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कौन है ललित झा, संसद में घुसपैठ का प्लान B भी कर रखा था तैयार: बिहार से लेकर कोलकाता तक कनेक्शन, जानिए मास्टरमाइंड के बारे में सब कुछ

संसद में घुसपैठ मामले के मास्टरमाइंड ललित झा की गिरफ्तारी के बाद कई खुलासे हो रहे हैं। इसी क्रम में एक जानकारी यह भी सामने आई है कि ललित झा ने संसद में हड़कंप मचवाने के 2 प्लान बनाए हुए थे। इसे नाम दिया गया था प्लान-A और प्लान-B का।

संसद में घुसपैठ मामले के मास्टरमाइंड ललित झा की गिरफ्तारी के बाद कई खुलासे हो रहे हैं। इसी क्रम में एक जानकारी यह भी सामने आई है कि ललित झा ने संसद में हड़कंप मचवाने के 2 प्लान बनाए हुए थे। इसे नाम दिया गया था प्लान-A और प्लान-B का।

प्लान-A में यही था कि संसद के अंदर सागर शर्मा और मनोरंजन डी जाएँगे क्योंकि उनके पास बन गए थे। इसी प्लान के तहत संसद के बाहर अमोल और नीलम ट्रांसपोर्ट भवन की ओर से संसद के करीब जाएँगे और वहाँ कलर बम जलाएँगे।

प्लान-B में था कि किसी वजह से अगर नीलम और अमोल संसद के करीब नहीं पहुँच पाते तो उनकी जगह महेश और कैलाश दूसरी ओर से किसी तरह से संसद के करीब पहुँचते और मीडिया के कैमरों के आगे कलर बम जलाते और नारेबाजी करते।

बता दें कि संसद में घुसपैठ की लंबी चौड़ी प्लानिंग करने वाला मास्टरमाइंड ललित झा गुरुवार (14 दिसंबर 2023) को गिरफ्तार किया गया। अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार से यही पता चला है कि वह बिहार का रहने वाला है। लेकिन कुछ समय से पहले पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में आदिवासी शिक्षा पर काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन, समयाबादी सुभाष सभा समूह का अध्यक्ष था। वह समूह के विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय था।

इसके अलावा कुछ समय से वो एनजीओ नीलाक्ष आइच के लिए काम करता था। वहाँ वो जनरल सेक्रेट्री है। बंगाल में उसका ठिकाना बड़बाजार इलाके में एक किराए के मकान में था। उसकी तलाश जब शुरू हुई तो पुलिस ने बिहार पुलिस से संपर्क साधा। लेकिन उसके बारे में वहाँ से सूचना नहीं मिली। इसके बाद उस एनजीओ से संपर्क किया गया, जिसके लिए वह काम करता था मगर फिर भी कोई सूचना नहीं मिली।

बस इतना पता चला कि वह शहीद भगत सिंह से प्रेरित होने के नाम पर ये सब कर रहा था। केस के अन्य आरोपित सागर शर्मा, मनोरंजन, नीलम, अमोल शिंदे और ललित झा सब के सब डेढ़ वर्ष पहले सामाजिद मुद्दों को एक तरीके से उठाने के लिए इन्होंने मैसूर में बैठक की थी। इन सबके बीच आखिरी मुलाकात इंडिया गेट पर हुई थी।

13 दिसंबर को घटना को अंजाम देने से पहले चारों आरोपितों ने अपने अपने फोन ललित झा को सौंपे थे क्योंकि उन्हें पता था कि ये कारनामा करने के बाद वो लोग पकड़े जाएँगे। ऐसे में पुलिस के हाथ कोई सबूत न लगे इसलिए उन्होंने अपने फोन ललित को दे दिए थे। ललित घटना के वक्त तक संसद के बाहर खड़ा था, अमोल-नीलम की वीडियो बनाकर वो वहाँ से निकल गया।। उसने राजस्थान के कुचामन में जाकर अपने दोस्त महेश के साथ सभी आरोपितों के फोन को जलाया और फिर दिल्ली में आकर सरेंडर किया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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