Friday, July 23, 2021
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बंगाल में छिपा है JMB का सरगना मोहम्मद सलाउद्दीन: कैफे पर हमले में सुनाई गई थी सजा-ए-मौत

ढाका के कैफे पर एक जुलाई 2016 को हुए हमले में 22 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें एक भारतीय सहित 18 विदेशी थे। कैफे पर करीब 10 घंटे तक आतंकवादियों ने कब्जा जमाए रखा था।

आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी) का सरगना कुख्यात आतंकी मोहम्मद सलाउद्दीन उर्फ सालेहान पश्चिम बंगाल में छिपा हुआ है। मीडिया रिपोर्टों में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है। सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों से वह बांग्लादेश सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के किसी जिले में छिपा हुआ है। NIA की टीम उत्तर 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद, मालदह, उत्तर दिनाजपुर, कूचबिहार जिलों में उसकी तलाश कर रही है।

सलाहुद्दीन को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 2016 में होली आर्टिसन कैफे में हुए धमाके में मौत की सजा सुनाई गई थी। वह बोधगया और खागड़ागढ़ धमाकों में भी वांछित है। तीन मौकों पर वह एजेसियों को झॉंसा दे चुका है।

NIA के एक अधिकारी ने बताया कि सलाउद्दीन ने तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में जाकर जेएमबी का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने बताया कि जाँच के दौरान अगस्त 2018 में खागड़ागढ़ में हुए विस्फोट मामले के मुख्य आरोपित जहीदुल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया। उससे पूछताछ में सलाउद्दीन के भारत में छिपे होने की बात पता चली थी। उसने बताया कि सलाउद्दीन भारत के दक्षिणी राज्यों में कहीं छुपा हुआ है।

NIA को जाँच के दौरान पता चला कि सलाउद्दीन कूचबिहार, उत्तरी दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद और नादिया गाँवों में छिपा हुआ है, जो कि भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में हैं। जाँच एजेंसी ने बताया कि सलाउद्दीन कूचबिहार के गीतालदाहा गाँव में धर्म प्रचारक के रूप में रह रहा था। मगर पुलिस के छापा मारने के एक दिन पहले ही वह वहाँ से फरार हो गया। इसके बाद उसके मुर्शिदाबाद जिले के मुकीमनगर गाँव में रहने की सूचना मिली, लेकिन इस बार भी वो जाँच एजेंसी को चकमा देने में कामयाब रहा। NIA ने पिछले हफ्ते कूचबिहार के चांगरबंधा गाँव में छापा मारा था, लेकिन संदिग्ध वहाँ भी नहीं मिला। हालाँकि इस दौरान जाँच एजेंसी ने उसके एक सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया।

जानकारी के मुताबिक बांग्लादेशी व्यापारी, जो कि अब सऊदी अरब में बस गए हैं, वो जेएमबी को फंडिंग देते हैं। ये बांग्लादेशी व्यापारी ही इस आतंकी संगठन को हथियार और गोला-बारूद खरीदने के लिए पैसा देते हैं और उनके साथ संपर्क स्थापित करने के लिए ये लोग ओनियन ब्राउजर का इस्तेमाल करते हैं।

ढाका के कैफे पर एक जुलाई 2016 को हुए हमले में 22 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें एक भारतीय सहित 18 विदेशी थे। कैफे पर करीब 10 घंटे तक आतंकवादियों ने कब्जा जमाए रखा था। इस मामले में पिछले साल ढाका की अदालत ने 7 आतंकियों को मौत की सजा सुनाई थी। सलाउद्दीन और उसके साथियों को जब सजा सुनाई जा रही थी तो उनमें से कुछ ने अदालत में ही अल्लाहु अकबर के नारे लगाए थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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