Tuesday, August 9, 2022
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‘बायकॉट इंडिया, इंडिया खत्म हो जाएगा…’: 2023 में जिहाद के लिए बना रखे थे स्लीपर सेल, क्रॉस निशान लगा बदल दिया था तिरंगे का रंग

मरगूब ने फेसबुक पर बॉयकॉट इंडिया नाम की मुहिम चलाई थी। इस मुहिम में उसने तिरंगे पर क्रॉस का चिन्ह लगा कर नबी से मोहब्बत करने के नाम पर भारतीय सामानों का बहिष्कार करने की अपील की थी।

2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिशों का पर्दाफाश होने के बाद बि​हार पुलिस ने मारगुव/मरगूब अहमद दानिश उर्फ ​​ताहिर को गिरफ्तार किया था। वह 2023 में जेहाद छेड़ने की साजिशों में लगा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसके लिए उसने कई व्हाट्सएप ग्रुप और स्लीपर सेल बना रखे थे। वह सोशल मीडिया में लगातार भड़काऊ पोस्ट करता था।

मरगूब ने गजवा-ए- हिंद नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा था। इसके जरिए युवाओं को भड़काया जाता था। देश के खिलाफ नफरत पैदा की जाती थी। हिंदुओं को टारगेट करने का पाठ पढ़ाया जाता था। उसने अपनी स्लीपर सेल में भी कई युवाओं की भर्ती कर रखी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मरगूब मूल रूप से पटना से सटे फुलवारी शरीफ की मुनीर कॉलोनी का निवासी है। उसके 3 व्हाट्सएप ग्रुप हैं। इनमें क्रमशः 181, 10 और 11 सदस्य हैं। उसके समूह में कई पाकिस्तानी और बांग्लादेशी भी शामिल बताए जा रहे हैं। तीनों ग्रुपों का नाम गज़वा-ए-हिन्द था जिसकी प्रोफ़ाइल फोटो में भारत के झंडे को हरे रंग से रंगा गया था। उसके ऊपर पाकिस्तान का झंडा लगाया गया था।

12 जून 2022 को मरगूब ने फेसबुक पर बॉयकॉट इंडिया नाम की मुहिम चलाई थी। इस मुहिम में उसने तिरंगे पर क्रॉस का चिन्ह लगा कर नबी से मोहब्बत करने के नाम पर भारतीय सामानों का बहिष्कार करने की अपील की थी। वो अक्सर देश विरोधी करता था, जिसमें भारत के नामोनिशान तक मिट जाने की बातें हुआ करती थी। ऐसे ही एक पोस्ट में उसने लिखा था, “इंडिया खत्म हो जाएगा, मेरे नबी का नाम हमेशा बुलंद रहेगा, इंशा अल्लाह…इंशा अल्लाह।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक मरगूब पाकिस्तान के तहरीक ए लब्बैक के संपर्क में भी था। मरगूब की अम्मी की माने तो उनके बेटे की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उनका कहना है, “मेरा बेटा दिन भर फोन चलाया करता था। हम लोग जब भी उस से फोन लेने की कोशिश करते थे तब वह झगड़ा करने लगता था। हम नहीं जान पाते थे कि वो फोन में क्या करता है।” उन्होंने कहा, “मेरा बेटा मानसिक बीमार है। वह बाथरूम में बिना कपड़ों के ही घुस जाता था। उसका इलाज एम्स में चल रहा था। वो कुछ गलत नहीं कर सकता है। वो फोन में गाने सुनता था और गंदी वीडियो और फोटो देखा करता था।”

मरगूब अहमद मदरसे में पढ़ा है और स्थानीय बच्चों को कुरान पढ़ाता था। वह कश्मीर में मारे गए आतंकियों की तारीफ करते हुए उनको शहीद बताता था। उसने अपने व्हाट्सएप ग्रुप में एक पाकिस्तानी को भी एडमिन बना रखा है। SSP पटना के मुताबिक, “26 वर्षीय मरगूब साल 2016 से ही अपनी तैयारियों में जुटा था। वह विदेश में नौकरी भी कर चुका है। पाकिस्तान के अलावा वह कुछ कश्मीरी आतंकी संगठनों से भी जुड़ा है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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