Thursday, November 26, 2020
Home रिपोर्ट मीडिया 'जातिवादी योगी विकास दुबे को नहीं मारेंगे': एनकाउंटर से पहले और बाद में कैसे...

‘जातिवादी योगी विकास दुबे को नहीं मारेंगे’: एनकाउंटर से पहले और बाद में कैसे बदलता गया ‘द वायर’ का एजेंडा

विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद, 'द वायर' का पूरा प्रपंच, जिसमें कि यह आरोप लगाने का प्रयास किया गया था कि 'जातिवादी योगी आदित्यनाथ' विकास दुबे को एनकाउंटर में नहीं मारेंगे या उसे गिरफ्तार नहीं करेंगे, पूरी तरह ध्वस्त हो गया।

मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया गया कुख्यात गैंगस्टर, विकास दुबे, शुक्रवार (जुलाई 10, 2020) की सुबह मुठभेड़ में मारा गया था। पुलिस के अनुसार, जब गैंगस्टर विकास दुबे को उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा था उसी समय काफिले के साथ एक गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई।

इस दुर्घटना में जब पुलिस अधिकारी घायल हुए, तो विकास दुबे ने उनके हथियार छीनने और भागने की कोशिश की। उसे रोकने के प्रयास में वह पुलिस की गोली का शिकार हुआ और विकास दुबे की मौत हो गई।

गैंगस्टर विकास दुबे की मुठभेड़ में हुई मौत को लेकर सोशल मीडिया में कई तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। एक ओर कुछ लोगों का कहना है कि आठ पुलिसकर्मियों को मारने वाले गैंगस्टर विकास दुबे के साथ यही होना चाहिए था जबकि कुछ ने कथित तौर पर उत्तर प्रदेश पुलिस को कानून अपने हाथों में लेने पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि उन्हें इस एनकाउंटर की विश्वसनीयता पर संदेह है और यह जानबूझकर किया गया।

हालाँकि, केवल एक दिन पहले ही, प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ विकास दुबे के फरार होने से लेकर उसकी गिरफ्तारी पर पूरी तरह से अलग ही दावे और काल्पनिक थ्योरी को गढ़ रहा था।

इसी ‘द वायर’ में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि योगी आदित्यनाथ ‘जातिवादी’ थे, क्योंकि उनके ‘एनकाउंटर राज’ में, एक नामी ‘ब्राह्मण गैंगस्टर’ को कभी भी एनकाउंटर नहीं किया जाएगा या फिर पकड़ा नहीं जाएगा।

‘द वायर’ के लेख की शुरुआत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक पुराने कथन से होती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा था कि अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति पर नकेल कसी जाएगी और अपराधी ‘ठोके जाएँगे।’

सबको याद है कि वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में अपराधी या तो जेल जाएँगे या मुठभेड़ों में मारे जाएँगे। इसके बाद द वायर के इस लेख में योगी आदित्यनाथ ही नहीं, बल्कि राज्य के पुलिसकर्मियों के कई कठोर बयान भी दिए गए हैं।

बदमाश और अपराधियों के प्रति यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के सार्वजनिक नजरिए के बारे में विस्तार से लिखते हुए ‘द वायर’ ने एक बेहद भ्रामक एजेंडा शुरू किया। द वायर ने इसमें लिखा –

“इन बयानों और प्रोत्साहनों ने पुलिस को राज्य में मुठभेड़ों के पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ने को उकसाया और गणतंत्र दिवस, 2019 पर, आदित्यनाथ ने दावा किया कि 3,000 से अधिक मुठभेड़ों में 60 से अधिक अपराधी मारे गए थे। राज्य के मुख्य सचिव ने तुरंत आदेश जारी किए कि सभी जिला मजिस्ट्रेटों को सरकार की उपलब्धियों के रूप में इन तथ्यों को सक्रिय रूप से और व्यापक रूप से प्रचारित करना चाहिए।”

