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चीन का अवैध कब्जा किसी कीमत पर नहीं बर्दाश्त… लोकसभा में विदेश राज्यमंत्री ने किया साफ, लद्दाख क्षेत्र में 2 कस्बे बसाने पर भारत भड़का: बताया- बॉर्डर पर हम कर रहे तेजी से विकास

विदेश मंत्रालय की ओर से जवाब में आगे कहा गया, "अकेले सीमा सड़क संगठन (BRO) ने पिछले दशक की तुलना में इस पर तीन गुना अधिक व्यय किया है। सड़क नेटवर्क, पुलों की लंबाई और सुरंगों की संख्या में पहले की तुलना में काफी वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय समुदायों के लिए कनेक्टिविटी बढ़ी है और हमारे सशस्त्र बलों के लिए बेहतर रसद सहायता प्रदान की गई है।"

संसद के जारी बजट सत्र में भाजपा के नेतृत्व वाली जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार ने साफ कर दिया सीमा में चीन का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं है। भारत ने सीमा क्षेत्र में दो नए काउंटी स्थापित करने की चीन की घोषणा पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस क्षेत्र का कुछ हिस्सा लद्दाख में आता है। सरकार ने शुक्रवार (21 मार्च) को संसद को बताया कि केंद्र ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से विरोध दर्ज कराया है।

विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, “भारत सरकार ने इस क्षेत्र में भारतीय क्षेत्र पर चीन के अवैध कब्जे को कभी स्वीकार नहीं किया है। नए काउंटी (कस्बे) के निर्माण से न तो इस क्षेत्र पर भारत की संप्रभुता के बारे में भारत की दीर्घकालिक स्थिति प्रभावित होगी और न ही चीन के अवैध एवं जबरन कब्जे को वैधता मिलेगी।”

सदन में विदेश मंत्रालय से पूछा गया कि क्या उसे इस बात की जानकारी है कि लद्दाख में भारतीय क्षेत्र को शामिल करते हुए चीन होतान प्रांत में दो नए काउंटी स्थापित कर रहा है। विदेश मंत्रालय से इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए रणनीतिक और कूटनीतिक उपायों के बारे में भी पूछा गया। इसके साथ ही भारत द्वारा दर्ज कराए गए विरोध और चीन से मिली प्रतिक्रिया के बारे में भी पूछा गया।

इसका जवाब देते हुए कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा, “भारत सरकार चीन के होतान प्रान्त में तथाकथित दो नए काउंटी की स्थापना के बारे में चीनी द्वारा की गई घोषणा से अवगत है। इन तथाकथित काउंटियों के अधिकार क्षेत्र के कुछ हिस्से भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में आते हैं।” उन्होंने कहा कि सरकार को पता है कि चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे का विकास कर रहा है।

विदेश राज्यमंत्री ने कहा, “सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे के सुधार पर सावधानीपूर्वक और विशेष ध्यान दे रही है, ताकि इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास को सुविधाजनक बनाया जा सके। इसके साथ ही भारत की रणनीतिक और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।” मंत्रालय के अनुसार, सीमावर्ती बुनियादी ढाँचे के लिए बजट आवंटन में पिछले दशक (2014-2024) में वृद्धि की गई है।

मंत्रालय की ओर से जवाब में आगे कहा गया, “अकेले सीमा सड़क संगठन (BRO) ने पिछले दशक की तुलना में इस पर तीन गुना अधिक व्यय किया है। सड़क नेटवर्क, पुलों की लंबाई और सुरंगों की संख्या में पहले की तुलना में काफी वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय समुदायों के लिए कनेक्टिविटी बढ़ी है और हमारे सशस्त्र बलों के लिए बेहतर रसद सहायता प्रदान की गई है।”

बता दें कि लद्दाख के कुछ हिस्सों को शामिल करते हुए चीन द्वारा अपने शिनजियान के होतान इलाके में दो नए कस्बे बसाए गए हैं। इनमें से एक का नाम हेआन और दूसरे का नाम हेकांग रखा गया है। चीन में काउंटी एक प्रशासनिक इकाई है, जिसे ‘श्येन’ कहा जाता है। यह नगरपालिका से नीचे की ईकाई है। इसे आम भाषा में कस्बा कहा जा सकता है। काउंटी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्र आ सकते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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