Sunday, May 19, 2024
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भारत में मस्जिदें बनाने के लिए विदेशी फंडिंग, महानगरों में रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने की साजिश: देवबंद से जुड़े आतंकियों के तार, यूपी ATS ने सेंट-टोपी वाले को पकड़ा

इसी केस में पकड़ा गया एक अन्य आरोपित भी देश विरोधी कृत्यों में शामिल था। वो खुद को गाज़ी बताता था। उसका नाम अबू हुरैरा है जो भले ही पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले का रहने वाला था लेकिन फिलहाल वो दारुल उलूम देवबंद की छत्ता मस्जिद में रहता था।

उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (ATS) ने 11 अक्टूबर, 2023 को 10 संदिग्ध आतंकियों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। इनके नाम आदिल उर रहमान अशरफी, अबू हुरैरा गाज़ी, शेख नज़ीबुल हक, मोहम्मद राशिद, कफीलुद्दीन, अज़ीम, अब्दुल अव्वल, अबु सालेह, अब्दुल गफ्फार और अब्दुल्ला गाजी हैं। इन सभी पर विदेशों से अवैध तौर पर पैसे मँगवा कर भारत में मस्जिदें बनवाने, रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में अवैध तौर पर बसाने और देश विरोधी गतिविधियाँ चलाने का आरोप है।

इस पूरे मामले में खास बात ये है कि यूपी ATS द्वारा गिरफ्तार अधिकतर साजिशकर्ता देवबंद के दारुल उलूम से जुड़े पाए गए। इन 10 आरोपितों में दिल्ली निवासी अब्दुल अव्वल अवैध तरीके से उत्तर प्रदेश, दिल्ली और असम के निवासियों के कागजात को हासिल कर के बैंक खाते खुलवाता है। बाद में वो खाते दिल्ली के ही अब्दुल गफ्फार को सौंप देता है। गफ्फार इन खातों में विदेशों से पैसे मँगवाता है। ये पैसे मँगवाने में अबु सालेह भी गफ्फार की मदद करता है।

विदेशों और देश के कई अन्य हिस्सों में मँगवाया गया ये धन हवाला के जरिए नजीबुल शेख तक पहुँचाया जाता था। नजीबुल शेख की सहारनपुर में दारुल उलूम देवबंद के पास टोपी और परफ्यूम की दुकान हैं।

बंगाल का नजीबुल, दारुल उलूम के सामने सेंट-टोपी की दुकान

ATS के मुताबिक, मूल रूप से पश्चिम बंगाल और अस्थाई तौर पर देवबंद में रह रहे नजीबुल ने बांग्लादेशी अतीक उर रहमान को अपने सहयोगी के रूप में रखा हुआ था। अतीक उर रहमान ने फर्जी कागजात से भारत का आधार व पैन कार्ड आदि बनवा रखा था। ये सभी एक गैंग के तौर पर काम कर रहे थे जो बांग्लादेशियों व रोहिंग्या नागरिकों को भारत में घुसपैठ करवाते थे और उनके भारतीय कागजात बनवाया करते थे। इन बांग्लादेशियों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में बसाया जा रहा था।

11 अक्टूबर, 2023 को ATS को मुखबिर से सूचना मिली कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ संदिग्ध लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर मौजूद हैं। ATS ने दबिश दे कर आदिलुर रहमान अशर्फी को दबोच लिया। इधर इसी दिन ATS की सहारनपुर यूनिट ने अबू हुरैरा और नजीबुल शेख को दबोच लिया। इन सभी से ATS मुख्यालय लखनऊ ला कर पूछताछ की गई। नजीबुल ने खुद को पश्चिम बंगाल का निवासी बताया जो फिलहाल देवबंद में दारुल उलूम के सामने परफ्यूम और टोपी की दुकान चला रहा था।

पूछताछ में नजीबुल ने कबूल किया कि उसे हवाला से पैसे मिलते थे। वहीं आदिलुर रहमान ने अपना असल नाम आदिल अहमद अशरफी बताया जो मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला है। फर्जी कागजात से भारतीय बना आदिल अहमद फ़िलहाल देवबंद दारुल उलूम में पढ़ाई कर रहा था। इस नेटवर्क ने हाल में ही एक बांग्लादेशी महिला को अवैध तौर पर बॉर्डर पार करवा कर किसी इब्राहिम नाम के भारतीय पुरुष को 70,000 रुपए में बेच दिया था। महिला को बरामद करने के बाद इब्राहिम सहित गिरफ्तार कर लिया गया है, उसके कागजात फर्जी पाए गए हैं। पश्चिम बंगाल के रहने वाले वाले तीसरे आरोपित अबू हुरैरा ने बताया कि वो फिलहाल दारुल उलूम में देवबंद की छत्ता मस्जिद में रहता था।

