Monday, June 17, 2024
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साकी-आलम-जुल्फिकार ने लूटी साड़ी की दुकान, पैसों से खरीदा बम बनाने का सामान: ISIS के पुणे मॉड्यूल पर NIA-ATS का खुलासा

NIA और ATS की जाँच में खुलासा हुआ है कि ISIS के पुणे मॉड्यूल से जुड़े तीन आरोपितों साकी, आलम और जुल्फिकार अली बड़ोदावाला ने अप्रैल 2023 में सतारा में एक साड़ी दुकान में लूट की थी। उन्होंने दुकान मालिक अशोक कुमार पर बन्दूक तान कर यहाँ से ₹1 लाख लूट लिए थे।

ISIS के पुणे मॉड्यूल मामले में एक नया खुलासा हुआ है। पता चला है कि इस मॉड्यूल के तीन सदस्यों ने सतारा जिले में पिछले वर्ष एक साड़ी की दुकान में लूट की घटना को अंजाम दिया था। इस लूट से मिले पैसे इकट्ठा करके वह बम बना रहे थे।

NIA और ATS की जाँच में खुलासा हुआ है कि ISIS के पुणे मॉड्यूल से जुड़े तीन आरोपितों साकी, आलम और जुल्फिकार अली बड़ोदावाला ने अप्रैल 2023 में सतारा में एक साड़ी दुकान में लूट की थी। उन्होंने दुकान मालिक अशोक कुमार पर बन्दूक तान कर यहाँ से ₹1 लाख लूट लिए थे।

इस पैसे का उपयोग आतंक की फंडिंग में किया गया था। इससे बम बनाने के लिए सामान खरीदा गया था। इन तीनों आतंकियों ने ही इस पूरी घटना को अंजाम दिया था। इनको हाल ही में एक कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ महाराष्ट्र ATS ने मामले में आगे की जाँच के लिए इनकी रिमांड माँगी।

महाराष्ट्र ATS इनसे पूछताछ करके बम के सम्बन्ध में और जानकारी इकट्ठा करना चाहती है। वह इस घटना में प्रयुक्त बाइक और बन्दूक का पता भी लगाना चाहती है। उसने कोर्ट से इन तीनों की 14 दिन की रिमांड मांगी है। महाराष्ट्र ATS ने कोर्ट के सामने एक रिपोर्ट भी रखी है।

ATS का पक्ष सुन कर कोर्ट ने इन तीनों की 7 दिन की रिमांड पुलिस को दी है। गौरतलब है कि ISIS के पुणे मॉड्यूल का मामला पिछले वर्ष खुलना चालू हुआ था। पहले इस मामले की जाँच महाराष्ट्र ATS और फिर NIA ने करना चालू कर दी थी।

इस चोरी में शामिल जुल्फिकार बड़ोदावाला युवाओं को आतंकी बनाने की ट्रेनिंग देता था। NIA की चार्जशीट में सामने आया था कि पडघा गाँव निवासी जुल्फिकार अली बड़ौदावाला और पुणे निवासी जुबैर शेख ने साल 2015 में युवाओं को कट्टरपंथी बनाना शुरू कर दिया था। इसके लिए व्हाट्सऐप पर ग्रुप बनाकर आईएसआईएस के समर्थन में पोस्ट किए जाते थे।

एनआईए ने एक गवाह के हवाले से विस्तार में इसकी जानकारी दी थी कि कैसे वह 2011-2012 में जुबैर शेख के संपर्क में आया था, जिसे एनआईए ने एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया है। एक गवाह ने कहा है कि साल 2014 में शेख ने उसे ‘यूनिटी इन मुस्लिम उम्मा’ और ‘उम्मा न्यूज’ नाम के व्हाट्सऐप ग्रुपों में जोड़ा था।

