Wednesday, November 25, 2020
Home रिपोर्ट मीडिया इराक में मारा गया सद्दाम... और कट्टरपंथियों ने बेंगलुरु में मचाई थी तबाही: कॉन्ग्रेस...

इराक में मारा गया सद्दाम… और कट्टरपंथियों ने बेंगलुरु में मचाई थी तबाही: कॉन्ग्रेस नेता सीके शरीफ़ ने की थी हिंसा की अगुवाई

अब सवाल यह उठता है कि 19 जनवरी को हुई हिंसा की सीधी कवरेज कहाँ है? अगर यह आपको मिलती है तो मैं उसे ज़रूर पढ़ना पसंद करूँगा। क्या भारतीय मीडिया ऐसी घटनाओं पर रिपोर्ट करने के पहले “हिंदू एंगल” खोजती है। असल मायनों में यही

फरवरी के दौरान दिल्ली में हुआ, अगस्त में ठीक वही बेंगलुरु में हुआ। 11 अगस्त की रात जब बेंगलुरु जल रहा था तब भारत की धर्म निरपेक्ष आबादी उर्दू शायर को याद कर रही थी। निशाने पर था कॉन्ग्रेस विधायक। इस पार्टी ने सालों मेहनत करके धर्म निरपेक्ष आबादी से जो रिश्ता बनाया था। वह पल भर में समाप्त हो गया। वह भी एक किसी ऐसी चीज़ के लिए जो उन्होंने (कॉन्ग्रेस विधायक) ने की भी नहीं। लेकिन भीड़ के लिए उससे मिलता-जुलता ही बहुत है।  

सच्चाई यही है कि भीड़ के लिए एक नास्तिक किसी दूसरे की तुलना में कहीं बेहतर है। आखिर यह कहाँ तक जा सकता है? लेकिन दूसरों के अपराध की सज़ा एक नास्तिक को देने के लिए किस दर्जे तक टकराव की ज़रूरत है। बेंगलुरु यह बहुत अच्छे से जानता है लेकिन शायद बेंगलुरु को यह याद नहीं है। बात साल 2007 की है जब सद्दाम हुसैन को फाँसी दी जाने वाली थी। सद्दाम हुसैन एक निर्दयी तानाशाह, जिसे मानवता पर किए गए अपराधों की सज़ा मिलने वाली थी।  

लेकिन उस इलाके में और भी कई निर्दयी तानाशाह हैं (कभी सोचा है क्यों?)

खैर आप ईराक युद्ध और सद्दाम हुसैन की फाँसी के बारे में कुछ भी सोचते हों। लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि हम एक बात से ज़रूर सहमत हो सकते हैं। भारत वहाँ पर हुए विवादों के बाद बने हालातों के लिए किसी भी सूरत में ज़िम्मेदार नहीं था। कम से कम बेंगलुरु के आम लोगों को छोड़ कर। लेकिन फिर भी बेंगलुरु की सड़कों पर कुछ लोग उतरे और उन्होंने सद्दाम हुसैन की फाँसी का विरोध किया। विरोध में निकाली गई इस रैली के मुखिया थे कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सीके शरीफ़। बहुत जल्द रैली में शामिल भीड़ हिंसक हुई, उनका पुलिस से टकराव हुआ। दुकानें और गाड़ियाँ जलाई जाने लगीं।  

अब कुछ सुना-सुना सा लग रहा होगा? 

अब कुछ रोचक सा सामने आया है। यह लेख लिखने से पहले मैंने उस घटना के बारे में पुख्ता होने के लिए गूगल पर खोजबीन की। यह बहुत मुश्किल नहीं होना चाहिए ना? एक मेट्रोपोलिटन शहर में हुए दंगों के बारे में जानकारी मिलना कैसे मुश्किल हो सकता है। सही तो है? जी नहीं! बिलकुल गलत है। मेरी हैरानी की कल्पना करिए जब मैंने उस घटना के बारे में गूगल पर खोजने की कोशिश की।  

सद्दाम हुसैन को हुई फाँसी की ख़बर का शीर्षक

यह रिपोर्ट The Reuters द्वारा 21 जनवरी 2007 को प्रकाशित की गई थी। जिसमें घटना के बारे में कुछ इस तरह जानकारी दी गई है। “हिंसा की घटना तब हुई जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता प्रदर्शन करने के लिए आगे आए।” इसके बाद संप्रदाय विशेष की दुकानों को एक-एक करके निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हिंसा की घटनाएँ इसलिए भी बढ़ी क्योंकि राज्य में भारतीय जनता पार्टी और एक स्थानीय राजनीतिक दल का प्रभाव है।  

