Monday, March 1, 2021
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पेंगोंग त्सो लेक में भारत और चीन के बीच कब क्या कैसे: 5 मई से अब तक 13 बड़ी घटनाओं का लेखा-जोखा

माना जा रहा है कि भारत ने चीन के साथ नेहरूकालीन सीमाओं वाले नियमों में कुछ बदलाव करने का मन बना लिया है और भारतीय सेना ने लद्दाख में चीन के कब्जे वाला करीब 3.5 किलोमीटर एरिया वापस भी ले लिया है।

चीन और भारत के सैनिक एक बार फिर पेंगोंग त्सो (Pangong Tso) इलाके में आमने-सामने हैं और सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। एक ओर जहाँ दोनों ही देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत जारी है, वहीं, काला टॉप पहाड़ी के नीचे चीन अपने टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों को तैनात करने का प्रयास कर रही है।

विस्तारवादी चीन की चाल इस बार असफल रही है। भारतीय सेना के मुताबिक, चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी यानी पीएलए के करीब 500 सैनिकों ने 29-30 अगस्त की रात काला टॉप और हेमलेट टॉप इलाकों पर यथास्थिति बदलने की कोशिश की, लेकिन सतर्क भारतीय सैनिकों ने ऐसा नहीं होने दिया।

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान

हालाँकि, इस मुठभेड़ में चीनी सैनिकों के मारे जाने पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन सोशल मीडिया पर रक्षा विषयों पर लिखने वाले कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान 25 से 30 की संख्या तक चीनी सैनिकों को बंधक बना लिया गया था। और अब चीनी सेना एक ही जगह फँस कर रह गई है। यही नहीं, चीन ने आरोप लगाया है कि भारतीय सैनिक उनकी सीमा में बहुत दूर तक प्रवेश कर चुके हैं और वह निरंतर सेना से वापस लौटने का निवेदन कर रहा है।

अगस्त माह में चीनी सेना ने नई जगह पर घुसपैठ की कोशिशें तेज की हैं। यह उस जगह से हटकर है, जहाँ इससे पहले हिंसक झड़प हुईं थीं। चीनी सेना द्वारा नया विवाद पेन्गोंग त्सो लेक के दक्षिणी किनारे पर खड़ा किया गया है, जहाँ भारतीय सेना लगातार नजर रख रही थी। यही वजह भी है कि चीन की सेना गत 29-30 अगस्त की रात को घुसपैठ कर पाने में नाकाम रही।

भारत ने मंगलवार (सितम्बर 01, 2020) को कहा था कि चीन ने 29 और 30 अगस्त की रात को पेंगोंग त्सो लेक के दक्षिण किनारे पर उकसाने वाली सैन्य हरकत करते हुए सीमा पर यथास्थिति को तोड़ने की कोशिश की और इसके अगले दिन भी ऐसी कार्रवाई की जिसे भारतीय सेना द्वारा नाकाम कर दिया गया।

माना जा रहा है कि भारत ने चीन के साथ नेहरूकालीन सीमाओं वाले नियमों में कुछ बदलाव करने का मन बना लिया है और भारतीय सेना ने लद्दाख में चीन के कब्जे वाला करीब 3.5 किलोमीटर एरिया वापस ले लिया है। भारत ने अब तक LAC से अपनी सेना की तैनाती में कमी नहीं की है और करीब 40 हजार जवान सीमा पर तैनात हैं। हालाँकि, इस बारे में अभी तक किसी भी प्रकार की कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई हैं। जिस तरह से भारतीय सेना ने इस बार चीनी सैनिकों को सबक सिखाया है, उसे लेकर चीनी सैनिक हैरान हैं।

अधिकारियों का कहना है कि इस क्षेत्र में सर्विलांस कैमरा इतने बेहतरीन हैं कि इस इलाके में हो रही हलचल को दूर से भी कैद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कैमरे में चीनी सैनिकों की हलचल देखने के बाद भारतीय सेना तुरंत हरकत में आई और चीनी सैनिकों को एलएसी पार करने से रोक दिया।

मंगलवार को भारत में चीनी दूतावास ने कहा कि भारत को सीमा पर उकसाने वाली हरकत बंद करनी चाहिए और वह अपने उन सैनिकों को वापस बुला ले, जो ‘गलत तरीके’ से वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी, एलएसी का उल्लंघन कर रहे हैं।

चीन के सरकारी मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ के अनुसार, चीनी सेना पीएलए की वेस्टर्न थिएटर कमांड ने कहा है कि भारत ने गत 31 अगस्त को अवैध रूप से एलएसी को पार किया है, जिसका चीन विरोध करता है।

भारत-चीन सैनिकों के बीच जारी गतिरोध की टाइमलाइन पर यदि नजर दौड़ाएँ तो लद्दाख स्थित गलवान घाटी में बीते 15 जून को दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीय सैनिकों के वीरगति को प्राप्त होने की खबर सामने आई थी। इसके अलावा 43 चीनी सैनिक भारतीय सेना द्वारा मार गिराए दिए गए।

