Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षाभारत-बांग्लादेश सीमा पर 600KM का इलाका सिक्योरिटी के लिहाज से डार्क जोन, अब मोदी...

भारत-बांग्लादेश सीमा पर 600KM का इलाका सिक्योरिटी के लिहाज से डार्क जोन, अब मोदी सरकार बना रही फुल-प्रूफ व्यवस्था: जानें पश्चिम बंगाल सरकार दे रही कैसा सहयोग

पश्चिम बंगाल सरकार ने बीएसएफ को जमीन सौंपनी शुरू की, 600 किलोमीटर डार्क जोन में बाड़बंदी और सुरक्षा ढाँचे मजबूत करने की तैयारी तेज हुई।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सीमा पर कंटीली तार की बाड़ लगाने और BSF के बुनियादी ढाँचे के विस्तार के लिए जमीन सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

राज्य सचिवालय नबान्न में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने BSF अधिकारियों की मौजूदगी में इसकी औपचारिक शुरुआत की। फिलहाल 27 किलोमीटर क्षेत्र के लिए जमीन ट्रांसफर की गई है, जिसमें 18 किलोमीटर हिस्से में बाड़ लगाई जाएगी और 9 किलोमीटर क्षेत्र में BSF चौकियाँ तथा अन्य जरूरी ढाँचे विकसित किए जाएँगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि पूरे देश की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि लंबे समय से लंबित सीमा सुरक्षा परियोजनाओं को अब तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत-बांग्लादेश सीमा का करीब 600 किलोमीटर हिस्सा अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता और सुरक्षा एजेंसियाँ इसे ‘डार्क जोन’ के रूप में देखती हैं।

1947 की रेडक्लिफ लाइन से शुरू हुई आज की चुनौती

भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूद 4096 किलोमीटर लंबी सीमा का इतिहास 1947 के विभाजन से जुड़ा हुआ है। अंग्रेज न्यायविद सर सिरिल रेडक्लिफ ने महज कुछ हफ्तों में भारत और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान के बीच सीमा तय की थी।

17 अगस्त 1947 को घोषित की गई रेडक्लिफ लाइन ने बंगाल को दो हिस्सों में बाँट दिया। उस समय सीमांकन के लिए पुराने नक्शों और 1931 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, जबकि जमीन पर हालात काफी बदल चुके थे।

इस जल्दबाजी में खींची गई सीमा ने गाँवों, खेतों, बाजारों और यहाँ तक कि परिवारों को भी दो देशों में बाँट दिया। नदियों, दलदली क्षेत्रों और बदलती जियोग्राफिकल परिस्थितियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

यही वजह है कि आज भी कई इलाकों में सीमा का प्रबंधन बेहद मुश्किल बना हुआ है। वर्तमान डार्क जोन और सीमा संबंधी कई विवादों की ऐतिहासिक जड़ें इसी रेडक्लिफ लाइन में मौजूद हैं।

क्या है 600 किलोमीटर का डार्क जोन?

भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 4096 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो दुनिया की सबसे जटिल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक मानी जाती है। यह सीमा पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मेघालय, असम और मिजोरम से होकर गुजरती है। इनमें सबसे लंबी सीमा पश्चिम बंगाल में है, जिसकी लंबाई करीब 2217 किलोमीटर है।

पश्चिम बंगाल में लगभग 1600 किलोमीटर हिस्से में किसी न किसी रूप में बाड़बंदी हो चुकी है, लेकिन करीब 550 से 600 किलोमीटर क्षेत्र ऐसा है जहाँ अब भी पूरी तरह बाड़ नहीं लग पाई है। यही हिस्सा सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, कूचबिहार और जलपाईगुड़ी जैसे सीमावर्ती जिले इस संवेदनशील क्षेत्र का हिस्सा हैं।

आखिर इसे डार्क जोन क्यों कहा जाता है?