मिडडे की रिपोर्ट के मुताबिक, गवाह ने अपने बयान में कहा था, “हमारी शुरुआती मुलाकातों में हमारी दोस्ताना और कैजुअल बातचीत हुई। हालाँकि, धीरे-धीरे जुल्फिकार उर्फ ​​लालाभाई, सिमाब काजी और तल्हा खान ने शिर्क, खलीफा, जिहाद, इस्लामिक स्टेट ऑफ सीरिया एंड इराक (ISIS) आदि विषयों पर चर्चा शुरू कर दी।”

आगे उसने बताया, “कई बार उन्होंने मेरे सहित अन्य सदस्यों को भी आईएसआईएस में भर्ती करने की कोशिश की। यही नहीं, गैर-मुस्लिमों को मारने के बारे में भी इन ग्रुपों पर चर्चा होती थी। इसमें आईएसआईएस के आतंकी कहते थे कि हमें काफिरों को मारना है और इसके लिए हमारे पास सारी चीजें हैं। सही समय आएगा तब तुम्हें सब बता देंगे।”

क्या था पुणे मॉड्यूल?

दरअसल, पुलिस ने जुलाई 2023 में चोरी की बाइक के साथ 2 लोगों को पकड़ा था। शुरुआत में पुलिस ने इसमें शामिल लोगों को वाहन चोर समझा, पर जाँच में उनके ISIS नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई। इसके बाद इस साल अगस्त माह में पुणे के कोंढवा स्थित एक घर में दबिश डाली। 

दबिश के दौरान बम बनाने और ब्लास्ट करने की ट्रेनिंग लेते हुए 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 3 अन्य संदिग्ध फरार हो गए थे। फरार होने वालों के नाम रिज़वान अब्दुल हाजी, अब्दुल्लाह फ़ैयाज़ शेख और तलहा लियाकत खान है। इन तीनों के साथ आतंकी शाहनवाज पर भी 3-3 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। इसके बाद शाहनवाज को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एनआईए के साथ मिलकर गिरफ्तार किया था।

NIA ने इस मामले में नवम्बर 2023 में एक चार्जशीट भी दायर की थी। NIA की चार्जशीट में पुणे ISIS मॉड्यूल के सात सदस्यों की जानकारी दी गई थी। इसमें बताया गया था कि इस आतंकवादी संगठन के सदस्य गैर-मुस्लिमों पर हमले की योजना बना रहे थे। ये लगातार विभिन्न तरीकों से गैर-मुस्लिमों को जान से मारने पर चर्चा कर रहे थे। इनका लक्ष्य मुस्लिम युवाओं को शिक्षा देकर देश में शरिया कानून स्थापित करना था।

चार्जशीट में यह भी बताया गया था कि इन आतंकियों ने मुस्लिमों के बीच यह धारणा बनाने की कोशिश की कि इस्लाम में लोकतंत्र ‘हराम’ है और केवल आईएसआईएस ही शरिया का पालन करता है। इसके अलावा उन्होंने सभी मुस्लिमों से आईएस का समर्थन करने का आह्वान किया था। चार्जशीट में गवाहों के दर्ज बयान के आधार पर कहा गया था कि ये वॉट्सऐप पर कट्टरपंथी ग्रुप से जोड़े गए थे, जिसमें मुस्लिमों पर अत्याचार की कहानियाँ बताकर उन्हें गैर-मुस्लिमों के खिलाफ भड़काया जा रहा था।

इसी मामले में साकिब नाचान नाम के आतंकी को भी गिरफ्तार किया गया था। साकिब ने अपने मुंबई बोरीवली स्थित घर को आतंकवाद की ट्रेनिंग के लिए एक सेंटर पॉइंट के तौर पर प्रयोग किया था। नाचन जुल्फिकार अली बड़ोदावाला, मोहम्मद इमरान खान, मोहम्मद यूनुस साकी, सिमाब नसीरुद्दीन काजी और अब्दुल कादिर पठान और कुछ अन्य संदिग्धों के साथ मिल कर ISIS मॉड्यूल खड़ा कर रहा था। इस गैंग में इमरान खान और मोहम्मद यूनुस साकी ‘अल सूफा आतंकवादी संगठन के सदस्य थे, जो फरार चल रहे थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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