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NIA ने म्यांमार में आतंकियों को ड्रोन ट्रेनिंग देने आए विदेशियों को पकड़ा, पढ़ें- जब कुकी आतंकियों ने मणिपुर के गाँवों पर ड्रोन से गिराए थे बम

सितंबर 2024 में कुकी आतंकियों ने जिन ड्रोन का इस्तेमाल किया उन्हें ग्रेनेड ले जाने और दागने के लिए मॉडिफाई किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह तरीका 2021 में म्यांमार में हुए तख्तापलट के दौरान वहाँ के उग्रवादी समूहों जैसा ही था।

NIA ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए इस महीने की शुरुआत में 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया। इनमें छह यूक्रेन के नागरिक और एक अमेरिकी भाड़े का लड़ाका मैथ्यू एरन वैनडाइक शामिल है। यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ से पकड़ा गया जबकि अमेरिकी नागरिक वैनडाइक को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया।

पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष NIA अदालत ने सभी आरोपितों को पूछताछ के लिए NIA की हिरासत में भेज दिया है। यह मामला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि पहली बार किसी आतंकी साजिश की जाँच में यूरोप और अमेरिका के नागरिकों को इस तरह गिरफ्तार किया गया है।

NIA के मुताबिक, ये सभी विदेशी नागरिक टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। इसके बाद ये लोग बिना जरूरी अनुमति (Restricted Area Permit) के अवैध तरीके से मिजोरम पहुँच गए। वहाँ से ये म्यांमार गए और वहाँ के जातीय सशस्त्र समूहों से संपर्क किया। जाँच एजेंसी ने यह भी बताया कि ये विदेशी नागरिक अपने साथ बड़ी मात्रा में ड्रोन लेकर आए थे और यूरोप से हथियार और हार्डवेयर भारत के रास्ते सप्लाई कर रहे थे।

खास बात यह है कि अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक ने साल 2014 में ‘Sons of Liberty International’ (SOLI) नाम की एक नॉन-प्रॉफिट सिक्योरिटी कंपनी शुरू की थी। वैनडाइक खुद 2011 में लीबिया में मुअम्मर गद्दाफी की सरकार के खिलाफ लड़ रहे विद्रोहियों के साथ भी लड़ चुका है। उसकी कंपनी अलग-अलग सशस्त्र समूहों को सैन्य ट्रेनिंग देने का काम करती है।

केंद्रीय एजेंसी ने अदालत को बताया कि ये विदेशी नागरिक म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग देने की साजिश रच रहे थे। इसमें ड्रोन ऑपरेशन, असेंबली, जैमिंग तकनीक और इससे जुड़ी अन्य चीजें सिखाने की योजना शामिल थी।

2024 में कुकी आतंकियों द्वारा ड्रोन से हमले

पहली नजर में इन घटनाओं को देखकर ऐसा लग सकता है कि ये विदेशी नागरिक सिर्फ पड़ोसी देश म्यांमार में चल रही उग्रवादी गतिविधियों की मदद कर रहे थे और उनका भारत से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन इस फैसले पर पहुँचने से पहले सितंबर 2024 में कुकी-मैतेई संघर्ष के बीच मणिपुर में हुए ड्रोन हमलों को याद करना भी जरूरी है।

1 सितंबर 2024 को कुकी आतंकी समूहों ने ड्रोन का इस्तेमाल करके मैतेई गांवों पर हमला किया। ये हमले बेहद खतरनाक थे क्योंकि पहली बार देश के अंदर किसी आतंकी या उग्रवादी समूह ने ड्रोन के जरिए हमले किए थे।

इस घटना से सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हो गई थीं। कुकी आतंकियों ने ड्रोन के जरिए 40 से ज्यादा बम गिराए थे। इम्फाल वेस्ट के काउट्रुक और कदंगबंद जैसे मैतेई गाँवों को निशाना बनाया गया। इन ड्रोन हमलों में कई आम नागरिकों की मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

ड्रोन के जरिए बम गिराने की इस घटना ने इलाके में चल रहे जातीय संघर्ष को और ज्यादा खतरनाक बना दिया। यह संघर्ष मई 2023 में शुरू हुआ था और करीब एक साल बाद इस तरह का बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। मणिपुर पुलिस ने इन ड्रोन हमलों को ‘अभूतपूर्व’ बताया यानी ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। पुलिस के मुताबिक, कुकी आतंकियों ने हाई-टेक ड्रोन का इस्तेमाल करके रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) भी दागे और मैतेई गाँवों को निशाना बनाया।

खुफिया एजेंसियों ने यह भी पुष्टि की कि काउट्रुक गाँव पर हमले में कुकी आतंकियों ने लंबी दूरी की स्नाइपर राइफल्स का भी इस्तेमाल किया। खासतौर पर RPG जैसे एडवांस हथियारों का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता की बात बन गया। ड्रोन से बम गिराने के लिए थोड़े बहुत बदलाव करके काम चल सकता है लेकिन RPG दागने के लिए पूरी तरह मिलिट्री-ग्रेड ड्रोन और खास तकनीकी जानकारी की जरूरत होती है जो स्थानीय स्तर पर आसानी से संभव नहीं है।