द वायर की इस रिपोर्ट में आगे लिखा गया है – ” कुछ लोगों ने देखा कि मुठभेड़ों में मारे गए और घायल हुए जिन अपराधियों के नाम हर थाने में चलाए जा रहे हैं उन लोगों की सूची में राज्य के 25 मोस्ट वांटेड अपराधी शामिल नहीं थे।”

द वायर के लेख का हिस्सा

यहाँ पर लगभग ऐसा प्रतीत होता है कि ‘द वायर’ यह तय कर पाने में असमर्थ है कि क्या वे अतिरिक्त-न्यायिक मुठभेड़ों का समर्थन करते हैं, चाहे वे परिस्थितियों का परिणाम हों या अन्यथा। या फिर क्या वे इसे मानवाधिकार उल्लंघन मानते हैं?

किसी भी तरह से, ‘द वायर’ का कहना है कि राज्य में एनकाउंटर किए गए अधिकांश लोग ‘छोटे-मोटे अपराधी’ हैं और राज्य में अब तक मोस्ट वांटेड वांछित अपराधियों में से कोई भी नहीं मारा गया।

इसी रिपोर्ट में ‘द वायर’ ने अपने प्रोपेगेंडा को और दिशा देते हुए लिखा है – “इन मुठभेड़ों के बारे में एक बात सामने आती है कि मारे गए लोगों में से आधे मुस्लिम हैं, जबकि अन्य सभी दलित और ओबीसी हैं।”

यहाँ पर ‘द वायर’ तीन बातें स्पष्ट रूप से कहता नजर आता है –

  1. योगी आदित्यनाथ सरकार का विकास दुबे के एनकाउंटर का कोई इरादा नहीं था।
  2. योगी आदित्यनाथ की सरकार सिर्फ मुसलमानों और दलितों के पीछे थी।
  3. योगी आदित्यनाथ की सरकार छोटे अपराधियों के पीछे थी, न कि जो बड़े नामी अपराधियों के।

ऐसे में ‘द वायर’ के इस एजेंडा से लेख का पूरा आधार ही तहस-नहस हो गया है। इस कथित लेख का आधार यह है कि योगी सरकार मुस्लिमों और दलितों को ही निशाना बनाती है। हालाँकि, द वायर के दावे के विपरीत, अगर योगी सरकार का गैंगस्टर विकास दुबे से कोई मतलब नहीं होता, तो उत्तर प्रदेश पुलिस उसके अड्डे पर छापे भी क्यों मारती या उसके ठिकानों पर बुलडोजर क्यों चलवाती?

यहाँ यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इन सभी वर्षों में, जबकि समाजवादी पार्टी के शासन में विकास दुबे ने बड़े अपराध किए और उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। योगी आदित्यनाथ के शासनकाल के दौरान ही एक छापेमारी की गई थी जिसमें दुबे को पकड़ने का प्रयास किया गया था। इस प्रक्रिया में, 8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या कर दी गई और उसके बाद विकास दुबे पुलिस मुठभेड़ में मारा जाता है।

इसके अलावा, विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद, ‘द वायर’ का पूरा प्रपंच, जिसमें कि यह आरोप लगाने का प्रयास किया गया था कि ‘जातिवादी योगी आदित्यनाथ’ विकास दुबे को एनकाउंटर में नहीं मारेंगे या उसे गिरफ्तार नहीं करेंगे, पूरी तरह ध्वस्त हो गया।

वास्तविकता यह है कि ‘द वायर’ को विकास दुबे की मौत, उसकी गिरफ्तारी, या फिर उसके जीवित होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता। उसका उद्देश्य सिर्फ योगी सरकार के विरुद्ध अपना एजेंडा विकसित करना है, फिर चाहे वो किसी अपराधी की मौत पर चलाए जाए या उसके फरार होने पर।

अगर विकास दुबे बच निकलने या जिंदा रहने में कामयाब होता, तो ‘द वायर’ को भगवा पहने योगी के खिलाफ एक और लंबे समय तक चलने वाली खुराक मिल जाती। वे इस बात को दोहराते कि योगी आदित्यनाथ एक जातिवादी सीएम हैं, जिन्होंने सीएए विरोधी दंगों के दौरान मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई की थी, लेकिन एक गैंगस्टर, जो ‘ब्राह्मण’ था, को बस यूँ ही जाने दिया।

