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लोनी केस में राणा अय्यूब को बॉम्बे HC ने दी 4 हफ्तों की अग्रिम जमानत, कोर्ट को बताया- अभी हुई है स्पाइनल सर्जरी

"हालाँकि, अभी जाँच संबंधित पुलिस द्वारा की जा रही है और संबंधित अदालत निष्कर्षों के आधार पर मामले से निपटेगी। लेकिन, आवेदक को न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए, 4 सप्ताह की अस्थाई अवधि दी जा सकती है।"

गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग की पिटाई वाले प्रकरण में बिन तथ्यों को जाने ट्वीट करने के बाद यूपी पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर मामले में पत्रकार राणा अय्यूब को कोर्ट से 4 सप्ताह के लिए ट्रांजिट अंतरिम जमानत मिली है।

बार एंड बेंच के ट्वीट के अनुसार, “गाजियाबाद मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने राणा अय्यूब को गिरफ्तारी से 4 हफ्तों की अंतरिम राहत दी।”

कोर्ट के आदेश में कहा गया, “हालाँकि, अभी जाँच संबंधित पुलिस द्वारा की जा रही है और संबंधित अदालत निष्कर्षों के आधार पर मामले से निपटेगी। लेकिन, आवेदक को न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए, 4 सप्ताह की अस्थाई अवधि दी जा सकती है।”

बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस पीडी नायक की पीठ के सामने अय्यूब का मामला वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई ने पेश किया। इस मामले में एफआईआर 15 जून को दायर हुई थी। यूपी पुलिस ने इस केस को धारा 153, 153ए, 295ए, 505 और 120 बी के तहत दायर किया था।

कोर्ट के सामने पेश हुए अय्यूब के वकील ने बताया कि जो एफआईआर में लगाए गए आरोपों हैं उन पर 3 साल की सजा है। कोर्ट को उन्होंने ये भी बताया कि जैसे ही मामले में उन्हे ताबीज वाली बातें पता चलीं उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

मालूम हो कि गिरफ्तारी से राहत माँगते हुए राणा अय्यूब के वकील की ओर से तर्क दिया गया कि आवेदक एक पत्रकार हैं। वह तहलका की एडिटर रही हैं और उन्हें पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए संस्कृति अवार्ड दिया गया। इसके अलावा उन्हें कई और अवार्ड भी मिले हैं।

इसके बाद कोर्ट ने सारी बातें सुनकर उनके पूछा कि वह अंतरिम राहत कितने समय की चाहते हैं। देसाई ने जवाब दिया कि सिर्फ 3-4 हफ्ते की, क्योंकि राणा की स्पाइनल सर्जरी हुई है और उनके रीढ़ में अभी दर्द है। कोर्ट ने अंत में आदेश सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को एक या ज्यादा जमानत के लिए 25000 रुपए के पीआर बांड पर रिहा किया जाएगा। यह 4 सप्ताह की अवधि के लिए है।

उल्लेखनीय है कि गाजियाबाद में अब्दुल नाम के बुजुर्ग की पिटाई मामले में सोशल मीडिया पर झूठ फैलाने के लिए यूपी पुलिस ने अय्यूब के अलावा 8 के विरुद्ध एफआईआर की थी। इस संबंध में ट्विटर पर भी केस दर्ज हुआ था। वहीं द वायर, मोहम्मद जुबैर, सबा नकवी, सलमान निजामी का नाम भी इसमें शामिल था

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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