इस कवरेज की शैली और व्याख्या का एक दशक से ज़्यादा का समय गुज़र जाने के बाद भी नहीं बदली। The Reuters की रिपोर्ट के भीतर यह भी बताया गया था कि 21 जनवरी की हिंसा के पहले क्या हुआ था। रिपोर्ट में यह लिखा था, “शुक्रवार को सद्दाम हुसैन की फाँसी के विरोध में संप्रदाय विशेष के हज़ारों प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए। उनका पुलिस से टकराव हुआ और उसके बाद शहर की दुकानें और वाहन जला दिए गए।”

लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद 19 जनवरी को प्रकाशित उस रिपोर्ट में “संप्रदाय विशेष के कार्यकर्ताओं” को आरोपित बताने वाला शीर्षक नहीं नज़र आया। यहाँ तक कि 19 जनवरी के दिन हुई उस घटना की कोई स्पष्ट रिपोर्ट तक नहीं नज़र आई। इसके अलावा किसी दिग्गज मीडिया समूह ने भी 19 जनवरी की घटना पर कोई रिपोर्ट तैयार नहीं की थी। जबकि इस घटना में कॉन्ग्रेस नेता सीके शरीफ़ का नाम सामने आया था। मुझे अपनी याद्दाश्त और ज़हन पर शक था फिर भी मैंने गूगल पर खोजबीन करना जारी रखा। अंततः Daijiworld नाम की वेबसाइट पर 19 जनवरी साल 2007 की घटना की जानकारी मिली।  

जनवरी 2007 की घटना पर Daijiworld की रिपोर्ट

देश के इतने बड़े शहर में हुई घटना के बारे में केवल इतनी ही जानकारी मिली। जिसके अंत में लिखा था ‘अभी और जानकारी मिलना बाकी है’। बेंगलुरु में हुई हिंसा के बारे में इंटरनेट पर इससे ज़्यादा कुछ और मौजूद नहीं है। अगर आपको इस बारे में गूगल पर कुछ मिले तो ज़रूर बताइए। शैली लगभग एक जैसी ही थी। जिन मीडिया समूहों ने जनवरी 2007 के दौरान हुई हिंसा की घटना पर रिपोर्ट प्रकाशित की है। उन्होंने भी इसके लिए हिंदू कार्यकर्ताओं को ज़िम्मेदार ठहराया है।  

The Reuters की रिपोर्ट में अक्सर शुरुआत करने वाले को छिपा दिया जाता है। फ्रंटलाइन में प्रकाशित इस रिपोर्ट में साफ़ देखा जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं की तस्वीर लगाई गई है। इसके अलावा उन्हें ही हिंसा के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया है। इस लेख के भीतर कहीं छिपा कर लिखा गया है “19 जनवरी को हिंसा की पहली घटना हुई। जब पूर्व कॉन्ग्रेस नेता सीके शरीफ़ ने सद्दाम हुसैन की फाँसी का विरोध करने के लिए भीड़ एकत्रित की।  

सद्दाम हुसैन को हुई फाँसी के विरोध के दौरान हिंसा के लिए विश्व हिंदू परिषद को ज़िम्मेदार ठहराया गया

ठीक इससे मिलती जुलती रिपोर्ट द टेलीग्राफ ने भी प्रकाशित की।    

टेलीग्राफ की रिपोर्ट

अब सवाल यह उठता है कि 19 जनवरी को हुई हिंसा की सीधी कवरेज कहाँ है? अगर यह आपको मिलती है तो मैं उसे ज़रूर पढ़ना पसंद करूँगा। क्या भारतीय मीडिया ऐसी घटनाओं पर रिपोर्ट करने के पहले “हिंदू एंगल” खोजती है। असल मायनों में यही है धर्म निरपेक्षता कि हिंदुओं को चिल्ला-चिल्ला कर दोषी ठहराओ। अगर संप्रदाय विशेष के किसी व्यक्ति ने कुछ गलत किया है तब दोनों समुदायों को दोषी कहो। ऐसा करके लोग अपनी रिपोर्टिंग चमकाते रहते हैं। उसके बाद धीरे-धीरे लोग ऐसी घटनाओं का एक पहलू भूल ही जाएँगे।

ऐसा सिर्फ भारत की छोटी बड़ी घटनाओं के मामले में नहीं होता है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एलेन बैरी का ट्वीट देखा जा सकता है।  

