Tuesday, June 15, 2021
Home रिपोर्ट मीडिया 'हैकरमैन अर्थशास्त्री' ने दी नोट छापकर जनता में बाँटने की राय, मैग्सेसे विजेता ने...

‘हैकरमैन अर्थशास्त्री’ ने दी नोट छापकर जनता में बाँटने की राय, मैग्सेसे विजेता ने कहा- सहमत दद्दा

असल में, नोट छापने और उसे लोगों में बाँट देने की यह सारी चर्चा सरकार द्वारा RBI से लिए गए 1.76 लाख करोड़ रुपए लाभाँश और सरप्लस पूँजी के तौर पर देने के बाद चालू हुई है। इसलिए रवीश कुमार का फर्ज तो बनता ही है कि वो इस फैसले को सनसनी बनाकर अपनी प्रासंगिकता जनता के बीच कायम रख सकें।

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा गरम है। इसी बीच खुदको पत्रकार मानने वाले अनिंद्यों चक्रवर्ती और एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के बीच अर्थव्यवस्था पर एक गहरी चर्चा सामने आई है जिसमें वो अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए कुछ ‘अचूक उपाय’ एक दूसरे से साझा करते हुए नजर आ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस वीडियो क्लिप में पत्रकार अनिंद्यो चक्रवर्ती रवीश कुमार को समझा रहे हैं कि यदि सरकार खूब सारे रुपए छापकर जनता में बाँट दे तो अर्थव्यवस्था तुरंत ठीक हो सकती है। इस पर रवीश कुमार भी अपनी सहमति दर्ज कराते नजर आए रहे हैं। बता दें कि हाल ही में रवीश कुमार को प्रतिष्ठित रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

इस वार्ता में अनिंद्यो चक्रवर्ती कह रहे हैं- “सरकार को खुदको एक परिवार के रूप में सोचना चाहिए। जैसे एक परिवार को उतना ही खर्चा करना चाहिए, जितनी कि उस परिवार की आय है।” इसके बाद बेहद गंभीर हाव-भाव में अनिंद्यो चक्रवर्ती कहते हैं – “लेकिन परिवार नोट नहीं छापती (नोट नहीं छापता) है ना, सरकार तो नोट छापती है। इसलिए सरकार को सिर्फ नोट छापने चाहिए। ज्यादातर अर्थशास्त्री आपसे कहेंगे कि इससे कुछ नहीं होता। जी होता है।”

इसके बाद महान अर्थशास्त्री अनिंद्यो चक्रवर्ती एक उदाहरण के द्वारा इस तर्क को साबित करते हुए कहते हैं- “गाड़ी बनाने की फैक्ट्री बंद हैं क्योंकि लोगों के पास पैसे नहीं हैं खरीदने के लिए।”

इसके बाद अनिंद्यो चक्रवर्ती कालजयी बात कहते हैं- “अगर सरकार लोगों के हाथ में जाकर नोट छापकर पैसे दे दे तो वो जाकर खरीदेंगे।”

अनिंद्यो चक्रवर्ती के इस कालजयी बयान के बाद रवीश कुमार मंद-मंद मुस्कराते हुए अपनी सहमति जताते हुए कहते हैं- “कमाल है।”

अनिंद्यो चक्रवर्ती इसके बाद अपनी राय आगे रखते हुए हाथ झटकते हुए कहते हैं कि लोग इसका मतलब यह लगा लगा लेते हैं कि लोगों के हाथ में पैसे दे देने से महँगाई बढ़ जाएगी, जबकि कभी-कभी ऐसा होता है कि जब आप लोगों के हाथ में पैसे देते हैं, तो दाम बढ़ते नहीं बल्कि घटते हैं। रवीश कुमार यह सब सुनने के बाद अपने परिचित अंदाज में कहते सुने जा सकते हैं- “हम्म्म।”