इसके अलावा, द वायर के पास यह घिसा-पिटा नेरेटिव तो था ही कि दुबे को ‘भागने की अनुमति’ थी क्योंकि वह राजनीतिक वर्ग के बारे में कई रहस्य जानता था और इसलिए यूपी सरकार ने उसे हिरासत में भी नहीं लिया था।

द वायर यह तथ्य भूल जाना चाहता है जो विकास दुबे की माँ ने कहा था। महज एक दिन पहले ही, विकास दुबे की माँ ने स्पष्ट रूप से कहा था कि विकास दुबे समाजवादी पार्टी का हिस्सा था। वास्तव में, उसकी पत्नी भी समाजवादी पार्टी का हिस्सा थी और भाजपा से उसका कभी भी कोई सीधा संबंध नहीं रहा।

अगर विकास दुबे फरार होने में सफल रहता तो अब तक यही ‘द वायर’ इस तरह के तथ्यों को छुपाकर हर सम्भव प्रयास करता कि गैंगस्टर विकास दुबे किसी तरह भाजपा से जुड़े।

मुठभेड़ों में बदमाशों को मारने के सिद्धांत में कोई विश्वास करता है या नहीं, एनकाउंटर पर किसी को यूपी पुलिस के बयान पर विश्वास है या नहीं, लेकिन इस पूरे प्रकरण में एक बात साबित हुई है कि योगी आदित्यनाथ की अपराध के खिलाफ लड़ाई किसी व्यक्ति की आस्था या जाति पर निर्भर नहीं है। और यह प्रेरणा निश्चित रूप से इस बात से प्रभावित होनी भी नहीं चाहिए कि ‘द वायर’ के एजेंडाबाज लोग क्या चाहते हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कानपुर लव जिहाद SIT रिपोर्ट: आखिर वामपंथियों को 14 साल की बच्चियों का मुस्लिम द्वारा गैंगरेप क्यों नॉर्मल लगता है?

बात यह है कि हर मामले में मुस्लिम लड़का ही क्यों होता है? ईसाई या सिक्ख लड़के आखिर किसी हिन्दू लड़की को अपना नाम हिन्दू वाला बता कर प्रेम करते क्यों नहीं पाए जाते?

नाबालिगों से गैंगरेप, जबरन मुस्लिम बनाना, नाम बदल कर दोस्ती… SIT की वह रिपोर्ट जिसे वामपंथी नकार रहे हैं

ऑपइंडिया के पास मौजूद SIT रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि यह ग्रूमिंग जिहाद के कुछ बेहद चर्चित मामले थे, जिनमें हिन्दू युवतियों को धोखा देकर उनके धर्मांतरण का प्रयास या उनका उत्पीड़न किया गया।

दिल्ली के बेगमपुर में शिवशक्ति मंदिर में दर्जनों मूर्तियों का सिर कलम, लोगों ने कहते सुना- ‘सिर काट दिया, सिर काट दिया’

"शिव शक्ति मंदिर में लगभग दर्जन भर देवी-देवताओं का सर कलम करने वाले विधर्मी दुष्ट का दूसरे दिन भी कोई अता-पता नहीं। हिंदुओं की सहिष्णुता की कृपया और परीक्षा ना लें।”

संविधान दिवस पर PM मोदी ने की एक राष्ट्र और एक चुनाव पर बात, कहा- ये केवल विमर्श का नहीं बल्कि देश की जरूरत

"हमारे निर्णय का आधार एक ही मानदंड होना चाहिए और वो है राष्ट्रहित। राष्ट्रहित ही हमारा तराजू होना चाहिए। हमें ये याद रखना है कि जब विचारों में देशहित और लोकहित की बजाय राजनीति हावी होती है तो उसका नुकसान देश को उठाना पड़ता है।"

संविधान दिवस: आरक्षण किसे और कब तक, समान नागरिक संहिता पर बात क्यों नहीं? – कुछ फैसले जो अभी बाकी हैं

भारत की धर्म निरपेक्षता के खोखलेपन का ही सबूत है कि हिंदुओं के पास आज अपनी एक 'होम लैंड' नहीं है जबकि कथित अल्पसंख्यक...

