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इतना अफ़सोस है तो 40 को सौंप दीजिए पब्लिक में मारने के लिए: मुफ़्ती से JNU प्रोफ़ेसर

अमिता सिंह ने अपने बयान में ये भी कहा कि महबूबा मुफ़्ती के आदेश पर तीन चेकिंग बैरियर हटाए गए थे जिससे RDX लिए वह आतंकी पकड़ में नहीं आ सका और इतना बड़ा हमला करने में सफल रहा।

घाटी के बाहर कश्मीरियों के ख़िलाफ़ हमलों और “सांप्रदायिक घृणा” के ख़बरों के बीच, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने अब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ “मनगढ़ंत कहानियाँ और हास्यास्पद आरोप” लगाने के लिए कार्रवाई की माँग की है।

पुलवामा मामले पर JNU की लॉ गवर्नेंस एवं आपदा अध्ययन की प्रोफ़ेसर अमिता सिंह ने महबूबा मुफ़्ती को ट्वीट करते हुए कहा कि यदि पुलवामा पर उनको ज़्यादा अफ़सोस है तो वो अपने 40 लोग सार्वजानिक तौर पर मारने के लिए दे सकती हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अमिता सिंह ने अपने बयान में ये भी कहा कि महबूबा मुफ़्ती के आदेश पर तीन चेकिंग बैरियर हटाए गए थे जिससे RDX लिए वह आतंकी पकड़ में नहीं आ सका और इतना बड़ा हमला करने में सफल रहा। अमिता सिंह के बयान पर महबूबा मुफ़्ती का कहना है कि वह उन पर केस करेंगी।

पीडीपी ने ट्वीट किया, “JNU को प्रोफ़ेसर महबूबा मुफ़्ती पर मनगढंत कहानियाँ और बेबुनियाद आरोप लगा रही हैं और 40 लोगों के सार्वजानिक फाँसी की माँग कर रही हैं। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। दिल्ली पुलिस को यह मामला संज्ञान में लेना चाहिए।”

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षा देने वाला कोई शख़्स ऐसा कैसे हो सकता है? अगर वह वाकई शिक्षित हैं तो? या फिर जानबूझकर कश्मीरियों को कष्ट पहुँचाना चाहती हैं। विडंबना यह है कि वह लॉ गवर्नेंस की अध्यापिका हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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