Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षासेना को सब्जी सप्लाई की आड़ में ISI के लिए जासूसी कर रहा था...

सेना को सब्जी सप्लाई की आड़ में ISI के लिए जासूसी कर रहा था हबीब खान, राजस्थान से दिल्ली पुलिस ने दबोचा

इसी महीने की शुरुआत में पंजाब पुलिस ने ISI के लिए जासूसी करने वाले सेना के 2 जवानों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से अहम दस्तावेज बरामद हुए थे।

दिल्ली पुलिस ने राजस्थान से हबीब खान को हिरासत में लिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उस पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने का आरोप है। वह सेना को सब्जी सप्लाई करने की आड़ में गोपनीय दस्तावेज भेजता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मूलरूप से बीकानेर का रहने वाला हबीब खान भारतीय सेना से कई वर्षों से कॉन्ट्रेक्ट से जुड़ा था। वह सेना के लिए सब्जियाँ सप्लाई का काम करता था। उसे पोखरण से पकड़ा गया। अब जाँच एजेंसियाँ उसके नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।

हबीब की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस अब आगरा के एक शख्स पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच पिछले कुछ समय से हबीब खान पर नजर रखे हुए थी। मंगलवार (13 जुलाई 2021) को उसे हिरासत में लेने के बाद बुधवार को दिल्ली लाया गया। फिलहाल दिल्ली पुलिस, आईबी समेत कई एजेंसियाँ उससे पूछताछ करने में जुटी हुई हैं।

गौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में पंजाब पुलिस ने ISI के लिए जासूसी करने वाले सेना के 2 जवानों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से अहम दस्तावेज बरामद हुए थे। पंजाब पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिनकर गुप्ता ने बताया था, “पाकिस्तान की ISI के लिए जासूसी और उन्हें जानकारी लीक करने के आरोप में पंजाब पुलिस ने सेना के 2 जवानों को गिरफ्तार किया है। भारतीय सेना के कामकाज और तैनाती से संबंधित गोपनीय दस्तावेज उनके पास से बरामद किए गए हैं। आरोपितों ने आईएसआई के साथ 900 गोपनीय दस्तावेज साझा किए थे।”

इससे पहले कर्नाटक पुलिस और सैन्य खुफिया की दक्षिणी कमान ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले एक अवैध नेटवर्क का खुलासा किया था। नेटवर्क से जुड़े लोग छह टेलीफोन एक्सचेंज की मदद से सैन्य प्रतिष्ठानों की सूचनाओं और सेना की गतिविधियों को अपने पाकिस्तानी आकाओं तक पहुँचाते थे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -