Friday, May 24, 2024
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वायुसेना को अपाचे की आखिरी खेप भी मिली, माउंटेन वॉर फेयर में दुनिया का बेस्ट हेलीकॉप्टर

अपाचे को सबसे आधुनिक लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में गिना जाता है। अपाचे ने हमले और एन्टी आर्मर ऑपरेशन वाले एमआई -35 हेलिकॉप्टरों की जगह ली है। एएच -64 E अपाचे नवीनतम संचार, नेविगेशन, सेंसर और हथियार प्रणालियों सहित एक ओपन सिस्टम आर्किटेक्चर से लैस है।

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच तनाव लगातार जारी है। इस बीच अमेरिका ने अपाचे हेलीकॉप्टरों की अंतिम खेप भी भारत पहुँचा दी है। इसके जुड़ते ही भारतीय वायु सेना के हमले की क्षमता और अधिक बढ़ गई है। इसके अलावा, चिनूक हैवी लिफ्ट हेलीकॉप्टर भी हाल ही में भारत को सौंपे गए थे।

बोइंग ने शुक्रवार (11 जुलाई, 2020) को जानकारी देते हुए कहा, “22 अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से आखिरी पाँच को पिछले महीने हिंडन एयर बेस पर भारतीय वायुसेना (IAF) को सौंप दिए गए।” यह भी बताया कि भारतीय वायुसेना को 15 सीएच -47F (I) चिनूक हेवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर पहले ही मार्च में सौंपा चुका है।

15 जून को गलवान घाटी में हिंसक संघर्ष के बाद भारत ने सुखोई 30, मिग 29, मिराज 2000 और अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों पूर्वी लद्दाख के अग्रिम मोर्चो पर तैनात किया है। मई महीने में चीन की तरफ से बढ़ाए जा रहे सैन्यबल को देखते हुए भारतीय सेना ने भी टैंक और आर्टिलरी गन के साथ अपनी तैयारी सुनिश्चित की थी।

बता दें अपाचे को सबसे आधुनिक लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में गिना जाता है। अपाचे ने हमले और एन्टी आर्मर ऑपरेशन वाले एमआई -35 हेलिकॉप्टरों की जगह ली है। एएच -64 E अपाचे नवीनतम संचार, नेविगेशन, सेंसर और हथियार प्रणालियों सहित एक ओपन सिस्टम आर्किटेक्चर से लैस है। माउंटेन वॉर फेयर के लिए यह दुनिया का बेस्ट हेलीकॉप्टर माना जाता है।

इसमें टार्गेट एक्विजिशन डेसिग्नेशन सिस्टम है, जो 24 घंटे हर मौसम में लक्ष्य की जानकारी उपलब्ध कराता है। साथ ही यह नाइट विजन से भी लैस है। इसके अग्नि नियंत्रण रडार को समुद्री वातावरण में संचालित करने के लिए अपडेट किया गया है। यह हमला करने के अलावा रीकनिस्संस, सुरक्षा, शांति व्यवस्था संचालन जैसे कई अभियानों के लिए काम कर सकता है।

पिछले साल सितंबर में अपाचे हेलिकॉप्टर का पहला बैच भारत को मिला था। इसमें आठ अमरीका निर्मित यह-64 E मल्टी-रोल लड़ाकू अपाचे हेलिकॉप्टर शामिल थे जो कि पठानकोट एयर बेस में पाकिस्तान पर नजर रखने के लिए भारतीय वायु सेना में शामिल किए गए थे। दूसरा एचयू 137 स्क्वाड्रन जोरहाट, असम में स्थित है।

रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2015 में 22 AH -64E अपाचे और 15 CH-47 F (I) चिनूक हेलीकॉप्टरों के लिए अमेरिकी कंपनी बोइंग के साथ सौदा किया था। इस साल की शुरुआत में, भारत और अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की दिल्ली यात्रा के दौरान भारतीय सेना के लिए छह अपाचे के अधिग्रहण के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किया था।

पहले चार चिनूक 25 मार्च 2019 को भारत में पहुँचाया गया था। जिसमें ट्विन रोटर हैवी लिफ्ट, मल्टी-मिशन ट्रांसपोर्ट हैं। ये हेलीकॉप्टर 11 टन और 45 सैनिकों का अधिकतम लोड उठा सकते है। कुल 15 हेलीकॉप्टरों को असम के दिनजान से बाहर स्थित सेकंड स्क्वाड्रन के साथ बल में शामिल किया गया है।

बोइंग के अनुसार कि भारत अपाचे का संचालन करने वाले 17 देशों में से एक है। अपाचे को भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया गया है। ट्विन रोटर चिनूक 50 साल से अधिक समय से यह दुनिया का सबसे विश्वसनीय और भरोसेमंद हैवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर बना हुआ है। दुनिया के 24 देशों के पास या तो चिनूक हेलीकॉप्टर सेवा में हैं या फिर उनके लिए सौदा किया गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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