Friday, December 3, 2021
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J&K पर दुष्प्रचार को लेकर अमेरिका में ही घिरा वाशिंगटन पोस्ट, कश्मीरी पंडितों ने किया प्रदर्शन

अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से वाशिंगटन में एकत्रित हुए कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए फैसले को साहसिक और ऐतिहासिक कदम बताते हुए उनके समर्थन में नारे लगाए।

जम्मू-कश्मीर को लेकर विदेश मीडिया की भ्रामक रिपोर्टिंग को सरकार कई बार खारिज कर चुकी है। अब इस कारण से अमेरिका में वाशिंगटन पोस्ट के खिलाफ आवाज उठने लगी है। कश्मीरी पंडितों के एक समूह ने अमेरिकी दैनिक द वाशिंगटन पोस्ट में पिछले कुछ दिनों से प्रकाशित होने वाली खबरों का विरोध किया है। दुनियाभर में समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा (जीकेपीडी) ने इसके विरोध में आमेरिका में द वाशिंगटन पोस्ट के कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया।

उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए के निष्क्रिय हो जाने के बाद से अखबार लगातार एकतरफा और भेदभावपूर्ण खबरें प्रकाशित कर रहा है। उन्होंने अखबार पर पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाते हुए कहा, “वाशिंगटन पोस्ट मीडिया की खबरों में कहीं यह जिक्र नहीं है कि इस अराजक राज्य में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ सबसे जघन्य नरसंहार हुआ जिससे उन्हें निर्वासित होना पड़ा।”

कश्मीरी पंडितों ने वाशिंगटन पोस्ट को दिए एक ज्ञापन में कहा कि उनकी खबरों में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए से हुई कानूनी अराजकता का कोई जिक्र नहीं किया गया है। अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से वाशिंगटन में एकत्रित हुए कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए फैसले को साहसिक और ऐतिहासिक कदम बताते हुए उनके समर्थन में नारे लगाए और प्रदर्शन के आयोजक ने अखबार पर आरोप लगाया कि वाशिंगटन पोस्ट मीडिया की खबरों में कहीं इसकी बात का उल्लेख नहीं किया गया है कि इस राज्य में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ सबसे जघन्य नरसंहार हुआ था, जिसकी वजह से उन्हें निर्वासित होना पड़ा था।

रैली के मुख्य संयोजक मोहन सप्रू ने कहा, “वॉशिंगटन पोस्ट की पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग में इस सच को नजरअंदाज किया गया कि अनुच्छेद 370 और 35ए के कारण अल्पसंख्यक, महिलाएँ और समाज के कमजोर वर्ग के लोग लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रहे जबकि कश्मीर घाटी काबू से बाहर भ्रष्टाचार, अलगावववाद की जमीन बन गई।”

वहीं, वाशिंगटन पोस्ट की खबरों को न्यायसंगत ठहराते हुए विदेशी खबरों के संपादक डगलस जेह्ल ने कश्मीर पर फैसले के बाद अखबार में छपी खबरों को निष्पक्ष, सटीक और व्यापक बताया। बता दें कि, कश्मीरी पंडित के प्रदर्शन के विरोध और वाशिंगटन पोस्ट के समर्थन में पाकिस्तानी अमेरिकियों, अलगाववादी कश्मीरियों और अलगाववादी खालिस्तानियों के एक समूह ने मूक प्रदर्शन किया। कुछ पाकिस्तानी समर्थक प्रदर्शनकारियों ने भारतीय पत्रकारों को उनके प्रदर्शन को कवर करने से भी रोका। साथ ही अमेरिकी मुस्लिमों के एक समूह ने वाशिंगटन में भारतीय दूतावास के सामने प्रदर्शन किए। 

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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