UP ATS ने इन सभी से इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल उपकरण, मोबाइल, ATM कार्ड, संयुक्त अरब अमीरात की मुद्रा, भारतीय कैश, सिमकार्ड, आधार कार्ड, मदरसे का कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट बरामद किया। इन सभी आरोपितों पर IPC की धारा 120- बी, 419, 420, 467, 468, 471, 370 और विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 14 के तहत कार्रवाई की है। इसमें से 3 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनके नाम आदिल उर रहमान, नजीबुल शेख और हुरैरा गाज़ी हैं। बाकी सभी फरार चल रहे हैं। फिलहाल इस केस की विवेचना ATS के मेरठ यूनिट प्रभारी इंस्पेक्टर धर्मेंद्र यादव कर रहे हैं। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

ऑपइंडिया को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, विदेशी पैसों से मस्जिदों का निर्माण पहले चरण में पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब और बांग्लादेश बॉर्डर के पास पश्चिम बंगाल में होना था। हालाँकि, ATS फिलहाल इस आतंकी नेटवर्क की जड़ और इसके आर्थिक स्रोतों का पता लगाने में जुटी हुई है। साथ ही अभी इन मस्जिदों के निर्माण का मकसद भी सामने आना बाकी है।

दारुल उलूम में लगातार की जा रही थी बांग्लादेशी घुसपैठियों की मदद

उत्तर प्रदेश ATS की जाँच में आदिल उर रहमान अशरफी के पास से दारुल उलूम देवबंद का पहचान पत्र मिला था। वह मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला बताया गया। हालाँकि, बाद में दारुल उलूम ने आदिल उर रहमान को अपना छात्र मानने से इनकार कर दिया था। यद्यपि ऑपइंडिया को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आदिल उर रहमान अक्सर देवबंद के अंदर आया-जाया करता था। वह यहाँ कई बार नमाज़ पढ़ते और पढ़ाते हुए भी देखा गया था।

इसी केस में पकड़ा गया एक अन्य आरोपित भी देश विरोधी कृत्यों में शामिल था। वो खुद को गाज़ी बताता था। उसका नाम अबू हुरैरा है जो भले ही पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले का रहने वाला था लेकिन फिलहाल वो दारुल उलूम देवबंद की छत्ता मस्जिद में रहता था। बांग्लादेशी घुसपैठियों का पैसा अपने खाते में मँगवाने वाला पश्चिम बंगाल में 24 परगना निवासी शेख नजीबुल दारुल उलूम देवबंद के सामने ही लम्बे समय से परफ्यूम और टोपी बेचने की दुकान चला रहा था।

इस से पहले 19 जुलाई, 2023 को UP ATS ने एक अन्य FIR दर्ज की थी। तब ATS ने हबीबुल्लाह मिस्बाह और अहमदुल्लाह को गिरफ्तार किया था। हबीबुल्लाह मूल रूप से बांग्लादेश के दिनाजपुर का रहने वाला निकला था जिसके पास दारुल उलूम देवबंद का परिचय पत्र बरामद हुआ था। वह दारुल उलूम देवबंद के पास रुखसाना बिल्डिंग में रहता था। हबीबुल्लाह कुछ समय तक आदिल उर रहमान का रूम पार्टनर भी रह चुका है। इन अवैध घुसपैठियों ने भी फर्जी तरीके से भारतीय पहचान पत्र बनवा रखे थे।

इन सभी के अलावा ATS ने 28 अप्रैल 2022 को भी एक FIR दर्ज करवाई थी। तब तलहा तालुकदार बिन फारुख नाम के आतंकी को गिरफ्तार किया गया था। तलहा मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला था जो फर्जी कागजातों से भारतीय बन कर दारुल उलूम देवबंद की बिल्डिंग दर ए जदीद के कमरा नंबर 61 में रहता था। ATS को तलहा तालुकदार के पास से दारुल उलूम देवबंद के वजीफे की रसीद भी बरामद हुई थी। पूछताछ में तलहा तालुकदार ने कबूल किया था कि उसके साथ सलाउद्दीन सालिम और इफ्तकार नाम के 2 अन्य बांग्लादेशी भी अवैध तौर पर दारुल उलूम में रह कर अरबी पढ़ रहे थे।

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राहुल पाण्डेय
राहुल पाण्डेयhttp://www.opindia.com
धर्म और राष्ट्र की रक्षा को जीवन की प्राथमिकता मानते हुए पत्रकारिता के पथ पर अग्रसर एक प्रशिक्षु। सैनिक व किसान परिवार से संबंधित।

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