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सुब्हानी हाजा ने इराक में IS से ली जिहादी ट्रेनिंग, केरल में जमा किए रासायनिक विस्फोटक: NIA कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

एनआईए द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज़ में बताया गया है कि वह लगातार आईएसआईएस से संपर्क में था। वहाँ से आदेश मिलने पर उसने रासायनिक विस्फोटक इकट्ठा करना शुरू किया था। मोइदीन को एनआईए ने साल 2016 में गिरफ्तार किया था।

केरल के कोच्चि स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने सोमवार (28 सितंबर 2020) को ISIS आतंकी सुब्हानी हाजा मोइदीन को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। उस पर 2.10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। सुब्हानी इस्लामिक स्टेट (आईएस) में भर्ती होने के लिए इराक गया था।

शुक्रवार (25 सितंबर 2020) को अदालत ने मोइदीन को दोषी करार दिया था। उसी दिन अदालत ने सोमवार को सज़ा सुनाने का आदेश जारी किया था। मोइदीन जिहाद के लिए प्रशिक्षण हासिल करने के इरादे से इराक गया था।उस पर गैर कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया था

एनआईए द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज़ में बताया गया है कि वह लगातार आईएसआईएस से संपर्क में था। वहाँ से आदेश मिलने पर उसने रासायनिक विस्फोटक इकट्ठा करना शुरू किया था। मोइदीन को एनआईए ने साल 2016 में गिरफ्तार किया था। साल 2015 के दौरान पेरिस में आतंकवादी हमला हुआ था। मोइदीन पर आरोप है कि उसने हमले के एक आरोपित सालाह अब्देसलाम के साथ मिल कर हथियारों का प्रशिक्षण लिया था।

इस आतंकवादी हमले में कुल 130 लोगों की जान गई थी। मोइदीन उस आतंकवादी हमले का आरोपित था, इसलिए फ्रांस की पुलिस साल 2018 में उसका बयान दर्ज करने के लिए भारत भी आई थी। ख़बरों के मुताबिक़ साल 2015 में मोइदीन तुर्की के ज़रिए इराक पहुँचा था और वहाँ वह आईएस में शामिल हो गया। प्रशिक्षण के बाद उसे मोसुल भेज दिया गया था। लड़ाई के दौरान अपने साथियों को मरते देख उसने देश लौटने का फैसला किया था।  

उसने देश के कई हिस्सों में आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए तमिलनाडु के शिवकाशी से रासायनिक विस्फोटक जमा किए थे। केरल के इस आतंकवादी को 26 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान भारतीय दंड संहिता की धारा 120 (बी) (आपराधिक षड्यंत्र), 125, यूएपीए की धारा 20 (आतंकवादी संगठन या गतिविधि में शामिल होना के तहत दोषी पाया गया है। इसके आलावा विशेष अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 38 और 39 के तहत दोषी पाया।

पूछताछ में मोइदीन ने इस बात को स्वीकार किया था कि वह आईएसआईएस के साथ मिल कर ईराक के खिलाफ जंग लड़ रहा था। यह एक बड़ा कारण था जिसकी वजह से एनआईए ने उस पर धारा 125 लगाई जो कि बहुत कम मामलों में लगाया जाता है। उसने यह भी बताया था कि भारत लौटने के बाद उसने यहाँ आईएसआईएस के आतंकवादी सेल की ज़िम्मेदारी सँभाल ली थी। इसके तहत देश के कई इलाकों में आतंकवादी हमले अंजाम देने की योजना बनाई गई थी।  

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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