Homeरिपोर्टमीडिया'गिरती TRP से बौखलाए ABP पत्रकार': रिपब्लिक टीवी के रिपोर्टर चुनाव विश्लेषक प्रदीप भंडारी...

‘गिरती TRP से बौखलाए ABP पत्रकार’: रिपब्लिक टीवी के रिपोर्टर चुनाव विश्लेषक प्रदीप भंडारी को मारा थप्पड़

"जानते है महाराष्ट्र में सच बोलने की क़ीमत क्या है? कार्टेल के नामी-गिरामी चेहरे जैसे-जैसे एक्सपोज़ हो रहे है, उनका ग़ुस्सा और बढ़ता जा रहा है। जब पुलिस से भी काम नहीं बना तो आज NDTV और ABP के गुंडे पत्रकारों को मेरे पास हाथपाई करने भेज दिया। लेकिन मैं टूटने वालों में से नहीं हूँ।"

महाराष्ट्र के मुंबई से रिपोर्टिंग करते हुए रिपब्लिक टीवी के पत्रकार और चुनाव विश्लेषक प्रदीप भंडारी को एबीपी के पत्रकार मनोज वर्मा ने थप्पड़ जड़ दिया।

ऑपइंडिया से बात करते हुए भंडारी ने कहा कि ABP के रिपोर्टर मनोज वर्मा ने उनके चश्मे और फोन को भी तोड़ दिया। उन्होंने कहा, “वे गुंडे की तरह हैं।”

भंडारी ने कहा, “मुझे ड्रग्स से संबंधित प्रश्न पूछने के लिए मुक्का मारा गया था। हो सकता है कि उनकी गिरती हुई टीआरपी के कारण यह गुस्सा मुझ पर फूटा है, जो कि मात्र 14 है। ये सभी दलाल है, जोकि सवाल नहीं पूछते हैं। इतना ही नहीं मुंबई पुलिस ने भी मुझसे धीरे बोलने को कहा।”

प्रदीप भंडारी ने घटना के बारे में ट्वीटर पर भी बताते हुए कहा, “जानते है महाराष्ट्र में सच बोलने की क़ीमत क्या है? कार्टेल के नामी-गिरामी चेहरे जैसे-जैसे एक्सपोज़ हो रहे है, उनका ग़ुस्सा और बढ़ता जा रहा है। जब पुलिस से भी काम नहीं बना तो आज NDTV और ABP के गुंडे पत्रकारों को मेरे पास हाथपाई करने भेज दिया। लेकिन मैं टूटने वालों में से नहीं हूँ।”

भंडारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के पास मुंबई में बॉलीवुड ड्रग एब्यूज स्कैण्डल को कवर कर रहे थे, उसी दौरान एबीपी न्यूज के पत्रकार ने उनसे हाथापाई की।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -