रंप का हमेशा से आरोप रहा है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने जानबूझकर अपने देश के कैदियों को अमेरिका भेजा ताकि वहाँ अपराध बढ़ सके। हालाँकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक रिपोर्ट में इस बात के सीधे सबूत नहीं मिले थे। इसके बावजूद, अमेरिकी सेना ने इसी साल जनवरी में एक बेहद गुप्त ऑपरेशन चलाकर निकोलस मादुरो को वेनेजुएला से उठा लिया था। मादुरो पर फिलहाल अमेरिका में नार्को-आतंकवाद का केस चल रहा है।

अदालत में पेश की गई नई चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि मादुरो सरकार और नीनो गुएरेरो का गैंग आपस में मिलकर काम कर रहे थे। वे मिलकर ड्रग्स के धंधे से मोटा मुनाफा कमा रहे थे। ट्रंप ने गुएरेरो की मौत पर कहा कि जो बाइडेन की कमजोर नीतियों के कारण अमेरिका की सीमाएं असुरक्षित हो गई थीं। लेकिन अब उनकी सरकार इन राक्षसों को चुन-चुनकर खत्म कर रही है।

जोसलीन और लेकन रीली की मौत का लिया बदला

अमेरिका में अवैध प्रवासियों द्वारा की गई कुछ हत्याओं ने पूरे देश को नाराज कर दिया था। 12 साल की मासूम बच्ची जोसलीन नुंगारे और 22 साल की छात्रा लेकन रीली की बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों ने हत्या कर दी थी। ट्रंप ने नीनो गुएरेरो की मौत का ऐलान करते हुए इन दोनों बच्चियों का विशेष रूप से नाम लिया।

ट्रंप ने अपने बयान में लिखा कि अमेरिकी सेना ने इन मासूम बच्चियों और उनके परिवारों के साथ पूरा न्याय किया है। इस खूंखार गैंग के सरगना को मारकर सेना ने उनकी मौतों का बदला ले लिया है। ट्रंप ने साफ किया कि उनके राज में अपराधियों को कोई माफी नहीं मिलेगी और अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा।

‘एलियन एनिमीज एक्ट’ और मास डिपोर्टेशन की तैयारी

डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही ‘ट्रेन डी अरागुआ’ को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था। उन्होंने देश के 200 साल पुराने ‘एलियन एनिमीज एक्ट’ का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। यह कानून सरकार को यह ताकत देता है कि वह किसी भी संदिग्ध विदेशी नागरिक को बिना किसी अदालती सुनवाई के तुरंत गिरफ्तार करके देश से बाहर निकाल सकती है।

अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि यह गैंग कोई मामूली चोर-उचक्कों का ग्रुप नहीं है, बल्कि यह एक हमलावर विदेशी सेना की तरह है। ट्रंप सरकार ने इस गैंग के कई संदिग्ध सदस्यों को बिना कोर्ट की मंजूरी के अल साल्वाडोर की सबसे खतरनाक ‘सेकोट जेल’ में भेजना शुरू कर दिया था। हालांकि अदालतों ने इस पर कुछ पाबंदियां लगाई हैं, लेकिन सरकार अपनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

मैक्सिकन कार्टेल्स के सामने कमजोर था यह गैंग

भले ही अमेरिका में इस गैंग को लेकर काफी डर का माहौल बनाया गया हो, लेकिन खोजी संस्था ‘इनसाइट क्राइम’ की रिपोर्ट कुछ और ही कहानी कहती है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, ‘ट्रेन डी अरागुआ’ गैंग अमेरिका के अंदर उतना मजबूत नहीं है। अमेरिका के ड्रग मार्केट पर पहले से ही मैक्सिको के बेहद खतरनाक ‘सिनालोआ कार्टेल’ और ‘जालिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल’ का पूरी तरह कब्जा है।

वेनेजुएला का यह गैंग मैक्सिकन कार्टेल्स के सामने बहुत छोटा और कमजोर है। अमेरिकी सीमा पर इस गैंग के गुर्गे खुद को बचाने के लिए मैक्सिकन माफियाओं के लिए छोटे-मोटे काम करते हैं। अमेरिकी गृह मंत्रालय के अनुसार, पूरे अमेरिका में इस गैंग के केवल 600 के करीब एक्टिव मेंबर्स हैं। यह संख्या अमेरिका में रहने वाले 7 लाख अच्छे और शांतिप्रिय वेनेजुएला के प्रवासियों का बहुत छोटा हिस्सा है।

इस बड़े सैन्य एक्शन का आगे क्या असर होगा?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बड़े और आक्रामक कदम ने दुनिया भर के अपराधियों को हिलाकर रख दिया है। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि वे इन क्रूर हत्यारों और ड्रग तस्करों को दुनिया के किसी भी कोने से ढूँढ निकालेंगे। अमेरिकी साउदर्न कमांड का यह एक्शन दिखाता है कि अमेरिका अब अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। ‘ट्रेन डी अरागुआ’ गैंग ने वेनेजुएला की जेल से निकलकर कई देशों में मौत और खौफ का जो खेल शुरू किया था, उसका अंत अब नजदीक है। इसके मुख्य सरगना नीनो गुएरेरो की मौत ने इस पूरे गैंग की कमर तोड़ दी है।

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