एलन बैरी का ट्वीट

ठीक ऐसे ही एनसीईआरटी ने गोधरा में जलाए गए 59 हिंदुओं की घटना का उल्लेख ही ख़त्म कर दिया है। इसके बाद वह सीधे साल 2002 में हुए गुजरात दंगों का ज़िक्र करते हैं जिसे वह “संप्रदाय विशेष विरोधी दंगा” बताते हैं। यह प्रचार इतना प्रभावी था कि न्यूयॉर्क टाइम की पत्रकार ने मोदी सरकार पर इस घटना को छिपाने का आरोप लगा दिया। वहीं एनसीईआरटी ने इसका ज़िक्र “गुजरात दंगों” के नाम से किया है।  

क्या आपको ऐसा लगता है कि इस तरह की करतूत सोशल मीडिया के दौर में नहीं की जा सकती है? फिर से सोचिए, दिल्ली दंगों के बारे में याद करिए। जहाँ एक तरफ दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग सोशल मीडिया पर बहस में उलझे हुए थे। वहीं दूसरी तरह वामपंथी मानसिकता के लोग विकिपीडिया पर इस बारे में एक लेख साझा करने की तैयारी में होंगे। जिसमें दंगे और हिंसा के लिए हिंदुओं को दोषी ठहरा रहे होंगे।  

आज से ठीक 10 साल बाद सोशल मीडिया पर उठा यह गुस्सा लगभग सभी भूल जाएँगे। लोगों को 11 अगस्त 2020 को क्या हुआ था इस बारे में सही जानकारी इकट्ठा करने के लिए अच्छी भली मेहनत करनी पड़ेगी। उसके बावजूद सही नतीजे मिले या न मिलें इसका कुछ भरोसा नहीं। ठीक वैसे ही जैसे मुझे साल 2007 की बेंगलुरु में हुई घटना के बारे में जानने के लिए संघर्ष करना पड़ा।         

यह अभी से ही शुरू भी हो गया है। बेंगलुरु हिंसा से संबंधित रिपोर्ट्स को धुँधला करना शुरू कर दिया गया है। यह तभी से ही शुरू हो गया था जब तमाम मीडिया समूहों ने मानव शृंखला बना कर मंदिर को बचाने वाली घटना का महिमामंडन करना शुरू कर दिया। यह एक रिपोर्ट में जिसमें पत्रकारों पर दंगाइयों और पुलिस कर्मियों द्वारा हमले की बात कही गई है। इसके अलावा एक और रिपोर्ट है जिसमें कॉन्ग्रेस नेता के प्रति लोगों का गुस्सा दिखाया गया है। घटना को दो दिन भी नहीं हुए हैं और झूठी नैरेटिव फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। सोच कर देखिये आज से 10 साल बाद बेंगलुरु में हुए दंगों को हमारे सामने किस तरह पेश किया जाएगा।       

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Abhishek Banerjeehttps://dynastycrooks.wordpress.com/
Abhishek Banerjee is a math lover who may or may not be an Associate Professor at IISc Bangalore. He is the author of Operation Johar - A Love Story, a novel on the pain of left wing terror in Jharkhand, available on Amazon here.  

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अहमद पटेल की मौत का कॉन्ग्रेस को कितना दुख? सुबह किया पहले राहुल को कोट, फिर जताया अपने नेता की मृत्यु पर शोक

कॉन्ग्रेस के लिए पहला काम था-राहुल गाँधी का संदेश शेयर करना ताकि किसी मायने में उसकी गंभीरता सोशल मीडिया यूजर्स के सामने न दब जाए और लोग अहमद पटेल के गम में राहुल गाँधी के कोट को पढ़ना न भूल जाएँ।

उत्तर प्रदेश में 9357 करोड़ रुपए का निवेश करेंगी 28 विदेशी कंपनियाँ: कोरोना काल में मिलेगा लाखों लोगों को रोजगार

28 विदेशी कंपनियों ने 9357 करोड़ रुपए के निवेश के लिए करार किया है। एक जूता बनाने वाली कंपनी ऐसी है, जो चीन से शिफ्ट होकर भारत आई है और तीन सौ करोड़ रुपए के निवेश से आगरा में उत्पादन शुरू किया है।

वो सीक्रेट बैठक, जिससे उड़ी इमरान खान की नींद: तुर्की की गोद में बैठा कंगाल Pak अब चीन के लिए होगा खिलौना

