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बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में ब्लास्ट के बाद जिस टोपी को छोड़ गया था शाजिब, वही NIA के लिए बन गया सुराग: बंगाल में मास्टरमाइंड अब्दुल ताहा के साथ छिपा था

NIA को यहाँ से इसके कुछ फुटेज मिले थे जिनमें वह सिटीबस में आते जाते देखा गया था। वह कैफे से 100 मीटर दूर बस से आया था। इसके अलावा एक और सीसीटीवी से यह आदमी टोपी लगाए दिखा था। NIA को यहाँ से एक टोपी भी मिली थी। बताया गया कि यह टोपी आतंकी ने यहीं छोड़ी थी।

NIA ने बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में धमाका करने वाले दो आतंकी अब्दुल मतीन ताहा और मुस्सविर हुसैन शाजिब को पश्चिम बंगाल के दीघा से पकड़ लिया। एजेंसी 40 दिनों की मशक्कत के बाद इन आतंकियों को पकड़ पाई। इस पूरी कवायद में एजेंसी को कई छोटे छोटे सुराग लगे, जिनकी सहायता से इन दोनों को पकड़ा गया।

बेंगलुरु के व्यस्त रामेश्वरम कैफे में धमाका करने वाले आतंकी मुस्स्विर और इस हमले के मास्टरमाइंड अब्दुल मतीन ताहा की पहचान स्थापित करने के लिए एजेंसी आसपास के कई सीसीटीवी कैमरा की जाँच की थी। आनेजाने वालों का डाटा निकाला था। इस में एक आतंकी कैफे में हाथ धोने की जगह पर बम रखते हुए देखा गया था। NIA ने और भी जाँच की जिससे उसे इस आतंकी के धमाका स्थल तक आने की जानकारी निकाली।

NIA को यहाँ से इसके कुछ फुटेज मिले थे जिनमें वह सिटीबस में आते जाते देखा गया था। वह कैफे से 100 मीटर दूर एक स्टॉप पर बस से आया था और इसी से वापस भी गया था। इसके अलावा एक और सीसीटीवी से एक संदिग्ध आदमी टोपी लगाए दिखा था। NIA को यहाँ से एक टोपी भी मिली थी। बताया गया कि यह टोपी आतंकी ने कपड़े बदलने वाली जगह पर छोड़ी थी। इस टोपी पर एक निशान बना हुआ था, यह अपने आप में विशेष था और इस तरह की बहुत कम संख्या में टोपियाँ बनी थी।

NIA के जाँच करने पर पता चला कि यह टोपी चेन्नई से खरीदी गई थी। इनके विषय में यह भी जानकारी सामने आई थी कि यह फर्जी या बिना किसी आईडी के लॉज या होटल में रुकते थे। एजेंसी को शक था कि यह लोग ऐसे होटल और लॉज में रुकते हैं जहाँ आईडी की माँग नहीं की जाती। यह लोग हिन्दू नामों का उपयोग करके फर्जी आईडी का भी उपयोग करते थे।

NIA ने इसको लेकर भी देश के उन सभी जगहों पर नजर बनाई थी जहाँ इनके जाने की संभावना थी। इनको एजेंसी लगातार ट्रैक कर रही थी। एजेंसी को एक बड़ी सफलता तब हाथ लगी जब उसने इनके मददगार मुजम्मिल को पकड़ा। मुजम्मिल ने इन्हें शहर से बाहर भागने में मदद की थी।

NIA को जब इस बात की पुख्ता जानकारी हो गई तब उसने पश्चिम बंगाल के दीघा में छापा मार कर इन दोनों आतंकी पकड़ लिया। इन्हें शुक्रवार (12 अप्रैल, 2024) को कोर्ट में पेश करके रिमांड पर लिया जाएगा। दोनों को 12 अप्रैल की सुबह गिरफ्तार किया गया। इसी के साथ अब कैफे में हुए धमाके की पूरी सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

यह दोनों आतंकी धमाके के पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों की राडार पर थे। बताया गया है कि यह दोनों 2020 से ही गायब थे। यह अल हिन्द मॉड्यूल में शामिल थे। NIA की दबिश पर यह गायब हो गए थे। इसके बाद से यह आतंक की प्लानिंग कर रहे थे। इन्होने मिलकर बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में मार्च 2023 में धमाके को अंजाम दिया।

गौरतलब है कि 1 मार्च, 2024 को बेंगलुरु के वाइटफील्ड इलाके में स्थित रामेश्वरम कैफे में दोपहर में एक धमाका हुआ था। इस धमाके में 9 लोग घायल हुए थे। धमाके के पीछे की जानकारी बाद में निकल कर सामने आई थी। इसके बाद इस मामले की जाँच NIA ने चालू कर दी थी। तब से ही एजेंसी उनको पकड़ने का प्रयास कर रही थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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