बंगाल: मर्डर, फायरिंग, बमबाजी, आगजनी… BJP के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ अध्यक्ष तक बने निशाना

बीजेपी (BJP) ने दक्षिण दिनाजपुर में अपने बूथ अध्यक्ष स्वाधीन राय की हत्या का आरोप सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों पर लगाया है।

प्रचलित ख़बरें

फैक्टचेक: क्या आरफा खानम घंटे भर में फोटो वाली बकरी मार कर खा गई?

आरफा के पाँच बज कर दस मिनट वाले ट्वीट के साथ एक ट्वीट छः बज कर दस मिनट का था, जिसके स्क्रीनशॉट को कई लोगों ने एक दूसरे को व्हाट्सएप्प पर भेजना शुरु किया। किसी ने यह लिखा कि देखो जिस बकरी को सीने से चिपका कर फोटो खिंचा रही थी, घंटे भर में उसे मार कर खा गई।

‘उसे मत मारो, वही तो सबूत है’: हिंदुओं संजय गोविलकर का एहसान मानो वरना 26/11 तुम्हारे सिर डाला जाता

जब कसाब ने तुकाराम को गोलियों से छलनी कर दिया तो साथी पुलिसकर्मी आवेश में आ गए। वे कसाब को मार गिराना चाहते थे। लेकिन, इंस्पेक्टर गोविलकर ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी। यदि गोविलकर ने उस दिन ऐसा नहीं किया होता तो दुनिया कसाब को समीर चौधरी के नाम से जानती।

हाथ में कलावा, समीर चौधरी नाम की ID: ‘हिंदू आतंकी’ की तरह मरना था कसाब को – पूर्व कमिश्नर ने खोला राज

"सभी 10 हमलावरों के पास फर्जी हिंदू नाम वाले आईकार्ड थे। कसाब को जिंदा रखना पहली प्राथमिकता थी। क्योंकि वो 26/11 मुंबई हमले का सबसे बड़ा और एकलौता सबूत था। उसे मारने के लिए ISI, लश्कर-ए-तैयबा और दाऊद इब्राहिम गैंग ने..."

ओवैसी को सूअर वाली स्वादिष्ट बिरयानी खिलाने का ऑफर, AIMIM नेता के बीफ बिरयानी पर BJP का पलटवार

"मैं आपको आज बिरयानी का निमंत्रण दे रहा हूँ। वाल्मिकी समुदाय के लोग पोर्क के साथ बिरयानी अच्छी बनाते हैं। आइए हम आपको स्वादिष्ट बिरयानी..."

जहाँ बहाया था खून, वहीं की मिट्टी पर सर रगड़ बोला भारत माता की जय: मुर्दों को देख कसाब को आई थी उल्टी

पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया सुबह साढ़े चार बजे कसाब से कहते हैं कि वो अपना माथा ज़मीन से लगाए... और उसने ऐसा ही किया। इसके बाद जब कसाब खड़ा हुआ तो मारिया ने कहा, “भारत माता की जय बोल” कसाब ने फिर ऐसा ही किया। मारिया दोबारा भारत माता की जय बोलने के लिए कहते हैं तो...

‘माझ्या कक्कानी कसाबला पकड़ला’ – बलिदानी ओंबले के भतीजे का वो गीत… जिसे सुन पुलिस में भर्ती हुए 13 युवा

सामने वाले के हाथों में एके-47... लेकिन ओंबले बिना परवाह किए उस पर टूट पड़े। ट्रिगर दबा, गोलियाँ चलीं लेकिन ओंबले ने कसाब को...
- विज्ञापन -

लालू यादव पर दोहरी मार: वायरल ऑडियो मामले में बीजेपी विधायक ने कराई FIR, बंगले से वार्ड में किए गए शिफ्ट

जेल से कथित तौर पर फोन करने के मामले में लालू यादव पर FIR हुई है। साथ ही उन्हें बंगले से रिम्स के वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।

कानपुर लव जिहाद SIT रिपोर्ट: आखिर वामपंथियों को 14 साल की बच्चियों का मुस्लिम द्वारा गैंगरेप क्यों नॉर्मल लगता है?