पाकिस्तान समेत ज़्यादातर मुस्लिम देश इजरायल को अपना दुश्मन नंबर एक मानते हैं। सऊदी अरब व इजरायल के रिश्ते मजबूत होने से इमरान की उड़ी नींद।

‘PFI वाले मुझे घर, नौकरी और रुपए देंगे’: इस्लाम अपनाने की घोषणा करने वाली केरल की दलित महिला

केरल की दलित महिला ऑटोरिक्शा ड्राइवर चित्रलेखा ने इस्लामी धर्मांतरण की घोषणा की थी। अब सामने आया है कि PFI ने उन्हें इसके लिए प्रलोभन दिया।

उमर खालिद नास्तिकता का ढोंग करता है, वस्तुतः वह कट्टर मुस्लिम है जो भारत को तोड़ना चाहता है: दिल्ली पुलिस

खालिद के लिए दिल्ली में रहने वाले बांग्लादेशी और रोहिंग्या अप्रवासी ऐसे लोग थे, जिनका इस्तेमाल करना आसान था। उसने इस्लाम और अल्ट्रा लेफ्ट...

वो अहमद पटेल, जिसे राज्यसभा सीट जिताने के लिए कॉन्ग्रेस ने खो दिया था पूरे गुजरात को

71 साल के अहमद पटेल का इंतकाल हो गया। उनकी मौत का कारण मल्टिपल ऑर्गन फेलियर रहा। उनसे यूपीए काल में हुए कई घोटालों के...

प्रचलित ख़बरें

‘मेरे पास वकील रखने के लिए रुपए नहीं हैं’: सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सैन्य अधिकारी की पत्नी से हरीश साल्वे ने कहा- ‘मैं हूँ...

साल्वे ने अर्णब गोस्वामी का केस लड़ने के लिए रिपब्लिक न्यूज नेटवर्क से 1 रुपया भी नहीं लिया। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उन्होंने कुलभूषण जाधव का केस भी मात्र 1 रुपए में लड़ा था।

बहन से छेड़खानी करता था ड्राइवर मुश्ताक, भाई गोलू और गुड्डू ने कुल्हाड़ी से काट डाला: खुद को किया पुलिस के हवाले

गोलू और गुड्डू शाम के वक्त मुश्ताक के घर पहुँच गए। दोनों ने मुश्ताक को उसके घर से घसीट कर बाहर निकाला और जम कर पीटा, फिर उन्होंने...

रहीम ने अर्जुन बनकर हिंदू विधवा से बनाए 5 दिन शारीरिक संबंध, बाद में कहा- ‘इस्लाम कबूलो तब करूँगा शादी’

जब शादी की कोई बात किए बिना अर्जुन (रहीम) महिला के घर से जाने लगा तो पीड़िता ने दबाव बनाया। इसके बाद रहीम ने अपनी सच्चाई बता...

इतिहास में गुम हैं मुगलों को 17 बार हराने वाले अहोम योद्धा: देश भूल गया ब्रह्मपुत्र के इन बेटों को

राजपूतों और मराठों की तरह कोई और भी था, जिसने मुगलों को न सिर्फ़ नाकों चने चबवाए बल्कि उन्हें खदेड़ कर भगाया। असम के उन योद्धाओं को राष्ट्रीय पहचान नहीं मिल पाई, जिन्होंने जलयुद्ध का ऐसा नमूना पेश किया कि औरंगज़ेब तक हिल उठा। आइए, चलते हैं पूर्व में।

कंगना को मुँह तोड़ने की धमकी देने वाले शिवसेना MLA के 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी: वित्तीय अनियमितता का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक के आवास और दफ्तर पर छापेमारी की। यह छापेमारी सरनाईक के मुंबई और ठाणे के 10 ठिकानों पर की गई।

‘मुस्लिमों ने छठ में व्रती महिलाओं का कपड़े बदलते वीडियो बनाया, घाट पर मल-मूत्र त्यागा, सब तोड़ डाला’ – कटिहार की घटना

बिहार का कटिहार मुस्लिम बहुत सीमांचल का हिस्सा है, जिसकी सीमाएँ पश्चिम बंगाल से लगती हैं। वहाँ के छठ घाट को तहस-नहस कर दिया गया।
- विज्ञापन -

ऑस्ट्रेलिया ने आतंकी हरकतों में लिप्त मौलाना की नागरिकता छीनी, गृह मंत्री ने कहा- देश की सुरक्षा के लिए कोई भी कार्रवाई करेंगे

गृह मंत्री पीटर बटन ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया के लोगों को बचाने के लिए मौलाना अब्दुल नसीर बेनब्रीका की नागरिकता छीनना एक उचित कदम है।

‘ये प्राचीनतम है, सभी भाषाओं की जननी है’: न्यूजीलैंड में सत्ताधारी लेबर पार्टी के सांसद ने संस्कृत में ली शपथ, आलोचकों को लताड़ा

एक आलोचक ने ने संस्कृत को अत्याचार, जातिवाद, रूढ़िवादिता और हिंदुत्व की भाषा करार दिया। जानिए नव-निर्वाचित सांसद ने इसका क्या जवाब दिया....