हालाँकि, महान अर्थशास्त्री अनिंद्यो चक्रवर्ती शायद ये बात न जानते हों लेकिन सत्यान्वेषी पत्रकार रवीश कुमार इस बात पर कई बार ब्लॉग लिख चुके हैं। आखिरी बार उन्होंने नोट की छपाई पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सम्बन्धित एक लेख लिखा था। जिसे पढ़ने के बाद मैं यह मानकर चल रहा हूँ कि शायद वे जानते होंगे कि नोट कि छपाई उतनी आसान नहीं है जितनी गंभीरता से अनिंद्यो चक्रवर्ती के साथ मिलकर वो आज इस पर सहमति जता रहे हैं।

रवीश द्वारा ही लिखा गया एक ब्लॉग NDTV की वेबसाइट पर प्रकाशित है। हालाँकि, ब्लॉग किसने और कब लिखा यह रहस्य है लेकिन लेख की भाषाशैली, अनुभव का जिक्र और दिए गए Tag यही बताते हैं कि यह अनुभव रवीश कुमार ने ही लिखा है।

इस पूरे लेख में रवीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जालसाजी से बचने के लिए भारत में ही नोट छापने की बात को ‘सुखद अनुभव’ बताते हुए नोट छपाई की पूरी प्रक्रिया के बारे में लिखा है। इसलिए मैं मानकर चल रहा हूँ कि यह वार्ता और रवीश द्वारा जताई गई सारी सहमति मात्र ‘महान अर्थशास्त्री’ अनिंद्यो चक्रवर्ती का मन रखने भर के लिए ही रही होगी। वरना नोट छापकर उन्हें जनता में बाँट देने के के फायदे और नुकसान हो सकते हैं, यह रवीश कुमार ने अपने ब्लॉग में खूब समझाया है।

दूसरी बात यह भी हो सकती है कि रवीश कुमार ने यह ब्लॉग साल 2014 में चुनाव परिणाम के कुछ ही दिन बाद लिखा होगा। हालाँकि, इससे असहमत होने के लिए उनके हर लेख के अंत में एक अस्वीकरण हमेशा रहता ही है कि इस लेख की जिम्मेदारी किसी की भी नहीं है।

असल में, नोट छापने और उसे लोगों में बाँट देने की यह सारी चर्चा सरकार द्वारा RBI से लिए गए 1.76 लाख करोड़ रुपए लाभाँश और सरप्लस पूँजी के तौर पर देने के बाद चालू हुई है। इसलिए रवीश कुमार का फर्ज तो बनता ही है कि वो इस फैसले को सनसनी बनाकर अपनी प्रासंगिकता जनता के बीच कायम रख सकें। इसीलिए तो सुप्रीम कोर्ट भी आजकल ‘पीत पत्रकारिता अवार्ड‘ बाँट रही है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘राजदंड कैसा होना चाहिए, महाराज ने दिखा दिया’: लोनी घटना के ट्वीट पर नहीं लगा ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ टैग, ट्विटर सहित 8 पर FIR

"लोनी घटना के बाद आए ट्विट्स के मद्देनजर योगी सरकार ने ट्विटर के विरुद्ध मुकदमा दायर किया है और कहा है कि ट्विटर ऐसे ट्वीट पर मैनिपुलेटेड मीडिया का टैग नहीं लगा पाया। राजदंड कैसा होना चाहिए, महाराज ने दिखा दिया है।"

आप और कॉन्ग्रेस के झूठ की खुली पूरी तरह पोल, श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने भूमि सौदों पर जारी किया विस्तृत स्पष्टीकरण

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्ष एक गैर जरूरी मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है। राम मंदिर के निर्माण में बाधाएँ पैदा करने के लिए कई राजनीतिक दल घटिया राजनीति कर रहे हैं।

राहुल गाँधी का ‘बकवास’ ट्वीट देख भड़के CM योगी, दिया करारा जवाब, कहा- ‘सच आपने कभी बोला नहीं, जहर फैलाने में लगे हैं’

राहुल गाँधी ने ट्वीट में लिखा था, “मैं ये मानने को तैयार नहीं हूँ कि श्रीराम के सच्चे भक्त ऐसा कर सकते हैं। ऐसी क्रूरता मानवता से कोसों दूर है और समाज व धर्म दोनों के लिए शर्मनाक है।"