डार्क जोन का मतलब सिर्फ अंधेरा इलाका नहीं बल्कि ऐसे क्षेत्रों को कहा जाता है जहाँ निगरानी करना बेहद कठिन है। कई हिस्सों में नदियाँ, दलदली जमीन, घने जंगल और दूर-दराज के गाँव मौजूद हैं। कुछ स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क बहुत कमजोर है, जबकि कई जगह फ्लडलाइट्स और स्थायी सुरक्षा ढाँचे बनाना तकनीकी रूप से संभव नहीं हो पाया है।

मुर्शिदाबाद और मालदा में गंगा और पद्मा जैसी नदियाँ लगातार अपना रास्ता बदलती रहती हैं। ऐसे में स्थायी बाड़ लगाना मुश्किल हो जाता है। वहीं सुंदरबन के दलदली और मैंग्रोव क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। मानसून के दौरान स्थिति और भी जटिल हो जाती है क्योंकि तेज बहाव कई बार पहले से बने ढांचों को नुकसान पहुँचा देता है।

घुसपैठ और तस्करी के लिए क्यों संवेदनशील है यह इलाका?

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, सीमा का यह खुला हिस्सा लंबे समय से घुसपैठ और तस्करी की गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होता रहा है। रात के अंधेरे, कमजोर निगरानी और मुश्किल जियोग्राफिकल परिस्थितियों का फायदा उठाकर अवैध तरीके से सीमा पार करने की कोशिशें होती रही हैं।

इन इलाकों से मवेशी तस्करी, नकली भारतीय मुद्रा, नशीले पदार्थों, सोने और अन्य प्रतिबंधित सामानों की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं। नदी वाले क्षेत्रों में नावों के जरिए होने वाली तस्करी को रोकना सुरक्षा बलों के लिए विशेष चुनौती माना जाता है।

इसके अलावा मानव तस्करी भी एक गंभीर समस्या है। कई मामलों में महिलाओं और बच्चों को झाँसा देकर या अवैध नेटवर्क के जरिए सीमा पार ले जाने की कोशिश की जाती है। सुरक्षा एजेंसियाँ यह भी मानती हैं कि ऐसे खुले इलाकों का इस्तेमाल अपराधी और अन्य संदिग्ध तत्व भी कर सकते हैं।

BSF कैसे कर रही है निगरानी?

सीमा सुरक्षा बल ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है। जहाँ कंटीली तार की बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहाँ स्मार्ट फेंसिंग और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

सीमा के कई संवेदनशील हिस्सों में थर्मल कैमरे, इंफ्रारेड कैमरे, लेजर तकनीक और अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। ये उपकरण रात के अंधेरे, घने कोहरे और खराब मौसम में भी संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने में मदद करते हैं।

इसके अलावा ड्रोन के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है। सीमा पार से आने वाले संदिग्ध ड्रोनों पर नजर रखने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम भी तैनात किए जा रहे हैं। नदी वाले क्षेत्रों में BSF की विशेष वाटर विंग स्पीड बोट और फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट्स के जरिए गश्त करती है।

भारत की ओर से BSF और बांग्लादेश की ओर से बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। दोनों देशों के बीच समन्वित सीमा प्रबंधन योजना के तहत नियमित फ्लैग मीटिंग, संयुक्त गश्त और सूचनाओं का आदान-प्रदान भी किया जाता है।

दशकों बाद भी क्यों नहीं सुलझी समस्या?

आजादी के लगभग आठ दशक बाद भी सीमा का यह हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सका है। इसके पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण भूमि अधिग्रहण की जटिल प्रक्रिया है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बाड़ लगाने के लिए किसानों और स्थानीय लोगों की जमीन की जरूरत पड़ती है, जिससे कई बार विवाद पैदा होते हैं।

दूसरी बड़ी चुनौती जियोग्राफिकल परिस्थितियाँ हैं। सुंदरबन के जंगल, दलदली इलाके और लगातार बदलने वाली नदी धाराएँ स्थायी बाड़बंदी को मुश्किल बना देती हैं। कई बार करोड़ों रुपए खर्च कर बनाई गई संरचनाएँ बाढ़ और कटाव की वजह से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।

इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले कुछ लोगों की आजीविका अनौपचारिक सीमा पार व्यापार पर भी निर्भर रही है। ऐसे में कई बार स्थानीय स्तर पर भी बाड़बंदी को लेकर विरोध देखने को मिलता है।