मणिपुर 2024 ड्रोन हमलों में विदेशी साजिश के संकेत

सुरक्षा एजेंसियों को 2024 में मणिपुर में हुए ड्रोन हमलों में विदेशी हाथ होने के संकेत मिले। एजेंसियों के मुताबिक, इन हमलों को अंजाम देने में ऐसे लोगों की भूमिका दिखी जो ड्रोन के जरिए विस्फोट करने में ट्रेनड और एक्सपर्ट थे। साथ ही, किसी विदेशी एजेंसी की मदद या समर्थन की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया। हमलों के बाद जारी बयान में मणिपुर पुलिस ने कहा कि इस तरह से ड्रोन के जरिए बम गिराने की घटना पहले कभी इस क्षेत्र के लंबे समय से चल रहे जातीय संघर्ष में नहीं देखी गई थी।

पुलिस ने अपने बयान में कहा, “इम्फाल वेस्ट के काउट्रुक में हुए हमले में कुकी आतंकियों ने हाई-टेक ड्रोन के जरिए कई RPG दागे। आम युद्ध में ड्रोन से बम गिराने की घटनाएँ देखी जाती रही हैं लेकिन सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर इस तरह ड्रोन का इस्तेमाल इस संघर्ष को एक नए और खतरनाक स्तर पर ले जाता है।

हमले के बाद भविष्य में ऐसे खतरों से निपटने के लिए असम राइफल्स ने मणिपुर में एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए। जाँच के दौरान NIA ने उस सप्लाई चेन का भी पता लगा लिया जिसके जरिए ये ड्रोन मणिपुर तक पहुँचे थे। एजेंसी ने मोटबुंग के गामंगाई गाँव के रहने वाले खैगौलेन किपजेन उर्फ डेविड को इस मामले में अहम कड़ी के तौर पर पहचाना जिसने ड्रोन और उससे जुड़े सामान को इकट्ठा करके मणिपुर तक पहुँचाया था।

जाँच में यह भी सामने आया कि उसे ये ड्रोन और उपकरण नई दिल्ली के रमेश नगर के रहने वाले मयंक शर्मा और हरियाणा के रोहतक के विक्रम चौधरी ने सप्लाई किए थे। किपजेन ने इन दोनों को ड्रोन देने के बदले बड़ी रकम भी चुकाई थी। इसके अलावा लाइकांगबाम अल्बर्ट सिंह का नाम भी सामने आया जिसने इनसे ड्रोन और बैटरियाँ खरीदी थीं।

भारत-म्यांमार बॉर्डर: हथियार और ड्रग्स तस्करी का आसान रूट

सितंबर 2024 में कुकी आतंकियों ने जिन ड्रोन का इस्तेमाल किया उन्हें ग्रेनेड ले जाने और दागने के लिए मॉडिफाई किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह तरीका 2021 में म्यांमार में हुए तख्तापलट के दौरान वहाँ के उग्रवादी समूहों जैसा ही था। भारत-म्यांमार की असुरक्षित सीमा लंबे समय से हथियार, ड्रग्स की तस्करी का रास्ता है। NIA के अनुसार, म्यांमार के जातीय उग्रवादी समूह पूर्वोत्तर भारत के स्थानीय संगठनों को समर्थन देते रहे हैं।

यह बॉर्डर ड्रग्स तस्करी का भी बड़ा रास्ता है। अफीम, हेरोइन और बड़े पैमाने पर बनने वाली मेथ जैसी ड्रग्स इसी रास्ते से भारत पहुँचती हैं। UNODC के मुताबिक, म्यांमार के शान और चिन राज्य दुनिया में अवैध ड्रग्स के सबसे बड़े केंद्र बन चुके हैं। 2023 में म्यांमार ने अफगानिस्तान को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ा अवैध अफीम उत्पादक देश बन गया। 2025 तक अफीम की खेती में 17% की बढ़ोतरी हुई, खासकर भारत से सटे इलाकों में।

भारत में इसका असर साफ दिखा और एम्फेटामिन ड्रग्स की बरामदगी 2023 के 34 क्विंटल से बढ़कर 2024 में 80 क्विंटल हो गई। नवंबर 2024 में कोस्ट गार्ड ने 5,500 किलो मेथ के साथ म्यांमार की नाव पकड़ी जो अब तक की सबसे बड़ी जब्ती थी। NCB के मुताबिक, ड्रग्स का पैसा अब आतंकवाद और उग्रवाद को फंड कर रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस खतरे को लेकर चेताया है।

NIA ने कोर्ट को बताया कि इसी बॉर्डर के जरिए भारतीय उग्रवादी समूह यूरोप से ड्रोन तकनीक हासिल कर रहे हैं। एजेंसी इन विदेशियों की फंडिंग का सोर्स पता करने के लिए उनकी हिरासत चाहती है।

कड़ियाँ जोड़ने पर क्या सामने आता है?

इन सभी तथ्यों को जोड़कर देखें तो मामला काफी गंभीर नजर आता है। लड़ाई का अनुभव रखने वाले विदेशी नागरिक अगर म्यांमार के उग्रवादी समूहों को ट्रेनिंग दे रहे हैं और भारत की जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय कई उग्रवादी समूह पहले से ही म्यांमार की तरफ से हथियार और फंडिंग ले रहे हैं जिसमें ड्रग्स का पैसा और संदिग्ध विदेशी संगठनों की भूमिका बताई जाती है।

ऐसे में भारत में इन विदेशी नागरिकों की मौजूदगी को सिर्फ एक साधारण घटना नहीं माना जा सकता कि वे यहाँ से होकर म्यांमार जा रहे थे। यह मामला कहीं ज्यादा बड़ा और गंभीर दिखता है। यह पूरी घटना इस ओर इशारा करती है कि भारत के अंदरूनी हालात और कमजोरियों का फायदा उठाकर कुछ विदेशी ताकतें देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं जिसमें एक बड़ी साजिश की आशंका नजर आती है।

(यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ा जा सकता है)

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