पाठकों तक हमारी पहुँच को रोक रही फेसबुक, मनमाने नियमों को थोप रही… लेकिन हम लड़ेंगे: ऑपइंडिया एडिटर-इन-चीफ का लेटर

हमें लगता है कि जिस ताकत का सामना हमें करना पड़ रहा है, वह लगभग हर हफ्ते हम पर पूरी ताकत के साथ हमला बोलती है। हम लड़ेंगे। लेकिन हम अपनी मर्यादा के साथ लड़ेंगे और अपने सम्मान को बरकरार रखेंगे।

‘जो मस्जिद शहीद कर रहे, उसी के हाथों बिक गए, 20 दिलवा दूँगा- इज्जत बचा लो’: सपा सांसद ST हसन का ऑडियो वायरल

10 मिनट 34 सेकंड के इस ऑडियो में सांसद डॉ. एस.टी. हसन कह रहे हैं, "तुम मुझे बेवकूफ समझ रहे हो या तुम अधिक चालाक हो... अगर तुम बिक गए हो तो बताया क्यों नहीं कि मैं भी बिक गया।

सूना पड़ा प्रोपेगेंडा का फिल्मी टेम्पलेट! या खुदा शर्मिंदा होने का एक अदद मौका तो दे 

कितने प्यारे दिन थे जब हर दस-पंद्रह दिन में एक बार शर्मिंदा हो लेते थे। जब मन कहता नारे लगा लेते। धमकी दे लेते थे कि टुकड़े होकर रहेंगे, इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह।

प्रचलित ख़बरें

राम मंदिर में अड़ंगा डालने में लगी AAP, ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश: जानिए, ‘जमीन घोटाले’ की हकीकत

राम मंदिर जजमेंट और योगी सरकार द्वारा कई विकास परियोजनाओं की घोषणाओं के कारण 2 साल में अयोध्या में जमीन के दाम बढ़े हैं। जानिए क्यों निराधार हैं संजय सिंह के आरोप।

‘हिंदुओं को 1 सेकेंड के लिए भी खुश नहीं देख सकता’: वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप से पहले घृणा की बैटिंग

भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने कहा कि जीते कोई भी, लेकिन ये ट्वीट ये बताता है कि इस व्यक्ति की सोच कितनी तुच्छ और घृणास्पद है।

सिख विधवा के पति का दोस्त था महफूज, सहारा देने के नाम पर धर्मांतरण करा किया निकाह; दो बेटों का भी करा दिया खतना

रामपुर जिले के बेरुआ गाँव के महफूज ने एक सिख महिला की पति की मौत के बाद सहारा देने के नाम पर धर्मांतरण कर उसके साथ निकाह कर लिया।

केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिर होने वाली थी पिटाई? लोगों से पहले ही उतरवा लिए गए जूते-चप्पल: रिपोर्ट

केजरीवाल पर हमले की घटनाएँ कोई नई बात नहीं है और उन्हें थप्पड़ मारने के अलावा स्याही, मिर्ची पाउडर और जूते-चप्पल फेंकने की घटनाएँ भी सामने आ चुकी हैं।

6 साल के पोते के सामने 60 साल की दादी को चारपाई से बाँधा, TMC के गुंडों ने किया रेप: बंगाल हिंसा की पीड़िताओं...

बंगाल हिंसा की गैंगरेप पीड़िताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बताया है कि किस तरह टीएमसी के गुंडों ने उन्हें प्रताड़ित किया।

‘मुस्लिम बुजुर्ग को पीटा-दाढ़ी काटी, बुलवाया जय श्री राम’: आरोपितों में आरिफ, आदिल और मुशाहिद भी, ज़ुबैर-ओवैसी ने छिपाया

ओवैसी ने लिखा कि मुस्लिमों की प्रतिष्ठा 'हिंदूवादी गुंडों' द्वारा छीनी जा रहीहै । इसी तरह ज़ुबैर ने भी इस खबर को शेयर कर झूठ फैलाया।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
104,061FollowersFollow
392,000SubscribersSubscribe