इसी क्षेत्र में चीन और भारतीय सैनिक आमने-सामने हैं

इन हिंसक झड़पों के बाद सीमा पर तनाव कम करने को लेकर दोनों देशों के बीच कई राउंड की सैन्य स्तर की बातचीत हो गई है। लद्दाख में पेंगोंग झील के किनारे और गलवान वैली में मई माह से ही दोनों देशों की सेनाएँ कई बार आमने-सामने आईं। डोकलाम में 2017 में दोनों देशों के बीच 73 दिनों तक चले तनाव के बाद पहली बार लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी (LAC) पर इतने लंबे समय तक सैन्य गतिरोध हुआ।

29-30 अगस्त रात हुई झड़प के बाद चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, “भारत के कदम ने चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता का घोर उल्लंघन किया है, दोनों देशों के बीच प्रासंगिक समझौतों, प्रोटोकॉल और महत्वपूर्ण आम सहमति का गंभीर उल्लंघन किया है और चीन-भारत सीमा क्षेत्रों के मध्य शांति को गंभीर नुकसान पहुँचाया है।”

जून से लेकर अगस्त तक के घटनाक्रम की टाइमलाइन

  • 5 मई – एलएसी और गलवान घाटी में चीन की आक्रामकता बढ़नी शुरू हुई। चीनी सैनिकों ने गलवान में चोरों की तरह घुसपैठ की
  • 6 जून – चीनी हिस्से के मोल्डो में बैठक हुई
  • 15 जून – हिंसक झड़प, जिसमें 20 भारतीय और 43 चीनी सैनिक हताहत हुए
  • 22 जून – लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनाव कम करने को लेकर करीब 11 घंटे की मैराथन बैठक हुई
  • 24 जून – चीनी सैनिकों ने फिंगर 4 पर अपनी सैन्य गतिविधियाँ शुरू कर दीं
  • 30 जून – तीसरे दौर की बैठक लद्दाख के चुशूल में ही की गई थी। इसमें कहा गया कि चीनी सेना गलवान में फिंगर 4 प्वाइंट से पीछे हट गई
  • 2 जुलाई – देपसांग पर चीनी सैनिकों की तैनाती बढ़ाई गई
  • 14 जुलाई – भारत-चीन सीमा पर तनाव कम करने के लिए लद्दाख के चुशूल में कोर कमांडर स्तर की चौथी बैठक आयोजित हुई
  • 2 अगस्त – देपसांग पर लेफ्टिनेंट जनरलों के बीच बातचीत में भारत ने साफ कर दिया कि पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना पीछे नहीं हटी है
  • 4 अगस्त – चीन ने पेंगोंग त्सो (Pangong Tso) लेक की स्थिति पर बात करने से इनकार कर दिया
  • 8 अगस्त – मेजर जनरल स्तर पर बातचीत
  • 12 अगस्त – चीन ने देप्सांग पर अपनी गतिविधियाँ बढ़ा दीं
  • 29-30 अगस्त पेंगोंग लेक के साउथ बैंक क्षेत्र में चीन ने भड़काऊ सैन्य हरकत करते हुए यथास्थिति को तोड़ने की कोशिश की

इसके बाद से दोनों देशों के बीच बातचीत भी जारी है लेकिन साथ ही साथ तनाव भी कायम है।

सैन्य मामलों पर लिखने वाले शिव अरूर के अनुसार, 14-15 जून को चौथे दौर की जो वार्ता हुई है थी, चीन ने पेंगोंग त्सो लेक के आसपास की स्थिति को टकराव का विषय मानना ही बंद कर दिया था। चीनी सेना ने अपनी फौजें पीछे हटाने के वादे पर अमल सिर्फ गालवान घाटी के पट्रोल प्वाइंट 14, पट्रोल प्वाइंट 15 और उसके दक्षिण में हॉट स्प्रिंग्स सेक्टर तक ही सीमित रखा।

इंडिया टुडे के अनुसार, चीन ने पिछले तीन सप्ताह में ही पेंगोंग त्सो (Pangong Tso) के भीतरी इलाकों और अक्साई चिन में कई सप्लाई बेस तैयार किए हैं, जहाँ से किसी भी सूचना के मिलते ही हमला करने के लिए सैनिकों को मदद पहुँचाई जा सकती है।

सबसे ताजा समाचारों के अनुसार, चीन-नेपाल-भूटान के साथ भारत की सीमाओं के लिए सुरक्षा एजेंसियों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। सैन्य मामलों के जानकार ट्विटर पर बता रहे हैं कि भारत ने चीन को यह स्पष्ट कर दिया है कि वह ऊँचाइयों से अब पीछे नहीं हटने वाले हैं और कहा है कि भारतीय सैनिक अपने ही क्षेत्र में हैं। इसके अलावा, बीजिंग को अपने सीमावर्ती सैनिकों को नियंत्रित करने की चेतावनी भी कल विदेश मंत्रालय द्वारा दी जा चुकी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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