‘भाजपा को हिंदुत्व की लौ लगी है, लव जिहाद उनका नया हथियार, बंगाल चुनाव के बाद ये भंगार में चले जाएँगे’: शिवसेना मुखपत्र

"सच कहें तो वैचारिक ‘लव जिहाद’ के कारण देश और हिंदुत्व का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। कश्मीर में पाक समर्थक, अनुच्छेद 370 प्रेमी महबूबा मुफ्ती से भाजपा ने सत्ता का निकाह किया, इसलिए इसे भी वैचारिक लव जिहाद क्यों न माना जाए?"

अहमद पटेल की मौत का कॉन्ग्रेस को कितना दुख? सुबह किया पहले राहुल को कोट, फिर जताया अपने नेता की मृत्यु पर शोक

कॉन्ग्रेस के लिए पहला काम था-राहुल गाँधी का संदेश शेयर करना ताकि किसी मायने में उसकी गंभीरता सोशल मीडिया यूजर्स के सामने न दब जाए और लोग अहमद पटेल के गम में राहुल गाँधी के कोट को पढ़ना न भूल जाएँ।

उत्तर प्रदेश में 9357 करोड़ रुपए का निवेश करेंगी 28 विदेशी कंपनियाँ: कोरोना काल में मिलेगा लाखों लोगों को रोजगार

28 विदेशी कंपनियों ने 9357 करोड़ रुपए के निवेश के लिए करार किया है। एक जूता बनाने वाली कंपनी ऐसी है, जो चीन से शिफ्ट होकर भारत आई है और तीन सौ करोड़ रुपए के निवेश से आगरा में उत्पादन शुरू किया है।

रोशनी घोटाला में महबूबा मुफ्ती का नाम: जम्मू में सरकारी जमीन कब्ज़ा कर बनाया गया PDP का दफ्तर, CBI कर रही जाँच

गुजरे जमाने की फ़िल्मी हस्तियाँ फिरोज खान और संजय खान की बहन दिलशाद शेख ने भी राजधानी श्रीनगर में 7 कनाल सरकारी जमीन पर कब्ज़ा जमा लिया।

10 साल में 800% बढ़ी संपत्ति: उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी सरनाईक कभी ऑटो रिक्शा चलाते थे, आज करोड़ों के मालिक

सरनाईक पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है, जिसके कारण ईडी ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। तलाशी अभियान के बाद ईडी के अफसरों ने ठाणे स्थित ठिकाने से सरनाईक के बेटे विहंग सरनाईक को हिरासत में ले लिया।

‘उन्हें देश के गरीबों की समझ नहीं, राजनीति में नहीं आना चाहिए’: TMC ने सौरभ गांगुली पर साधा निशाना, अटकलों का बाजार गर्म

TMC के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वो पूरे बंगाल के एक आइकॉन हैं और एकमात्र ऐसे बंगाली क्रिकेटर हैं, जिन्हें भारतीय टीम का नेतृत्व करने का मौका मिला।

राजस्थान में कोरोना संक्रमित कॉन्ग्रेसी मंत्री ने RUHS का दौरा कर उड़ाई प्रोटोकॉल की धज्जियाँ: तस्वीरें वायरल

“आरयूएचएस में पहले से सब पॉजिटिव हैं और मैं भी पॉजिटिव हूँ, इसलिए प्रश्न उठता है कि मुझसे कोरोना फैलेगा कैसे? मैं डॉक्टरों की सलाह के बाद इंतजामों को देखने गया था।”

वो सीक्रेट बैठक, जिससे उड़ी इमरान खान की नींद: तुर्की की गोद में बैठा कंगाल Pak अब चीन के लिए होगा खिलौना

पाकिस्तान समेत ज़्यादातर मुस्लिम देश इजरायल को अपना दुश्मन नंबर एक मानते हैं। सऊदी अरब व इजरायल के रिश्ते मजबूत होने से इमरान की उड़ी नींद।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,380FollowersFollow
357,000SubscribersSubscribe