बात यह है कि हर मामले में मुस्लिम लड़का ही क्यों होता है? ईसाई या सिक्ख लड़के आखिर किसी हिन्दू लड़की को अपना नाम हिन्दू वाला बता कर प्रेम करते क्यों नहीं पाए जाते?

2008 में फार्म हाउस में पार्टी, अब कर रहे इग्नोर: 26/11 पर राहुल गाँधी की चुप्पी 12 साल बाद भी बरकरार

साल 2008 में जब पाकिस्तान के आतंकी मुंबई के लोगों को सड़कों पर मार चुके थे उसके कुछ दिन बाद ही गाँधी परिवार के युवराज अपने दोस्त की संगीत रस्म को इंजॉय कर रहे थे।

’26/11 RSS की साजिश’: जानें कैसे कॉन्ग्रेस के चहेते पत्रकार ने PAK को क्लिन चिट देकर हमले का आरोप मढ़ा था भारतीय सेना पर

साल 2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अजीज़ को उसके उर्दू भाषा अखबार रोजनामा राष्ट्रीय सहारा के लिए उत्कृष्ट अवार्ड दिया था। कॉन्ग्रेस में अजीज़ को सेकुलरिज्म का चमचमाता प्रतीक माना जाता था।

नाबालिगों से गैंगरेप, जबरन मुस्लिम बनाना, नाम बदल कर दोस्ती… SIT की वह रिपोर्ट जिसे वामपंथी नकार रहे हैं

ऑपइंडिया के पास मौजूद SIT रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि यह ग्रूमिंग जिहाद के कुछ बेहद चर्चित मामले थे, जिनमें हिन्दू युवतियों को धोखा देकर उनके धर्मांतरण का प्रयास या उनका उत्पीड़न किया गया।

‘कबीर असली अल्लाह, रामपाल अंतिम पैगंबर और मुस्लिम असल इस्लाम से अनजान’: फॉलोवरों के अजीब दावों से पटा सोशल मीडिया

साल 2006 में रामपाल के भक्तों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 5 महिलाओं और 1 बच्चे की मृत्यु हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। इसके बाद नवंबर 2014 में उसे गिरफ्तार किया गया था।

26/11 की नाकामी छिपाने के लिए कॉन्ग्रेस चाटुकारों की फौज के साथ किसानों को भड़काने में जुटी, शेयर की पुरानी तस्वीरें

कॉन्ग्रेस की एकमात्र कोशिश है कि बस किसी तरह लोगों का ध्यान इस दिन किसी दूसरे मुद्दे की ओर भटक जाए और कोई उनकी नाकामयाबी व कायरता पर बात न करे।

केरल: राहुल गाँधी ने बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी थी राहत किटें, बंद दुकान में लावारिस मिलीं

बाढ़ प्रभावितों के लिए राहुल गाँधी की तरफ से भेजी गई राहत किटें केरल के एक दुकान में लावारिस मिली हैं।

दिल्ली के बेगमपुर में शिवशक्ति मंदिर में दर्जनों मूर्तियों का सिर कलम, लोगों ने कहते सुना- ‘सिर काट दिया, सिर काट दिया’

"शिव शक्ति मंदिर में लगभग दर्जन भर देवी-देवताओं का सर कलम करने वाले विधर्मी दुष्ट का दूसरे दिन भी कोई अता-पता नहीं। हिंदुओं की सहिष्णुता की कृपया और परीक्षा ना लें।”

शादी के लिए धर्म-परिवर्तन की धमकी पर 10 साल, कराने वाले मौलवियों/पुजारियों को 5 साल सजा: MP में सख्त विधेयक

शादी में धर्मांतरण का लालच देने, धमकाने और दबाव बनाने पर 10 साल की सज़ा का प्रावधान होगा। मध्य प्रदेश में इस विधेयक का मसौदा...

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,404FollowersFollow
358,000SubscribersSubscribe