सीमा सुरक्षा को नई मजबूती

जानकारों की मानें तो कंटीली तार की बाड़ इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। जिन इलाकों में बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहाँ डिजिटल फेंसिंग को मजबूत करना होगा। AI आधारित कैमरे, ग्राउंड सेंसर, सैटेलाइट निगरानी और स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम भविष्य में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय, तेजी से भूमि हस्तांतरण और सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास भी जरूरी माना जा रहा है। स्थानीय लोगों को रोजगार और विकास के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें तस्करी और अवैध गतिविधियों से दूर रखना भी सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।

भारत-बांग्लादेश सीमा का यह 600 किलोमीटर लंबा डार्क जोन लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा की कमजोर कड़ी माना जाता रहा है। अब पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा BSF को जमीन सौंपने की शुरुआत को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आने वाले समय में यदि बाड़बंदी, आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक सहयोग साथ-साथ आगे बढ़ते हैं तो इस संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा को काफी हद तक मजबूत किया जा सकता है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Searched termsबीएसएफ, सीमा, बांग्लादेश, भारत, पश्चिमबंगाल, डार्कजोन, बाड़बंदी, घुसपैठ, तस्करी, सुरक्षा, रेडक्लिफलाइन, विभाजन, मुर्शिदाबाद, मालदा, सुंदरबन, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, निगरानी, ड्रोन, सेंसर, फ्लडलाइट, सीमाचौकी, बीजीबी, नदीसीमा, तकनीक, भूमि, हस्तांतरण, BSF, border, Bangladesh, India, West Bengal, dark zone, fencing, infiltration, smuggling, security, Redcliff Line, division, Murshidabad, Malda, Sundarbans, Cooch Behar, Jalpaiguri, surveillance, drone, sensor, floodlight, border post, BGB, river border, technology, land, transfer, India Bangladesh border dispute, West Bengal BSF land transfer, Suvendu Adhikari statement, 600 km dark zone, Radcliffe line history, India Bangladesh border fencing, border smuggling West Bengal, Sundarbans border security, Malda Murshidabad border, smart fencing technology, illegal infiltration prevention, anti drone system, India Bangladesh border news, Border Security Force outposts, Nabanna secretariat meeting, भारत बांग्लादेश सीमा विवाद, पश्चिम बंगाल BSF जमीन हस्तांतरण, सुवेंदु अधिकारी बयान, 600 किमी डार्क जोन, रेडक्लिफ लाइन इतिहास, भारत बांग्लादेश बाड़बंदी, सीमा तस्करी पश्चिम बंगाल, सुंदरबन सीमा सुरक्षा, मालदा मुर्शिदाबाद बॉर्डर, स्मार्ट फेंसिंग तकनीक, अवैध घुसपैठ रोकथाम, एंटी ड्रोन सिस्टम, भारत बांग्लादेश बॉर्डर न्यूज़, सीमा सुरक्षा बल चौकियां, नबान्न सचिवालय बैठक
विवेकानंद मिश्र
विवेकानंद मिश्र
एक पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर। राजनीति, संस्कृति, समाज से जुड़ी अनसुनी कहानियाँ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध।

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘बेटा बीमार है तो मर जाए, पहले ₹500 दे’: अलीगढ़ में अकबर और उसके बेटों ने SC परिवार पर बोला हमला, फाड़े महिला के...

अलीगढ़ में खरन्जा बनाने के लिए ₹500 न देने को लेकर अनुसूचित जाति (SC) के युवक और उसकी पत्नी को पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम परिवार ने बेरहमी से पीटा।

‘द वायर’ के समर्थन में आई PM मोदी से बदसलूकी करने वाली नार्वे की प्रोपेगेंडाबाज हेले लिंग: जानें- कैसे विदेशी ‘एक्टिविस्ट’ और वामपंथी मीडिया...

नॉर्वे की प्रोपेगेंडा बाज तथाकथित पत्रकार हेले लिंग ने 'द वायर' का समर्थन किया है। उसका कहना है कि भारत संबंधी जानकारी वह उसी से लेती हैं।
- विज्ञापन -