Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षामस्जिद और मदरसों में आतंकियों के छिपे होने की आशंका, बेंगलुरु हाई अलर्ट पर

मस्जिद और मदरसों में आतंकियों के छिपे होने की आशंका, बेंगलुरु हाई अलर्ट पर

हाल ही में, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने बर्धवान विस्फोट मामले में आतंकी हबीबुर रहमान शेख (28) को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसने रामनगर क्षेत्र में दो IED लगाने की बात क़बूल की थी।

आतंकी हमले के अंदेशे को देखते हुए कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु हाई अलर्ट पर है। खुफिया अधिकारियों ने शहर के मस्जिदों, मदरसों और ‘अन्य धार्मिक जगहों’ पर आतंकियों के छिपे होने की आशंका जताई है।

खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक संदिग्ध केरल से बेंगलुरु में दाखिल हुए हैं और माना जा रहा है कि वे शहर के ‘धार्मिक स्थानों’ में छिपे हो सकते हैं। आतंकी हमले को लेकर इंटेलीजेंस इनपुट मिलने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने हाई अलर्ट घोषित किया है।

बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त भास्कर राव ने शहर में सुरक्षा कड़ी करने और सतर्कता बढ़ाने के आदेश दिए हैं। सभी मातहतों को अपने-अपने इलाकों के प्रमुख स्थानों मसलन, विधानसभा सौध, विकास सौध, हाई कोर्ट, रेलवे स्टेशनों, बेंगलुरु मेट्रो, बस स्टेशन, स्कूल, होटल, बाजार सहित भीड़भाड़ वाली सभी जगहों पर विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।

हाल ही में, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने बर्धवान विस्फोट मामले में आतंकी हबीबुर रहमान शेख (28) को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसने रामनगर क्षेत्र में दो इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस (IEDs) लगाने की बात क़बूल की थी। हबीबुर रहमान, बांग्लादेश स्थित आतंकी संगठन जमात-उल मुजाहिदीन से जुड़ा है। उसे डोड्डाबल्लापुर से गिरफ़्तार किया गया था। उसने एक स्थानीय मस्जिद में शरण ली थी।

10 जुलाई को, हबीबुर रहमान द्वारा किए गए क़बूलनामों के आधार पर, NIA ने बेंगलुरु से पाँच गड़े हुए हैंड ग्रेनेड, एक-टाइमर डिवाइस, तीन इलेक्ट्रिक सर्किट, संदिग्ध विस्फोटक पदार्थ, IED और रॉकेट बनाने में उपयोग किए जाने वाले घटक ज़ब्त किए थे।

TV 9 के अनुसार, दो संदिग्धों को बेंगलुरु शहर के बगलगल्ट इलाक़े के एक ‘धार्मिक स्थल’ से गिरफ़्तार किया गया था। NIA के अधिकारियों ने दो आतंकवादियों को बेंगलुरु के सोलडेवनहल्ली इलाक़े के पास एक मदरसे से पकड़ा था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -