Thursday, October 28, 2021
Homeविविध विषयअन्यजामिया मिलिया इस्लामिया ग़रीबों को नहीं देगा 10% आरक्षण

जामिया मिलिया इस्लामिया ग़रीबों को नहीं देगा 10% आरक्षण

"चूँकि हम एक अल्पसंख्यक संस्थान हैं, हमारे यहाँ EWS कोटा लागू नहीं होगा। यूजीसी ने पहले ही कहा है कि कुछ संस्थान और अल्पसंख्यक संस्थान इस नई प्रणाली के तहत नहीं आएँगे। जामिया ने ओबीसी विस्तार कोटा भी लागू नहीं किया था।"

जामिया मिलिया इस्लामिया ने अपने ‘अल्पसंख्यक दर्जे’ का हवाला देते हुए आर्थिक रूप से विपन्न (EWS) कोटे के छात्रों को 10% आरक्षण देने से इनकार कर दिया है। सोमवार (फरवरी 4, 2019) को विश्वविद्यालय के अकादमिक परिषद की बैठक में फ़ैसला लिया गया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को अपनी सीट मैट्रिक्स संबंधी आवश्यकताओं और बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों का विवरण नहीं भेजा जाएगा।

बता दें कि 17 जनवरी को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रीय शैक्षिक संस्थानों को 2019-20 सत्र से ईडब्ल्यूएस कोटा लागू करने के लिए कहा था। संस्थानों को 31 जनवरी तक संभावित वित्तीय आवश्यकताओं के साथ कोर्स के अनुसार सीट मैट्रिक्स प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। जेएनयू ने इसे 1 फरवरी को भेजा, जबकि डीयू अभी भी अपने कॉलेजों के डेटा की जाँच करने में जुटा हुआ है।

जामिया मिलिया के एक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा:

“चूँकि हम एक अल्पसंख्यक संस्थान हैं, हमारे यहाँ EWS कोटा लागू नहीं होगा। यूजीसी ने पहले ही कहा है कि कुछ संस्थान और अल्पसंख्यक संस्थान इस नई प्रणाली के तहत नहीं आएँगे। जामिया ने ओबीसी विस्तार कोटा भी लागू नहीं किया था।”

ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों, उनसे सम्बद्ध कॉलेजों एवं केंद्र द्वारा वित्त पोषित डीम्ड विश्वविद्यालयों को इस आरक्षण व्यवस्था को लागू करने के लिए बजट की ज़रूरतों के बारे में पूछा था। उनसे EWS आरक्षण व्यवस्था को तुरंत लागू करने को कहा है। देश के सभी उच्च शैक्षणिक संस्थानों में 10% आरक्षण 2019-20 सत्र से ही लागू हो जाएगा।

सामान्य वर्ग के ग़रीबों को 10% आरक्षण संबंधी विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा में भारी बहुमत से पारित किया गया था। इसके बाद इस विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करने के साथ ही इसने क़ानून का रूप ले लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ऐतिहासिक विधेयक बताते हुए प्रशंसा की थी।

 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बॉम्बे हाईकोर्ट से आर्यन खान, मुनमुन और अरबाज को मिली बेल, जानिए कब तक आएँगे जेल से बाहर

बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगातार तीन दिन की सुनवाई के बाद आर्यन खान को जमानत दी है। अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा को भी जमानत दी गई है।

‘वर्ल्ड कप में ये ड्रामे होते हैं, दिखावे की जरूरत नहीं’: क्विंटन डिकॉक ने डिटेल में बताया क्यों नहीं टेका घुटना

डिकॉक ने बयान में कहा कि जब भी सब वर्ल्ड कप में जाते हैं तो ऐसा कोई न कोई ड्रामा होता ही है। ये चीजें अच्छी बात नहीं है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
132,529FollowersFollow
412,000SubscribersSubscribe